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आंगन सूना बिन तुलसी के

Posted On: 7 Apr, 2016 Others में

Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'this blog contains the pain of society. different colours of life.feelings and as seen from my own eyes .title ..as Naari..Pagli.. koyala.sukhi roti..ghav bana nasoor..ras-rang etc etc

surendra shukla bhramar5

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भोर हुआ, थी रंग -बिरंगी आसमान में छाई बदली
इंद्रधनुष था गगन-धरा मंडप पर शोभित
पुष्प-अधर कलियाँ मुस्कातीं – जैसे गातीं
मन-भावन हे अनुपम छटा से दिल था मोहित !
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स्वर्ण झील ज्यों भारत माता उसमे अंकित
स्वर्ण रश्मि बरसाते सूरज कण-कण झंकृत
जय-जय-जय उद्घोष सा कलरव- थे सातों सुर
नाना वर्ण की चिड़ियाँ पूरब- स्वर्ग जमीं पर
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ऊंचे-ऊंचे पर्वत वन थे – शांत झील को घेरे
प्रहरी वन जी जान निछावर करते जैसे वर्फ-गोद में सोये
माँ से शीतलता पाने को -योग ध्यान में खोये
पाते और लुटाते पल -पल पाप हरे ज्यों तेरे -मेरे
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पर्यावरण को शुद्ध रखे हम आओ पौधे और लगाएं
स्वच्छ वायु में सांस भी ले लें जीवन-जल भी पाएं
कंक्रीट का जंगल विन जल पशु -पक्षी ना आएं
आंगन सूना -विन तुलसी के -दीपक कल फिर कौन जलाए ?
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कुल्लू हिमाचल भारत
६ अप्रैल २०१६
८.३० पूर्वाह्न -९ पूर्वाह्न

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