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जो मुस्का दो खिल जाये मन

Posted On: 24 Feb, 2014 Others में

Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'this blog contains the pain of society. different colours of life.feelings and as seen from my own eyes .title ..as Naari..Pagli.. koyala.sukhi roti..ghav bana nasoor..ras-rang etc etc

surendra shukla bhramar5

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जो मुस्का दो खिल जाये मन

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खिला खिला सा चेहरा तेरा

जैसे लाल गुलाब

मादक गंध जकड़ मन लेती

जन्नत है आफताब

बल खाती कटि सांप लोटता

हिय! सागर-उन्माद

डूबूं अगर तो पाऊँ मोती

खतरे हैं बेहिसाब

नैन कंटीले भंवर बड़ी है

गहरी झील अथाह

कौन पार पाया मायावी

फंसे मोह के पाश

जुल्फ घनेरे खो जाता मै

बदहवाश वियावान

थाम लो दामन मुझे बचा लो

होके जरा मेहरबान

नैन मिले तो चमके बिजली

बुत आ जाए प्राण

जो मुस्का दो खिल जाए मन

मरू में आये जान

गुल-गुलशन हरियाली आये

चमन में आये बहार

प्रेम में शक्ति अति प्रियतम हे!

जाने सारा जहान

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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

२०.०२.२०१४

४.३०-५ मध्याह्न

करतारपुर जालंधर पंजाब

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