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दिल में आग है

Posted On: 12 May, 2011 Others में

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Shrikant Singh

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29 Comments

दुनिया की दुनियादारी से किसको विराग है
लोभी पतिंगों के लिए दोषी चिराग है
बारूद के एक ढेर पर बैठी है ये दुनिया
बारूद से ज्यादा हमारे दिल में आग है

Dil men aag
Dil men aag
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