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मौन तोड़ ना सका

Posted On: 5 Jul, 2011 Others में

बावरा मन Just another weblog

shivnathkumar

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silence
मौन तोड़ ना सका

कुछ बोल ना सका

अंगराई लेती

उथल पुथल मचाती

संवेदनाएँ, भावनाएँ

बनकर आँसू

नयनों से गिर पड़े

मिल धूल धरा में

खोते अपने अस्तित्व को

फिर बोल पड़े

” जिंदा रहूँ तुझमें

मेरी अभिलाषा है

एक दरिया तेरे अंदर

फिर भी क्यूँ प्यासा है

हो सके तो, अगली बार

मौन तोड़ना

बोलना, कुछ जरुर बोलना ”

kumarshivnath.blogspot.com

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