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"बापू आप देख रहे हैं ? "

Posted On: 3 Oct, 2014 Others में

Vichar ManthanMere vicharon ka sangrah

Shobha

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एक एरिया में सीवर बनने लगा वहाँ के रहने वाले बहुत खुश थे |चलो सफाई रहेगी खुदाई शुरू हुई जमीन से मिट्टी के ढेर निकले ,अफ़सोस ठेकेदार के ट्रक आये देखते-देखते मिट्टी ट्रकों में भर कर बिकने चली गई | जमीन पर फुर्ती से सीवर लाइन बिछा दी गई उस पर बची खुची मिट्टी डाल कर ठेकेदार का काम खत्म हो गया | कुछ ही दिनों में पटरी भी बन गई और किनारे पर जरा सा सीमेंट डाल कर नाली भी बन गई जिससे बरसात का पानी निकल सके| पब्लिक को सीवर के ढक्कन पर छेदों से जिससे गैस निकलनी जरूरी है उससे बदबू आती थी अच्छे नागरिकों ने उस पर सीमेंट चढ़ा दी | अपने घर की नाली के लिए कौन सीवर डिपार्टमेंट जाए इसलिए खुद ही सीवर का ढक्कन तोड़ कर उसमें अपने घर की नालियां जोड़ देते है टूटे ढक्कन के रास्ते लोग थेली में डाल कर कूड़ा फेक देते हैं इस तरह सीवर बंद हो गया उससे आस पास के घरों की दीवारे और फर्श सीलने लगे घर में बू आने लगी इससे पहले सीवर का पानी घर में आये सीवर डिपार्टमेंट में शिकायत की गई डिपार्टमेंट काफी मुस्तैद था वह सीवर की सफाई भी कर गये अंदर से निकली गंदगी और कूड़े का ढेर बन गया सीवर का टूटा ढक्कन भी लगा गये परन्तु ढक्कन के छेद बंद करने पर उन्होंने ऐतराज किया फिर खुद ही छेद खोल गये जबकि छेद बंद करना अपराध है |क्या करे छेद बंद करने वाला गरीबी की दुहाई देने लगेगा आजकल दिल्ली में एक अमोघ शस्त्र चलता है हम गरीब आदमी हैं |
री सेटेलमेंट कलोनिया झुग्गी खाली करवाने के एवज में दिल्ली सरकार बसाती है | २६ गज के प्लाट में लैट्रिन के लिए गड्डा तैयार कर उसके उपर पॉट फिट कर प्लाट दिए जाते हैं जब बस्ती बसती है बाशिंदे सबसे पहले पॉट को निकाल कर फेक देते हैं और गड्ढे को पाट कर दो कमरे का घर बना लेते हैं शोचालय उनके हिसाब से जगह खराब करना है हाँ छत पर जरा सी आड़ कर शौचालय बना कर गंदगी सीधी घर के बाहर की नाली में डाल देते हैं यदि घर के सामने से नाला गुजर रहा है तो पटरी को तोड़ कर प्लास्टिक की पाईप के सहारे नाले में सीधी गंदगी डाल देते है| आज भी पानी की बोतल हाथ में लेकर शौच के लिए लोग बाहर जाते है जबकि घर में शौचालय है उन्हें खुले में जाने की आदत है आप को बुरा लगता है इसके लिए वह अपनी आदत क्यों बदलें अब जगह की बहुत कमी हो गई हैं फिर भी गंदगी फैलाते हैं |लोग बहुत समझ्दार हैं जमीन पर कब्जा करना नही छोड़ते घर के बाहर तीन फुट की दो दीवारे उठा कर उस पर लेंटर डाल कर एक प्लेटफार्म बना लेते हैं | जबकि सामने से सरकारी नाली गुजरती है उस प्लेट फार्म पर रसोई घर बन जाता हैं बाकी जगह धूप सकने या बैठने के काम आती हैं कईयों नें बिना नक्शे के पांच मंजिल तक घर बना कर नाली के ऊपर से के सीढ़िया चढ़ा ली हैं आठ फुट की सड़क को तो दोनों तरफ के निवासी चाहते हैं उस पर छत बना कर अपने कब्जे में ले लें| कहीं नाली ढकी कहीं खुली, उसमें भी कूड़ा प्लास्टिक की बोतले और चप्पलें पड़ी रहती हैं सफाई कहाँ से हो, पूरी भरी हुई नालियों में से गंदा पानी बहता है लोगों की चप्पले जूते भीगते रहते है |रहा सवाल सफाई कर्मचारी का उनकी बंधी तनखा है वह सरकारी कर्मचारी हैं काम क्यों करे ?यदि कोइ सफाई के लिए प्रार्थना करता वह कूड़े निकालने बाला डंडा हाथ में पकड़ा कर कहते है खुद कर लो और कमर पर हाथ रख कर खड़े हो जाते हैं| एक बार एक समझदार ने सफाई करते समय अपनी बीबी से कहा सेल पर वीडियो वना लो मैं इसके डिपार्टमेंट में भेज देता हूँ बस गरीबी की बड़ी- बड़ी दुहाई शुरू हो गई |
जनता ब्लाकों का हाल और भी खराब है मकान के मालिक नाली पर पत्थर या लेंटर डाल कर उसे ढक देते हैं उस पर से आगे बढ़ कर आधी सड़क पर कब्जा कर एक कमरा निकाल लेते हैं पहली मंजिल पर रहने वाले सरकारी सड़क पर पिलर लगा कर उस पर छत डाल कर आगे अपनी जगह बढ़ा लेते हैं सब पुलिस और नगरपालिका के कर्मचारियों को पुजापा चढ़ा कर होता है |सड़क इतनी छोटी कर देते हैं जिससे निकलना मुश्किल होता है| जब बारिश आती है नाली से पानी कैसे निकले बुरी तरह पानी भर जाता है घर के अंदर तक पानी आ जाता है| गालियाँ सरकार को दी जाती है पानी के निकास के बारे में जब जमीन घेरी कभी नही सोचा अब अपने क्षेत्र के विधायक को पकड़ा जाता है उसे भला बुरा भी कहा जाता है वह भी चुनाव के समय ही दर्शन देते हैं |जब चुनाव आता है हर शिकायत दूर करने का वादा करते हैं पर यह नही कहते जब कब्जा करते हो सोचते हो बरसात में पानी कहाँ से निकलेगा |
नाले ढकने के लिए मजबूत लेंटर डाले गये है पानी के निकास के लिए मजबूत रास्ते भी बनाये गये परन्तु पहले वहाँ ईटें रख कर रास्ता बंद कर देते है फिर कूड़ा डालना शुरू हो जाता हैं बरसात आती है सडकों में पानी से भर जाती हैं राहगीर कितने परेशान होते है यह वही जानते हैं| कुछ अच्छे नागरिक पानी से भरी सडकें देख कर और राहगीरों की परेशानी देख समझ कर निकास का मुहं खोलते हैं तब जाकर पानी निकलता है सड़क खाली होती है बरसात से पहले नगरपालिका भी नालों के मुहं खुलवाकर कूड़ा निकलवाती है परन्तु कितने दिन के लिए फिर वही जनता की और से लापरवाही शुरू हो जाते है |
किसी को अपने घर के आसपास कूड़ा दान नहीं चाहिए एक तो कूड़ा उठता ही नहीं चारो तरफ गंदगी फैली रहती है कूड़ा उठाने कोइ नहीं आता महीनों सड़ता रहता है| जानवर कूड़े में मुहं देकर चारो और फैला देते हैं चरों और मक्खियाँ भिनभिनाती रहती हैं |इससे बचने के लिए कूड़ेदान को ही लोग हटवा देते हैं अब कूड़े का क्या हो? किसी के भी घर के बाहर कूड़ेदान को उल्ट जाते हैं| कुछ लोग हर महीनें पैसा लेकर कूड़ा उठाने का काम करते हैं वहाँ सफाई नजर आती है |
हमारे यहाँ न्यूजीलैंड लैंड से मेहमान आये उनके आने जाने के लिए हमने एक टैक्सी वाला तय कर दिया वह जब घर लौटते बहुत गुस्से में होते थे उनको शिकायत थी उनका टैक्सी वाला दिल्ली में सुलभ शौचालय होते हुए भी सड़क पर गंदगी फैलाता है|
आजादी के बाद हमें हर बात की शिकायत सरकार से होती हैं सरकार हमारी ही बनाई हुई हैं देश भी हमारा है मोदी जी ने २ अक्तूबर के दिन को सफाई अभियान शुरू किया उन्होंने स्वयं भी इस काम में हिस्सा लिया उन्होने जापान के स्कूलों में देखा टीचर और विद्यार्थी मिल कर अपने स्कूल की सफाई करते हैं | हर व्यक्ति की इच्छा शक्ति से ही साफ़ सफाई रह सकती हैं | हमें सोचना है अपने परिवेश को साफ़ सुथरा बनाने के लिए हम क्या करें? और हम क्या करते हैं हम सब जानते हैं स्वच्छ परिवेश स्वास्थ्य के लिए लाभ कारी है |
डॉ शोभा भारद्वाज

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