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जहां की संस्कृति अमिट अपार

Posted On: 30 Sep, 2010 Others में

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Shrikant Singh

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उछलती धवल गंग की धार, बनाती हों यमुना गम्भीर।
सुन रहे हों नित नवल पुकार, भारती का भारत के धीर।

जहां पावन नदियों का मेल, पुण्य बरसाता संगम तीर।
पाप हरने का होता खेल, मिले पावन गंगा का नीर।

घाघरा, गंगा, यमुना आदि, जहां नदियों का मिले दुलार।
वही है अपना भारत देश, जहां की संस्कृति अमिट अपार।

मनुजता का देती सन्देश, सिखाती सबसे करना प्यार।
जहां पर आते हैं भगवान, सभी का करते हैं उद्धार।

समस्याओं को पीछे छोड़, लक्ष्य सामने रखो हे वीर।
कर्मयुत जीवन में तज आस, धन्य कर दो यह अधम शरीर।

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