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क्या चीन का वीटो भारत की कूटनीतिक हार थी

Posted On: 31 Mar, 2019 Politics में

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फ़्रांस अमेरिका एवं ब्रिटेन ने 27 फरवरी को सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने वीटो के अधिकार का प्रयोग किया | अमेरिका फ्रांस एवं ब्रिटेन द्वारा क्षुब्ध होकर जैश के प्रमुख मसूद अजहर को फिर से अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित कर उसे प्रतिबंधित सूची में डालने को लेकर सुरक्षा परिषद में सीधा प्रस्ताव लाया गया जिससे चीन तिलमिला गया इसमें संदेह नहीं है अमेरिका एवं चीन के साथ टकराव बढ़ेगा इस प्रस्ताव का भी वही हश्र होगा जो अब तक के चार प्रस्तावों का हुआ था | आतंकवाद फंडिंग से चलता है यदि फंडिंग बंद हो जायेगी आतंकवाद पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा फ्रांस द्वारा आतंकवादियों की फंडिंग के रोकथाम का प्रस्ताव पेश किया गया साथ ही सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने फंडिंग से जुड़े प्रस्तावों को सख्ती से लागू करने, फंडिंग करने वालों की जांच कर उनपर मुकदमें चलाये जायें एवं अपराधिक धारायें लगाई जायें प्रस्ताव पास हो गया | फंडिंग पर यदि वास्तव में अंकुश लग जायेगा आतंकवाद की रोकथाम में मदद मिलेगी|

चीन की ‘दोहरी नीति’ उनके यहाँ उरगन मुस्लिम पर जुल्म होता है | मुस्लिम बहुल क्षेत्र शिनजिंयांग प्रदेश के 10 लाख मुस्लिमों को नजर बंद कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है| जबकि अमेरिका के अनुसार चीन यूएन द्वारा आतंकियों को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव पर वीटो करता है अपने देश में मुस्लिम पर जुल्म की नीति अपनाता है चीन सफाई में कहता है कई आतंकियों ने चीनी महिलाओं से शादी कर ली है उनके पतियों के चीन में प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है विश्व मीडिया एवं मानवाधिकारवादियों के अनुसार उरगन मुस्लिम नजर बंद हैं   इस्लामिक देशों के बाजार चीनी सामानों पटे हुए हैं वह चीन से सवाल पूछ रहे हैं ऐसा क्यों ? पहले भी चीन पर आरोप हैं चीन में मुस्लिमों के नमाज ( मस्जिदों में सामूहिक नमाज ) ,रोजों एवं धार्मिक कार्यों पर बैन लगाया गया है उनकी मस्जिदों को अपने हिसाब से तोड़ा जा रहा विदेशों से शिक्षा गृहण कर लौटने वाले मुस्लिम छात्रों को कैद कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है कई गायब कर दिये गये है | चीन ने इसका सीधा उत्तर नहीं दिया लेकिन इससे पहले उनके देश में आतंक सिर उठाये उसने अपने देश में इस्लामिक कट्टर पंथियों को रोकने आतंकवाद के प्रसार से बचने के लिए सख्त कदम उठाये हैं| चीन का मीडिया कहता है उन्हें देश प्रेम सिखाया जा रहा तानाशाही में प्रजातंत्रिक मूल्यों की कोई जगह नहीं होती |चीन ने अपने देश के 30.000 नक्शे इसलिए नष्ट करवा दिए इनमें अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा दिखाया गया है नये नक्शे में ताईवान एवं अरुणाचल प्रदेश को चीन के नक्शे में दिखाया गया है |

सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रबंध समिति के तहत 27 फरवरी को फ़्रांस अमेरिका एवं ब्रिटेन ने सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किया प्रस्ताव में फुलबामा हमले की आलोचना की गयी फुलवामा में पाकिस्तान समर्थित जैश- ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर द्वारा सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमला करवाया तुरंत इसकी जिम्मेदारी भी ली हमले में 40 जवान शहीद हुए थे| अत : कोशिश की गयी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर उसे प्रतिबंधित सूची में डाला जाये चीन के वीटो करने के कारण प्रस्ताव पास नहीं हो सका इसका कारण टेक्निकल बता कर मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने वाले प्रस्ताव को यूनाईटेड नेशन सेक्शंस कमेटी में अटका दिया जबकि यूएन सुरक्षा परिषद के कुल पन्द्रह स्थाई एवं अस्थाई सदस्यों में 14 सदस्य प्रस्ताव के पक्ष में थे यदि मसूद अजहर पर प्रतिबन्ध लग जाता उसकी विदेश यात्राओं पर रोक लग जाती उसकी सम्पत्ति भी जब्त हो जाती |फुलबामा हमले के बाद भारत एवं पाकिस्तान की बीच तनाव बढ़ गया भारत का जन मानस कराह उठा पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने की मांग निरंतर बढ़ती गयी शहीदों के जनाजों पर भारी भीड़, पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाये गये जनता पूछ रही थी पाकिस्तान को इस कुकृत्य का कब सबक सिखाया जाएगा मोदी जी ने भी अपने भाषण में कहा ‘पाकिस्तान ने अच्छा नहीं किया’|

भारत द्वारा सफलतम एयर स्ट्राईक की गयी 26 फरवरी को पाकिस्तान के जैश के बालाकोट क्षेत्र में स्थित आतंकी ठिकानों पर मिराज विमान द्वारा हमला किया गया तब जाकर भारत के नागरिकों का क्षोभ कम हुआ विश्व के अनेक देशों ने भारत का पक्ष लेकर भारत की पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही को उचित ठहराया गया |देश में चुनावी माहौल है अत : विपक्षी दलों ने  सेना के कार्य की प्रशंसा की लेकिन आतंकियों पर की गयी कार्यवाही के प्रूफ मांगे |सुरक्षा परिषद में चीन द्वारा वीटो किये जाने को मोदी जी की कूटनीतिक हार बताया |भारतीय एयर फ़ोर्स द्वारा की गयी एयर स्ट्राईक के विरोध में पाकिस्तान ने भी अमेरिका के एफ-16 जिन्हें अमेरिका ने शर्तों के साथ अफगानिस्तान में लड़ने के लिए दिए थे भारत की सीमा में प्रवेश कर भारतीय  सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की जिनको चौकस भारतीय एयरपोर्स ने भगा दिया यहीं नहीं एक एफ -16 गिरा दिया भारत का एक मिग विमान क्षतिग्रस्त हो गया विंग कमांडर अभिनन्दन को पीओके में कैद कर लिया लेकिन अंतर्राष्ट्रीय दबाब इतना था उन्हें दो दिनों में ही छोड़ना पड़ा |

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई थी चीन संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक था द्वितीय विश्व युद्ध में चीनी सेना को जापान से युद्ध लड़ना पड़ा | 1945 में जापान के समर्पण के बाद चीन की विजयी हुआ लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी |यहाँ गृह युद्ध शुरू हो गया गृह युद्ध में माओत्से तुंग के नेतृत्व की जीत हुई, चांग –काई शेख को अपने समर्थकों के साथ भाग कर ताइवान द्वीप पर शरण लेनी पड़ी यहाँ अपनी सरकार बनाई अमेरिका एवं उनके साथी ब्रिटेन एवं फ्रांस साम्यवादी चीन को सुरक्षा परिषद का सदस्य नहीं बनने देना चाहते थे दोनों प्रतिद्वंदी अंतरराष्ट्रीय

प्रतिनिधित्व के दावे कर रहे थे यू एन के सामने परेशानी थी कौन सी सरकार चीन का वास्तविक प्रतिनिधित्व करती है|

भारत कम्यूनिस्ट चीन को मान्यता देने वाला गैर कम्यूनिस्ट देश था , अमरीका ने लंबे समय तक ताइवान के साथ राजनयिक संबंध रखे |1971 से पहले तक ताइवान सुरक्षा परिषद के पांच सदस्यों में एक सदस्य बना रहा एंग्लो अमेरिकन ब्लॉग नहीं चाहता था साम्यवादी चीन को सुरक्षा परिषद की स्थाई सीट मिले इसी क्रम में अमरीका ने भारत के प्रधान मंत्री श्री नेहरू से अनौपचारिक तौर पर इच्छा जताई थी कि भारत सुरक्षा परिषद में शामिल हो नेहरु इसे सही नहीं मानते थे च्यांग काई शेक की सरकार का ताइवान जैसे छोटे से द्वीप का सुरक्षा परिषद में वीटो पावर के साथ स्थायी सदस्य रहना तार्किक नहीं होगा |विदेश नीति विशेषज्ञ मानते हैं भारत एशिया का विशाल प्रजातांत्रिक देश था उसे सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता मिलनी चाहिए थी| एक बार फिर से विवाद उठा श्री नेहरू को सुरक्षा परिषद की सदस्यता की मार्किटिंग करनी चाहिए थी |

विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद विश्व दो ब्लागों में बट गया एक तरफ एंग्लो अमेरिकन ब्लॉग दूसरी तरफ कम्यूनिस्ट ब्लाक नेहरू जी की विदेश नीति गुटनिरपेक्षता की थी विदेश नीति का आधार पंचशील का सिद्धांत था जिसे चीन ने भी स्वीकार किया उस समय के विश्व रंगमंच पर नेहरूजी का बहुत सम्मान था विश्व की हर समस्या के निदान में नेहरु जी की उपस्थिति दर्ज होती थी चीन तटस्थ राष्ट्रों के सम्मेलनों में उनके साथ दिखाई देता देश में हिंदी चीनी भाई-भाई के नारे लगे | ऐसा लगने लगा था एक समय ऐसा आएगा एशिया के दोनों राष्ट्र विश्व का नेतृत्व करेंगे नेहरू जी की गलतफहमी थी चीन विस्तार वादी नीति का पोषक रहा है|

1950  मे भारत और चीन के बीच में स्थित स्वतंत्र देश तिब्बत पर कम्युनिस्ट चीन ने अपना अधिकार जमा लिया भारत कुछ नहीं कर सका सीमा विवाद की आड़ में 1962 में चीन ने हमारी सीमा पर हमला कर दिया उस समय हमारी सेना कमजोर थी सेना के पास अत्याधुनिक हथियार नही थे अत :हमें पीछे हटना पड़ा| नेहरु जी को एंग्लो अमेरिकन ब्लाग से देश की रक्षा के लिए सहायता मांगनी पड़ीं | चीन ने ऐसा खंजर देश के सीने पर घोपा जिसे हम आज भी नहीं भूल पाए अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चीन आगे बढ़ गया ताकतवर को दुनिया प्रणाम करती हैं | हम उससे पीछे अवश्य रह गये परन्तु हमारा लोकतंत्र से कभी विश्वास नहीं हटा |

चीन देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत होती रही आज वह विश्व की आर्थिक शक्तियों में से एक है चीन ने विश्व शक्ति बनने की दिशा में कदम बढ़ा लिया हैं | चीन के नागरिकों की नजर में राष्ट्र प्रथम है यही भावना उनको मेहनत के लिए प्रोत्साहित करती है सत्तारूढ़ कम्यूनिस्ट पार्टी आफ चाइना द्वारा प्रस्तावित संविधान संशोधन को समर्थन देकर 64 वर्ष के शी जिनपिंग को आजीवन देश का राष्ट्र नायक चुना गया उनके निर्देशन में चीन विश्व शक्ति बन कर अमेरिका को पछाड़ना चाहता है| चीन के नीति विशेषज्ञ जानते हैं उनका देश एक आर्थिक शक्ति है अत : चीन का प्रभाव बढ़ना चाहिए| भूटान के क्षेत्र डोकलाम में चीन के बढ़ते कदम का भारत ने विरोध किया | चीन का विवाद जापान वियतनाम फिलिपीन और म्यन्मार से भी  हैं| श्री जिनपिंग उग्र राष्ट्रवादी हैं चीन साऊथ सी में मैन मेड द्वीप बना कर उस पर सैनिक अड्डे जमा कर पैर पसार रहा है|

चीन की विदेश नीति में पाकिस्तान का बहुत महत्व हैं  भारत की सीमा पर दो दुश्मन देश है | पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बन्दरगाह पर चीन ने भारी निवेश किया है यही नहीं चीन की महत्वकांक्षी योजना है इस बन्दरगाह को आर्थिक गलियारा ( सिपीईसी) बना अपने देश से जोड़ना इसे वन बेल्ट ,वन रोड और समुद्री सिल्क रोड योजना के बीच का लिंक माना जा रहा है लेकिन भारत ने चीन द्वारा समर्थित वन बेल्ट एंड वन रोड का बहिष्कार किया क्योकि यह सड़क पीओके के गिलगित बाल्टिस्तान से होकर गुजरती है यह विवादित स्थान पीओके जम्मू-कश्मीर क्षेत्र का हिस्सा है इस  योजना से  क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन होता है चीन और पाकिस्तान, दोनों ने भारत की आपत्तियों को ख़ारिज कर दिया है और दावे से कहा है कि यह परियोजना उनकी आबादी के विकास के लिए ज़रूरी है और वो इस परियोजना से पीछे नहीं हटेंगे. सीपीईसी परियोजना की लागत 60 बिलियन अमरीकी डॉलर है| इससे चीन की पहुंच अरब सागर तक हो जायेगी पाकिस्तान को उम्मीद हैं उसके देश में निवेश बढ़ेगा चीन पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी का भरपूर लाभ उठाना चाहता है |

भारत  चारों तरफ से जमीन से घिरे अफगानिस्‍तान तक सीधा पहुंचना चाहता है पाकिस्‍तान आनाकानी करता रहता है इसका तोड़ निकालने के लिए भारत ने ईरान के रास्‍ते अफगानिस्‍तान सामान भेजने का फैसला किया। इसके लिए भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट में अरबों रुपये का निवेश किया और ईरान से अफगानिस्‍तान तक सड़क मार्ग का भी निर्माण कराया। अब ईरानी पोर्ट अफगानिस्तान को आसानी से समुद्र तक पहुंच देता है।

चीन पाकिस्तान में अपने पैर पसारता जा रहा है यहाँ तक वह पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर के समर्थन पर भी उतर आया |चीन भारत के मुकाबले सेना पर दुगना खर्च करता है दोनों देशों के बीच सहयोग और मतभेद चलता रहता है चीन हमसे आयात कम निर्यात अधिक करता है| चीन का नजरिया विशुद्ध व्यवसायिक है |

 

 

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