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तुलसी गीता रंक वास में

Posted On: 1 Mar, 2012 Others में

Bhramar ka 'Dard' aur 'Darpan'this blog contains the pain of society. different colours of life.feelings and as seen from my own eyes .title ..as Naari..Pagli.. koyala.sukhi roti..ghav bana nasoor..ras-rang etc etc

surendra shukla bhramar5

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तुलसी गीता रंक वास में
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images
(फोटो साभार गूगल/नेट से लिया गया )

अरे विधाता क्यों कठोर तू
पत्थर मूरति मंदिर बैठा
देख देख हालत दुनिया की
क्यों ना दिल है तेरा फटता
कुछ तो दया दिखाओ
अब आओ अब आओ ..
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प्रेम की अलख जगा दे जोगी
सब होते-सब आज हैं रोगी
सडा गला मन लेकर घूमें
बाज गिद्ध सब -हंस न दिखते
दुनिया ज़रा बचाओ
अब आओ अब आओ .
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बड़े महल हैं सजे सजाये
मन मिलता -ना -नैन मिलाये
तुलसी गीता “रंक” वास में
पावन गंगा -जल डाले तुम
जीवन सरल बनाओ
अब आओ अब आओ .
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प्यारे बच्चे घूम रहे हैं
भूखे नंगे रोते सोते
कहीं बाँझ गोदी है सूनी
विपदा सब हर जाओ
अब आओ अब आओ .
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नयन विहीन -चक्षु दे जाओ
बेसुर को सुर ताल सिखाओ
उस गरीब को हक दिलवाओ
पत्थर दिल पिघलाओ
अब आओ अब आओ .
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नैनो में तुम ज्योति जगा दो
मन खुश्बू भर जाओ
शान्ति ख़ुशी – सुख भरा हो आंगन
राम-राज्य फिर लाओ
अब आओ अब आओ .
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भरो ताजगी जोश होश सब
सूरज चंदा बन चमकें
धरती गगन सा हो विस्तृत मन
पुलकित रोम-रोम मन महके
मुक्त फिरें हम संग-संग गाते
सब को गले लगाओ
अब आओ अब आओ …..
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हरी भरी बगिया हो सब की
बुलबुल कोयल चहकें
मन-मयूर हों नर्तन करते
चंदन -पुष्प-सरीखे महकें
तितली सा- शिशु मन -उड़-उड़
इन्द्रधनुष हो जाए
अब आओ… अब आओ …..
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल “भ्रमर५”
७.२१-७.४५ पूर्वाह्न
करतारपुर जल पी बी २४.०२.12

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