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अमेरिकन राष्ट्रपति और उत्तरी कोरियन तानाशाह किम जोंग की राजनीति

Posted On: 19 Jun, 2018 Politics में

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नदी के दो किनारे मिलना असम्भव है लेकिन राजनीति में सब कुछ सम्भव | लगभग एक वर्ष तक कोरियन तानाशाह किम जोंग मीडिया की सुर्ख़ियों में छाये रहे उनका साहस ढाई करोड़ की जनसंख्या वाले देश ने अमेरिका को उनके प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप गुआम पर हमले की धमकी दे दी प्रतिउत्तर में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा उनकी सेना उत्तर कोरिया से निपटने के लिए हर समय तैयार है यदि किम ने नासमझी भरा कदम उठाया तो अमेरिका सैन्य कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा  उत्तर कोरिया बर्बाद कर दिया जाएगा |विश्व के राजनेता परेशान थे किम की वजह से विश्व परमाणु युद्ध के खतरे की और बढ़ रहा है वह पड़ोसी देश जापान को भी धमकाता था उसके जनून से अमेरिका और जापान भी डरता रहा है | मारक क्षमता वाली मिसाईलों का ढिंढोरा पीटा जाता  रहा जबकि जनता पिस रही है विश्व में मीडिया ने ऐसा खाका खींचा जैसे तृतीय विश्व युद्ध होने वाला है |

 

 

सात वर्ष पहले 28 दिसम्बर 2011 को किम जोंग ने पिता किम जोंग इल की हार्ट अटैक से मृत्यू होने के बाद उसने पिता की सत्ता सम्भाली थी ,सत्ता पर परिवार के लोगों का कब्जा रहा है विरासत में उन्हें आर्थिक बदहाली और बंद दरवाजों की राजनीति हासिल हुई |बाहरी दुनिया में किम की अनेक कहानियाँ चर्चा में थीं जिनमें निर्दयी किम अधिक मशहूर था उसके देश में परमाणु अविष्कारों का भी जिक्र होता रहता था वह रक्षा बजट पर सबसे अधिक खर्च करते हैं उनके पास आधुनिक हथियारों से लेस शक्ति शाली सेना है, हाईड्रोजन बम का सफल परिक्षण हुआ मारक क्षमता वाली मिसाईलें जिन्हें अमेरिका तक पहुंचाया जा सकता है विनाशक हथियारों का परीक्षण ही नहीं उनका प्रचार भी करता रहा है |उत्तरी कोरिया की बंद दुनिया में किम क्या करते हैं केवल अनुमान ही लगाये जाते रहे |कई अमेरिकन राष्ट्रपति किम के पिता से सम्पर्क करना चाहते थे लेकिन सम्बन्ध बने नहीं | 28००० अमेरिकन सैनिक एवं जंगी जहाजी बेड़ा साउथ कोरिया के पास  के क्षेत्र की रक्षा के लिए तैनात है जिन होने वाला खर्च बहुत है |

छह वर्ष तक तानाशाह देश से बाहर नहीं  निकला उसके देश की आर्थिक स्थिति खराब होती गयी वहाँ की जनता को भरपेट पोष्टिक भोजन भी अब नसीब नहीं होता | इनके पिता जब जनता के लिए अन्न की जरूरत पड़ती थी दक्षिणी कोरिया  को धमकाते जरूरत के सामान से भरे ट्रक आ जाते थे भय से या दान में ? किम की नीति उग्र राष्ट्रवाद एवं सैनिक ताना शाही की है लेकिन उसने महसूस किया यदि उत्तरी कोरिया पर अपनी सत्ता बचाए रखनी है अमेरिका से सम्बन्ध सुधारने चाहिए इससे उसके देश पर लगी आर्थिक बंदिशों खत्म हो इसलिए अमेरिकन राष्ट्रपति से वार्ता की टेबल पर आना चाहता था | पहले वह राजनीतिक यात्राओं पर निकला है ट्रेन द्वारा चीन की यात्रा पर गया चीन और उत्तरी कोरिया की नजदीकियां सभी जानते है | डिक्टेटर ने साउथ कोरिया से भी नजदीकियाँ बढ़ाने की कोशिश की दोनों देशों के बीच में खींची गयी छह इंच की दीवार की दोनों ने पार किया लेकिन दीवार पार करने से पहले साउथ कोरिया में चलने वाले ओलम्पिक खेलों को में भाग लिया किम की बहन खेलों के बीच में उपस्थित थीं उनका गर्म जोशी से स्वागत किया गया |

कुछ शर्तों के साथ ट्रम्प और किम की वार्ता की तिथि निश्चित की गयी जिसमें दक्षिणी कोरिया के राष्ट्रपति मून का भी हाथ है | पहली बार विश्व के नीति कारों ने जाना किम के पास अपना सुविधाजनक प्लेन भी नहीं है पुराना रशियन प्लेन है जिससे वह लम्बी यात्रा नहीं कर सकता इसलिए पहले वह चीन गये वहाँ से सिंगापुर उनके साथ उनकी बहन भी थी वह उनके अधिक नजदीक है और उसके  रक्षको का काफिला, जब वह कहीं जाता है साथ चलता है किम की सुरक्षा में तैनात गार्ड पैदल दोनों तरफ भागते हैं एवं वार्ता कारों का काफिला भी था ट्रम्प और किम अलग होटलों में ठहरे लेकिन उनकी दूरी केवल एक किलोमीटर थी  दोनों राष्ट्राध्यक्ष कड़ी सुरक्षा के बीच रहे सिंघापुर पूरी तरह से सुरक्षित देश है यहाँ पुलिस नजर नहीं आती लेकिन सीसीटीवी कैमरों द्वारा  गहन निगरानी होती है | जिन होटलों में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के रहने की व्यवस्ता की गयी है उधर की सड़क बंद कर दी गयी सिंघापुर के सुरक्षा गार्ड निगरानी कर रहे थे |

श्री ट्रम्प की शर्त एवं अमेरिकन दबाब में पहले विदेशी पत्रकारों की उपस्थिति में उत्तरी कोरिया के एटमी ठिकाने नष्ट किये |वह जानता है साउथ अफ्रिका उसकी मदद कर सकता है लेकिन अमेरिका से सम्बन्ध सुधारने के बाद | ट्रम्प किसी भी तरह किम से वार्ता को सफल बनाना चाहते थे अमेरिकन नीतिकार मानते हैं किम चीन के अधिक नजदीक है चीन विश्व में अपना आर्थिक साम्राज्य बढ़ाना चाहता है अत : यदि किम को अपने पाले में लाना सम्भव न हो सके वह तटस्थ बना रहे |ट्रम्प 36 घंटे पहले सिंगापुर पहुंच गये 71 वर्ष के ट्रम्प 34 वर्ष छोटे कद के किम | दोनों सम्बन्ध सुधारने के इच्छुक | दोनों ने हाथ मिलाये यह हैंड शेक 12 सेकेंड चला ट्रम्प ने अपनी आदत के अनुसार किम की पीठ पर हल्की थपकी भी दी | ट्रम्प किम से सीधे 90 मिनट तक बात हुई जिनमे 45 मिनट दोनों में अकेले वार्तालाप हुआ केवल उनके साथ ट्रांसलेटर थे |दोनों जब बाहर आये किम सोच मग्न थे उनकी हंसी फीकी थी ट्रम्प के चेहरे पर भी गम्भीरता थी लेकिन वह सहज दिखाने की कोशिश कर रहे थे दोनों ने हाथ हिलाये , उनकी 45 मिनट सबके बीच सीधी वार्ता | श्री ट्रम्प ने उत्तरी कोरिया के सेनाध्यक्ष को सेल्यूट कर कूटनीति का परिचय दिया किम को किसी भी कीमत पर अपनी गद्दी सलामत चाहिए अमेरिका इस क्षेत्र से अपनी सेनायें हटा ले अमेरिका द्वारा लगाये गये आर्थिक  प्रतिबन्ध समाप्त हो जाए जबकि अमेरिका भी एटमी हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने का इच्छुक है |

आपसी वार्ता के बाद आपसी सम्बन्ध जल्दी नहीं सुधरेंगे अभी तो दो राष्ट्राध्यक्ष आमने सामने पहली बार आये हैं | 65 वर्षों की दूरी समय के साथ खत्म होगी हाँ  पोते ने कोशिश की है | किम को ट्रम्प ने अमरीका आने का न्योता दिया गया  ट्रम्प की जरूरत है किम से कई समझौते हो जायें वह इतिहास में शान्ति दूत की  छवि बनाना चाहते हैं | किम मजबूर हैं उसने कूटनीति का पर्ची देते हुए रंग बदला है उनके पास अत्याधुनिक हथियार होंगे वह एटमी ताकत भी है लेकिन देश की आथिक स्थिति खराब है वह पूरी तरह चीन पर निर्भर है उसका 90% सामान से चीन आयात होता है खास कर रसायन एवं पेट्रोलियम चीन के द्वारा मिलता है| चीन की सीमा के पास का पड़ोसी देश जापान ,भौगोलिक स्थित की मजबूरी जापान के प्रधान मंत्री शिंजो आबे की नजर उत्तरी कोरिया पर है वह पूर्ण तया परमाणु निरस्त्रीकरण चाहते हैं उनके देश ने एटमबम का दंश झेला था उनके देश के ऊपर से उत्तरी कोरिया द्वारा चलाई गयी मिसाईल गुजरी हैं |

चीन साऊथ चीन सागर में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है उसे अपना क्षेत्र बताता है अन्य राष्ट इस सागर में सैनिक अभ्यास करते रहते हैं | आस्ट्रेलिया न्यूजीलेंड भारत एवं मयन्मार सभी चिंतित हैं उत्तरी कोरिया के पाला बदलने पर चीन का दबदबा घटेगा | साउथ और उत्तरी कोरिया के लोग पास आना चाहते हैं दोनों की एक नस्ल समान इतिहास है | सम्बन्ध बनने पर उत्तरी कोरियन छह इंच की दीवार के पार काम मिलेगा उनकी माली हालत सुधरेगी यहाँ  35 वर्ष की उमर के लोग अधिक हैं जबकि दक्षिण कोरिया की जेनरेशन बूढ़ी हो रही है रूस अपना प्रभाव मध्य एशिया के देशों पर बढ़ाने का सदैव से इच्छुक रहा है अत : अब वह भी किम से नजदीकियाँ बढ़ाना चाहता है उसने भी किम को अपने यहाँ आने का न्योता दिया |सबसे बड़ी बात विश्व के बड़े देशों की किम में रूचि बढ़ रही है कहीं वह पूरी तरह अमेरिका के समीप न चला जाए |

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