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धर्मगुरु, नेता व अमीरों का गठजोड़

Posted On: 22 Apr, 2019 Common Man Issues में

मैं कहता आंखन देखीJust another weblog

आचार्य शीलक राम

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धूर्त बाबाओं, व्यापारी संन्यासियों, योग को ‘योगा’ बनाकर इसे धन्धा बना देने वाले स्वामियों तथा योग के नाम पर शारीरिक कलाबाजी करवाने वाले सनातन आर्य संस्कृति विरोधी योगाचार्यों ! पतंजलि के नाम पर तुमने इतनी लूट क्यों मचा रखी है? तुम्हारी इन हरकतों के कारण भारत का सनातन योग बदनाम हो रहा है । तुम्हारी इन मूढ़ताओं के कारण सोशल मीडिया पर भी लोग कहने लगे है कि योग क्या है- युवकों का ध्यान बेरोजगारी से हटकार हैल्थ की तरफ लगा बहलाना । योग की जरूरत उन भरी तोंदों को है जिनका पेट भरा हुआ है । उनको जरूरत है योग की जिनका घर नोटों से व पेट खाने से भरा है । योग की जरूरत लूटेरी-निकम्मी सरकारों को है-टाईम पास के लिए या बेवकूफ बनाने के लिए । शायद योग की जरूरत है रामदेवों की झोली भरने के लिए । बेरोजगारों को, मजदूरों को रोटी की जरूरत खाए तो वे योग करें । उनका भी इलाज उन्हें जियो का नेट थमाकर दूसरी भूख सहलाने में व्यस्त करो । आरक्षण व गैर आरक्षण पर भिड़ा दो । तू मेरी रोटी खा गया-तू मेरी ।

इन भारतीय मूर्खों को- बिल्लयिों को-कौन बताए कि दोनों की रोटी तोलते-तोलते बंदर रोटी खा गया है । नेता खा गये हैं व अब भी खा रहे हैं । खाने में जहर मिल रहा-योग करो । पानी के लिए हाहाकर मचा है – योग करो । दमे व सांस के मरीज प्रदूषण से बढ़ रहे-योग करो । नदियाँ सूख सड़ गई-योग करो, धरती नंगी होकर कंक्रीट के दैत्य के नीचे दबी है-योग करो, कश्मीर में आग लगी-योग करो । पढ़े-लिखे बच्चे गोबर-कचरा ढो रहे, खून के आँसू रो रहे-योग करो । बेटियों के रेप हो रहे, पैसे के लिए भी रेप करवाती फिर रही-योग करो । मोटी-मोटी तोंदों वाले लूटेरों व कामचोरों लुटेरों योग करो । घर-बाहर का काम तो तुम्हारा बाप करेगा । खाए-पिए अघाए लोगों-योग करो, करवाओ । छक-छककर फेसबुक पर बैठ तृप्त होकर बधाई दो-योग करो । सही योग तो रामदेवों और सरकार का हुआ है अतः छके लोगों द्वारा मूर्ख लोगों को योग पर लगाया जा रहा है । नोटंकी चालू है अतः इसलिए योग करो । मूर्खों! योग करो, गधों योग करो । उल्लुओं! योग करो । धूर्त घोड़ों का ओदश हुआ है योग करो । खेत में खड़े विवश किसानों, सीमा पर फायरिंग के सामने खड़े जवानों! योग करो । देशवासियों! जितना लूट सको लूटों तथा भोग करो । सरकार को सहयोग करो ।

हर चमकती वस्तु सोना नहीं होती । धूर्त ठग व्यापारियों ने योग, साधना, अध्यात्म, हिंदुत्व, स्वदेशी, राष्ट्रवाद, आयुर्वेद, इतिहास, राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रीय अस्मिता आदि सभी को अपने लूट व शोषण के व्यापार, अपने तुच्छ अहम् के प्रदर्शन व राष्ट्र के सामने मुंह बायें खड़ी बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा, कुशिक्षा, कान्वेंट शिक्षा, भूख, अन्याय, शोषण, महंगाई, गरीबी, अभाव, खेतीबाड़ी में घाटा, सेना के अपमान, किसानों द्वारा आत्महत्या, कुटीर उद्योगों की बर्बादी, भ्रष्टाचार, काला धन, अमीरों की राष्ट्रीय लूट, मल्टीनेशनल कंपनियों की गुलामी, एफडीआई की गुलामी, जीएसटी, बुलेट रेल का पाखंड, स्मार्ट सिटी का ढोंग, विदेशी भाषा की गुलामी, गोहत्या, राममंदिर निर्माण से पलटी मारना, धारा 370 पर धोखा, आतंकवाद पर घुटने टेक देना, कश्मीर से पलायन करना, कश्मीरी हिन्दुओं की दुर्गति, पाकिस्तानी का ईलाज न कर पाने, सही इतिहास न पढ़ा-लिखा पाने, राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान आदि सैंकड़ों विकराल समस्याओं से ध्यान हटाने का माध्यम बना लिया है । राष्ट्र लूटेरे हैं ये, धर्म लूटेरे हैं ये, योग लूटेरे हैं ये, स्वदेशी लूटेरे हैं ये, युवा लूटेरे हैं ये, किसान लूटेरे हैं ये । नेता, धर्मगुरु, योगगुरु, मीडिया, अमीर घराने, मल्टीनैशनल कंपनियां व ईसाई-इस्लामी मिशनरीज का यह लूटेरा जमावड़ा भारतराष्ट्र को लूट रहा है। सावधान इन लूटेरों से । सम्मोहित कर रखा है इन्होंने लोगों को…. इन्होंने नकली राष्ट्रवाद, नकली योग, नकली योग शिविर, नकली आयुर्वेद, पाखंडी स्वदेशी, नकली धर्म, नकली हिंदुत्व, दिखाने की गौवधबंदी, राममंदिर निर्माण का झूठा आश्वासन, सेना के नाम पर दिखावा करने की शराब पिला-पिलाकर भारतीय जनमानस को बेहोश कर रखा है। समस्याओं से ध्यान हटाने के प्रोपगैंडे हैं ये सब इनके। भारत आज भी सिसक रहा है समस्याओं के अंबार से । इन्हें तो बस भूखे, प्यासे, अशिक्षित, अभावग्रस्त, गरीब, कुशिक्षित, असुरक्षित, आतंकित, बिमार, बेरोजगार भारत को योग सिखलाना है । इन मिशनरी अंग्रेजियत सैमेटिक धूर्त, ठग व लूटेरों के षड़यंत्रों से सावधान रहना अति आवश्यक है । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के चिन्तक दीनदयाल उपाध्याय व श्यामाप्रसाद मुखर्जी की हत्या की जांच से बेहद विस्मयकारक जानकारियां मिल सकती हैं । बड़े-बड़ों की पोल खुल सकती है; लेकिन जांच करवाये कौन? शायद खुद के फंसने की चिन्ता हो ।
जो दीनदयाल उपाध्याय की हत्या की जांच नहीं करवा सकते वे भला स्वामी श्रद्धानन्द, सुभाषचन्द्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री आदि की मौत की जांच क्यों करवाने लगे? आपके हाथ में अब तो सब कुछ है; करवाईये ना जांच । कबीर के नाम पर मजहब की दुकानदारी करने वालों ने पता नहीं क्या-क्या मूढ़तांए प्रचलित कर दी हैं और ये सब के सब कबीर के विरुद्ध हैं । उत्तर भारत में तो इन्होंने पाखंड, ढोंग व शोषण की सारी सीमाओं को तोड़ दिया है । शायद सर्वाधिक पाखण्ड इन नामदानियों ने कबीर का सहारा लेकर ही फैलाया है । यदि आज कबीर संसार में आ जाएं तो सबसे पहले अपराधी, पाखंडी व शोषक रामपाल की सोटे मार-मारकर धुनाई सबसे पहले करें। कबीर के नाम का सर्वाधिक मानव आत्माओं का शोषण व दुरुपयोग इस ढोंगी ने ही किया है। मूढता, बुद्धिहीनता, पाखंड, ढोंग, शोषण व भ्रष्टता के सारे रिकार्ड तोड दिये हैं इस दुरात्मा जेल काट रहे अपराधी ने। मंदसौर की बच्ची के साथ रेप पर वहां के भाजपा विधायक लड़की के माँ-बाप से भाजपा सांसद का धन्यवाद करने को कहकर मैडिकल में ही हंसते हुये बतिया रहे हैं । बेशर्मों डूब मरो कहीं पर! संघ व भाजपा ने यही संस्कार दिये हैं तुम्हें? मर्यादा व शर्म नाम की चीज बची ही नहीं इनके पास । थोड़ी तो गम्भीरता दिखलाईये । कुछ तो अक्ल से काम लीजिये । भाजपा के मत से स्विस बैंकों का सारा धन या काला धन नहीं है । भाजपा ने यह बात पहले तो कभी नहीं कही थी । क्या अपनों का ही तो नहीं है यह सब काला धन? आपको कैसे मालूम हो गया कि यह काला धन नहीं है? कांग्रेस राजम में पूरे भारत को सिर पर उठाये रहते थे स्विर बैंकों में जमा काले धन के नाम पर। अब चार साल से वह सारा काला धन आपको सफेद दिखलाई पड़ने लगा है । जरूर सारी दाल की काली है । वायदा किया था गंगा साफ करने का लेकिन लूटेरों ने बैंक ही साफ करवा दिये। पूरा देश पकौडे तलेगा, चाय बनायेगा, समौसे व टिक्की बेचेगा, मुंगफली की रेहड़ी लगायेगा या भुट्टे बेचेगा और ये धूर्त भारत की पूरी संपदा पर कब्जा किये रहेंगे। कितनी अजीब सोच है? खुद तो देश को जमकर लूट रहे हैं लेकिन बाकी भारत बन्धुआ मजदूरी करेगा । यह घातक सोच है इनकी । यदि इनकी चली तो पूरा देश बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का बन्धुआ मजदूर बन जायेगा । अन्य व्यापारों के साथ इस समय योग, स्वदेशी, आयुर्वेद, कथा आयोजन, राजनीति, शिक्षा, आरक्षण, आतंकवाद, मजहबी प्रवचन, सैक्स, मजहब के नाम पर जमीन हड़पना तथा मजहब के नाम पर टैक्स में छूट पाना आदि सबसे बडा व्यापार है। यह सब नेताओं, उच्च अधिकारियों व धर्मगुरुओं के गंदे गठजोड़ से चल रहा है। बाबाओं के झंूडयोग ने योग को बदनाम करने में कसर बाकी नहीं रखी है। धूर्तों! सब कुछ तुम्हारे हाथ में है अब। बदल डालो कांग्रेसी व्यवस्था को । बदल डालो 70 वर्ष से लागू लूटेरी व्यवस्था को । संधी व भाजपायी भाईयों! अब क्यों कुछ नहीं कर रहे? सनातन हिंदू राष्ट्र की स्थापना करो अब। बदल डालो अंग्रेजी व कांग्रेसी संविधान को। हिंदी व संस्कृत को पूरे भारत में लागू क्यों नहीं करते? जुमलेबाजों! क्या हुआ? विपक्ष में रहते हुये ही तुम हिन्दू राष्ट्र की बात करते हो लेकिन सत्ता मिलते ही तुम चुप हो गये । भारतीय दर्शनशास्त्र इस धरा पर सर्वाधिक समृद्ध तथा धरती के समस्त दर्शनशास्त्रों का प्रेरणा स्त्रोत रहा है । दर्शनशास्त्र में किसी सभ्यता व संस्कृति के अध्ययन हेतु कौनसी पद्धति को स्वीकार किया जाये? भारत में इस हेतु अद्वैत में अध्यारोप अपवाद, माध्यमिक बौद्ध में प्रसंगापादान, संशयवाद में अमराविक्षेप, न्याय में उद्देश्य लक्षण परीक्षा, मीमांसा में वाक्यार्थ निर्णय पद्धतियां प्रचलित हैं! पश्चिमी जगत में इस हेतु अनुभववाद, बुद्धिवाद, समीक्षावाद, व्यवहारवाद, प्रत्यक्षवाद, संवृतिशास्त्र, उत्तरआधुनिक, नारीवाद व द्वन्द्ववाद आदि पद्धतियां स्वीकृत हैं! न्याय व मीमांसा की पद्धतियां 5000 वर्ष से भी अधिक पहले से प्रचलित हैं! लेकिन भारत में अंगे्रजीराज का भारतीय दर्शनशास्त्र विरोधी बहाव आज भी बह रहा है । भाजपा राज में इसकी गति धीमी होने की बजाय तीव्र ही हुई है । संघ व भाजपा पिछले चार वर्ष से संस्कृत, राष्ट्रभाषा हिंदी, वेद व उपनिषद, हिंदुत्व को सिखलाने व शोध करने हेतु एक भी ढंग का संस्थान नहीं खोल सके! पिछले 90 वर्ष से राष्ट्रवाद, स्वदेशी, देववाणी संस्कृत व राष्ट्रभाषा हिन्दी चिल्ला रहे हैं लेकिन आज तक इन्होंने इनके लिये कुछ नहीं किया! इनके नाम पर लोगों की भावनाओं को भड़काकर अपना उल्लू सीधा करना ही संघ व भाजपा का लक्ष्य रहा है! चार साल से पूर्ण बहुमत की मोदी जी की सरकार है लेकिन आज तक इन्होंने कुछ भी क्रान्तिकारी नहीं किया! हिंदुओं व भारत का दुर्भाग्य इनका साथ नहीं छोड़ा रहा है!
हिंदू ही हिंदू को ठग रहा है! संघ, इसके विभिन्न संगठन व भाजपा पिछली लगभग एक सदी से हिंदुओं के साथ विश्वासघात करते आ रहे हैं!पहले असहाय थे सत्ता नहीं होने से, लेकिन अब तो छह वर्ष वाजपेयी तथा चार वर्ष मोदी जी प्रधानमंत्री रहे चुके हैं! सनातन हिंदुत्व हेतु कुछ भी नहीं कर रहे हैं! सिर्फ सत्ता प्यारी है इन्हें! इन्होंने अमीर घरानों व मल्टीनैशनल कंपनियों को भारत गिरवी रख दिया है! किसान, मजदूर, कर्मचारी व युवा को मिले हैं सिर्फ वायदे, भड़काऊ भाषण, प्रवचन, पाखंडी योग, परस्पर लड़वाना तथा गरीबी, बेरोजगारी व अभाव! लोग यदि इनसे प्रश्न करते हैं तो ये लोगों को ही गालियां देकर या उन्हें हिंदूविरोधी कहकर उनका मुंह बंद करने का दुस्साहस करते हैं! अरे महामूढ स्वार्थियों! हिंदुत्व के साथ इस तरह का विश्वासघात करके कहां जाओगे? अब तो सत्ता पूरी तरह से तुम्हारे पास है! क्रांति करके हिंदू राष्ट्र की स्थापना क्यों नहीं करते? हिंदू, हिंदी, संस्कृत, अन्य भारतीय भाषाओं, वेद, उपनिषद, व्याकरण, गीता आदि के अध्ययन-अध्यापन हेतु 100-200 विश्व स्तरीय संस्थान क्यों नहीं खोलते हो? तुम तो मुगल व अंग्रेजों से भी बदतर सिद्ध कर रहे हो अपने आपको। गालियों व उपेक्षा के हकदार तो तुम हो । कांग्रेस तो कभी भी (भाजपा व संघ के मत से) आर्य सनातन हिंदू संस्कृति, सभ्यता, राष्ट्रभाषा भारती हिंदी, देववाणी संस्कृत, जीवन-मूल्यों, दर्शनशास्त्र, धर्म, व्याकरण, वेद, ब्राह्मण, स्मृति, महाकाव्यों, पुरातन विज्ञान, उपनिषद, गीता, चिकित्सा, सत्य इतिहास, प्रतीकों, स्वदेशी, राष्ट्रवाद, राष्ट्रभक्ति आदि के उच्चकोटि के अध्ययन, अध्यापन व शोध हेतु सैकडों संस्थान नहीं खोल सकती… लेकिन भाजपा व संघ ने अपने दस वर्ष के शासनकाल में यह पुनीत काम क्यों नहीं किया? कहां चली गई है इनकी हिन्दू राष्ट्र के प्रति भक्ति? करते क्यों नहीं अब कुछ? ये क्यों ठग रहे हैं हिंदुओं को? सोचो आर्य हिंदुओं …..सोचो! कोई भी बदलाव कानून बनाने से होता है, न कि केवल वायदे करने से! दबाव डालो अपने नेताओं पर कि वे पुराने कानून समाप्त करके नये कानून बनाकर यह राष्ट्र निर्माण का कार्य संपन्न करें! भारत को भारत कब बनाऐंगे ये? इंडिया से भारत निर्माण करवाने की कहो इनसे । पिछले चार साल में भाजपा सरकार कश्मीर में कोई भी राष्ट्रवाद का करिश्मा नहीं दिखला पायी है! उल्टे मोदी जी ने पूरी दुनिया में हिंदू राष्ट्रवाद व पौरुष की हँसी ही करवाई है! कश्मीर में आतंकवाद पहले की अपेक्षा बढा है, सैनिकों का बलिदान पहले की अपेक्षा ज्यादा हो रहा है, कश्मीरी हिंदुओं के बसाने हेतु कुछ नहीं किया गया, धारा 370 पूर्ववत है, …….सिर्फ जुमलेबाजी चल रही है! और अब कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली को धमकियां भी दे रही है आतंकवाद पैदा करने व करवाने वालों की तफर से । आरक्षण के बल पर अमरीका या जापान या इजरायल या आर्यावर्त की तरह का भारत नहीं बन सकता। हां, अफ्रीका की तरह भूखे, नंगे, बेरोजगार, निठल्ले, पिछडे व मुफ्तखोर लोगों की भीड़ जरुर तैयार हो जायेगी। नेकेड़ योगा यानि योग के नाम पर भोग और कामुकता का प्रदर्शन । यह सब पश्चिम मंे चल रहा है । योग संसार को भारत की महान देन है। अति प्राचीन काल में भारत के ऋषियों ने योग के सिद्धान्त विकसित किए थे। इन सिद्धान्तों पर संस्कृत में बड़े-बड़े ग्रन्थ लिखे गए हैं। इनमें योगसूत्र, योगसूत्र भाष्य, टीकाएं तथा हठयोग के ग्रन्थ हठयोग प्रदीपिका, शिवसंहिता, घेरण्ड संहिता आदि प्रमुख हैं। उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी में भारत के विभिन्न योगियों, योगाचार्यों और धर्मप्रचारकों द्वारा योग पश्चिमी देशों में गया। बहुत से पश्चिमी यात्रियों ने भी भारत-भ्रमण के दौरान यहाँ के योगियों की योग-साधना देखकर उसे पश्चिमी देशों में प्रचारित किया। फलस्वरूप भोग-वासना में आकण्ठ डूबे तथा मानसिक शान्ति खोकर तनाव की अग्नि में जल रहे पाश्चात्य जगत् को भारतीय योग की शीतल छाया में परम शान्ति का अनुभव हुआ। उन्होंने योग को हाथों हाथ लिया। धीरे-धीरे भारतीय योगियों से योग सीखने के स्वामी विवेकानन्द, लिए भारत आने वाले विदेशी युवक-युवतियों का ताँता लग गया। ओशो रजनीश, टी. कृष्णमाचार्य, इंद्रा देवी, बी.केएस. आयंगर, के. पट्टाभी जोइस, शिवानंद आदि योग गुरुओं के प्रयास से योग पश्चिमी दुनिया में अतिशय लोकप्रिय हो गया। बीसवीं शती के मध्य में पश्चिमी देशों में भारतीय योगियों की योग-क्रियाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन भी हुआ। पश्चिमी दुनिया के बहुत से कलाकार, संगीतकार, खिलाड़ी आदि योग से जुड़े। लेकिन सैक्स को लेकर नाना प्रकार के प्रयोग करने के लिए प्रसिद्ध पूंजीवादी संस्कृति के पोषक और दुनिया को बाजार मानने वाले पश्चिमी जगत् ने विगत दो दशक से योग-जैसी पवित्र विद्या को भी सेक्स से जोड़कर उसकी मार्केटिंग करनी शुरू कर दी है। योग पर ग्लैमर के साथ-साथ सैक्स का रंग चढ़ाकर योग के सारे आसन और प्राणायाम को एक प्रोडक्ट बनाकर बेचने का प्रयास किया जा रहा है। रामदेव जैसे लोग भी योग को योगा बनाकर बेचने वालों में अग्रणी हैं । इन्होंने सेक्स की बात नहीं की लेकिन योग को एक व्यापार रूप देकर दौलत खड़ी करने में फिलहाल ये अग्रणी हैं । इस हेतु इन्होंने अपने पूर्व में किये सारे वायदे भूला देने पड़े हैं । भारतीय और पश्चिमी योग में क्या अन्तर है, यह इतने से समझा जा सकता है कि भारत ने संसार को हठयोग, राजयोग, क्रियायोग, कुण्डलिनीयोग, भक्तियोग, लययोग, ध्यानयोग, मन्त्रयोग, पुरुषोत्तम योग, आदि दिये तो पाश्चात्य जगत् ने दुनिया को नेकेडयोगा अथवा न्यूड योगा, डोगा योगा, बीयर योगा, सेक्सी योगा, बुटी योगा, सुप (स्टैण्ड अप पैडलबोर्ड) योगा, वीड योगा अथवा हाई योगा, एरियल योगा, ब्रोगा योगा, एक्रो योगा, एक्वा योगा, लाफ्टर योगा, शैडो योगा, आदि दिये। क्या किसी ने कल्पना की होगी कि पश्चिम में योगविद्या को इतना विकृत करके प्रस्तुत किया जायेगा? कहने की आवश्यकता नहीं कि इनमें से किसी भी क्रिया का भारतीय योग-सिद्धान्तों से कोई लेना-देना नहीं है। रामदेव आदि भी इन्हीं पाश्चात्य नकली योगियों की तर्ज पर अपना कार्य कर रहे हैं । पहले तो ‘योग’ को ‘योगा’ लिखे जाने के कारण योग की भारी क्षति हुई, अब ‘न्यूड योगा’ ने मर्यादा की समस्त सीमाएँ लाँघ दी हैं। अमेरिका, कनाडा, इंग्लैण्ड, स्पेन, रूस, आॅस्ट्रेलिया, आदि देशों के बड़े-बड़े शहरों में ‘न्यूड योगा क्लब’ खुल गए हैं जहाँ पूर्णतया नग्न होकर योगा टीचर ‘न्यूड योगा’ के आसन सिखाते हैं। सीखनेवाले भी पूर्णतया निर्वस्त्र होते हैं। अंतरराष्ट्रीय सेलिब्रिटीज में तो ‘न्यूड योगा’ को लेकर दीवानापन है। इस सूची में जैनिफर लोपेज, रीटा वाटसन और नाओमी वाट्स, आदि के नामों का उल्लेख किया जाता रहा है। पश्चिम में अनेक पत्र-पत्रिकाओं में ‘न्यूड योगा’ के चित्र प्रकाशित करके इसका प्रचार किया जा रहा है। महंगे दामों पर इनके वीडियो बेचे जा रहे हैं। इस तरह पूर्वी देशों में इसके प्रचार की पूरी तैयारी चल रही है। भारत में भी बालीवुड-सेलेब्रटीज द्वारा कम कपड़ों में योग-क्रियाएँ प्रारम्भ करके ‘न्यूड योगा’ की ब्राण्डिंग की जा रही है। यदि यह ‘न्यूड योगा’ भारत में आ गया, तो यह देश के और भी रसातल में चला जायेगा । आजकल के नकली भारतीय योगी व इनके अन्धानुयायी योग की बदनामी में अग्रणी होकर काम कर रहे हैं । ये इस पाश्चात्य ‘न्यूड़ योगा’ के लिये भारत में कड़ी का काम करेंगे । आर्य समाज जैसी संस्थाएं पहले सक्रिय थीं लेकिन अब तो स्वयं आर्य समाज भी रसातल में चला गया है । इनके यहाँ भी अनेक पाखण्ड प्रचलित हो गये हैं । इन्हें स्वयं ही सुधार की जरूरत है । राम नाम वाले बाबा, गुरु व संत आजकल खूब उपद्रव, लूट व शोषण कर रहे हैं। राम रहीम, रामदेव, रामपाल, रामवृक्ष आदि आदि। हमारे नेता किसी न किसी रूप से इन ढोंगियों के सहायक ही मिलेंगे । इन ढोंगी योगियों, नेताओं व अमीरजादों का गठजोड़ सदा से ही किसी न किसी रूप मे सदैव से रहा है । इस गठजोड़ का विनाश किया जाना जरूरी है ।

आचार्य (डा) शीलक राम वैदिक योगशाला कुरुक्षेत्र

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