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श्री ओबेसी को राष्ट्रीय नेता बनाने पर तुला मीडिया (टी.वी.चैनल )

Posted On: 19 Dec, 2016 Others में

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पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म दिन के शुभ अवसर श्री ओबेसी हैदराबाद से तीन बार चुने गये सांसद ने जन सभा को राजनीतिक रंग देते हुए प्रधान मंत्री पर नोट बंदी के सन्दर्भ में अभियोग लगाते हुए कहा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार मुसलमानों को परेशान कर रही है, मुस्लिम इलाकों में नये नोट पहुंच ही नहीं रहे हैं एटीएम खाली हैं आज मुसलमान एक-एक पैसे के लिए तरस रहे हैं उनके इलाकों में न बैंक खोले जाते न उन्हें लोन दिया जाता है |यदि इस मौके पर ‘हजरत पैगम्बर साहब की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते अवसर का सदुपयोग होता’ उन्होंने कहा ‘जैसे आज लोग पैसा लेने के लिए कतारों में लगे हैं ऐसे ही चुनाव में उनके खिलाफ वोट देने के लिए कतारों में मतदाता खड़े होंगें’ नोट बंदी का फैसला जल्दी में लिया गया है इससे अर्थ व्यवस्था डूब जायेगी | सभी विरोधी दल कह रहे हैं अपने एरिया में नेता अपने लोगों को अपने पक्ष में लेने के लिए कुछ भी कहते हैं बड़े सम्मानित दल जिनकी अपनी साख थी वह भी किसी तरह की ब्यान बाजी से परहेज नहीं कर रहे है लेकिन किसी ने नहीं कहा मुस्लिम इलाके मे बैंक नहीं खोले जाते एटीएम में नये नोट नहीं डाले जाते |नये नोटों के लिए सभी  परेशान हैं जबकि काला बाजारियों द्वारा कमिशन देकर नये नोट हासिल किये जा रहे हैं, बड़ी संख्या में वह पकड़े भी जा रहे हैं यदि वह कहते लगता उन्हें देश की चिंता है लेकिन जल्दी ही वह अपने मन्तव्य पर आये मुस्लिमों के हित चिंतक बनने लगे | |बीजेपी के प्रवक्ताओं ने ओबेसी जी के ब्यान पर पलट वार करते हुए कहा पहले नोट बंदी का राजनीतिकरण किया जा रहा था अब सांप्रदायीकरण हो रहा है| बात वहीं खत्म हो जाती लेकिन मीडिया ख़ास कर चैंनल काफी समय से बैंको और एटीएम के बाहर लगी कतारों को दिखाते – दिखाते, काला धन कैसे गुलाबी हो गया किस्से गाते थक गये थे उन्हें चटपटा मसाला मिल गया ओबेसी का कथन सुर्ख़ियों में आ गया  |

प्रिंट मीडिया किसी भी खबर या किसी नेता के कथन को छापते समय ध्यान रखते हैं उसका आशय क्या है| यदि खबर में तथ्य होता है’ उस पर लिखे लेखकों के विचारों को पहले पढ़ते हैं, ध्यान रखा जाता है लेखक बायस तो नहीं है ,अपनी बात लिख कर कोई हित तो नहीं साध रहा तब प्रकाशित करते हैं|यही वजह है अखबारों में बहुत कुछ पढने को मिलता है | इलेक्ट्रोनिक मीडिया, अर्थात अपनी टीआरपी बढ़ाने और अधिक से अधिक विज्ञापन लेने के चक्कर में ‘ऐसे ब्यान जो सनसनी फैला दे’ न्यूज की सुर्खियाँ बनाते हैं उस पर बहस करवाते हैं बात को जिधर ले जाना चाहते हैं उसी दिशा में मोड़ने की कला में भी माहिर हैं |ऐसे ही चैनलों की उपज है ओबेसी जैसे नेता कुछ ऐसा कहो जिसे चैनल ले उड़ें| श्री ओबेसी जानते थे उनकी बात में सनसनी है ,मुस्लिम समाज को भड़काया जा सकता है ‘मुस्लिम जनता भड़केगी या नहीं यह बाद की बात हैं’ लेकिन कोशिश करने में हर्ज ही क्या है ? कुछ चेनलों ने विषय को उठाया बहस शुरू |ओबेसी जी के पास भी आजकल मुद्दा नहीं था यूपी का चुनाव पास आ रहा है वह अपनी भड़काऊ नीति से मुस्लिम समाज में छाना चाहते है मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष की में करने की जुगाड़ में लग गये | बिहार चुनाव के समय में भी वह अचानक सक्रिय हो गये थे | मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार खड़े किये परन्तु सफल नहीं हुए ,मतदाता समझदार है |

ओबेसी जी चैनलों में चर्चा के लिए हैदराबाद से बुलाये गये उनके विरोध में सत्तारुद्ध दल के नेता को बुला कर बहस करवायी आश्चर्य की बात है मुस्लिम समुदाय को भी इकठ्ठा कर अधिकतर एक ही स्थान पर बिठाया महिलाओं के हिजाब से समझ आ रहा था एक ही कम्युनिटी के लोग है| बहस शुरू हुई श्री ओबेसी भड़काने आते हैं साथ में तथ्य भी लाये बात कुछ और करते हैं प्रमाण कुछ और ऐसा माहोल बन जाता है लोग उत्तेजना में आ जाते हैं भावुक क्षणों में समझ नहीं आता चैनल अपनी टीआरपी के लिए सब कर रहे हैं उत्तेजना से उनका कार्यक्रम चटपटा बनता है वह इतना ही चाहते हैं इससे अधिक होने पर आने वाले मेहमानों पर बुरी तरह झल्लाना हम आगे से नहीं बुलायेंगे जैसे दर्शक अपना हित साधने आये हैं या चाबी से चलने वाले गुड्डे हैं| मुस्लिम समाज भी इन जुगनू की तरह कभी कभार चमकने वाले नेताओं को समझ चुका है वह साफ़ कहते हैं हमारा भला इन नेताओं ने कभी नहीं किया हमें सीढ़ी बना कर सरकार को डरा लेते हैं | उन्हें पता है राष्ट्रीय दल उनके हित चिंतक हैं देश संविधान से चलता हैं संविधान की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय हैं | क्या ओबेसी जी ने पहले अपने ही क्षेत्र के अशिक्षित मुस्लिम समाज को जन धन योजना में अकाउंट खोलने के लिए समझाया ,अकाउंट खुलवाने के लिए बैकों तक ले कर गये |सही है मुस्लिम समाज का प्रतिशत जन धन योजना अकाउंट खुलवाने में कम है | कारण अशिक्षा और नासमझी भी हो सकता है |

ओबेसी दो भाई हैं स्वर्गीय सांसद सलाहुद्दीन के बेटे |छोटे भाई अकबरुद्दीन बहुसंख्यक समाज और हिन्दू देवी देवताओं का मजाक उड़ाने में माहिर हैं|  बड़े भाई असदुद्दीन ओबेसी इंग्लैंड से ‘ला’ डिग्री के धारक हैं लम्बा कद आकर्षक व्यक्तित्व, अवध के नबाबों की तरह पहनावा मंझे हुये राजनेता की तरह बात करते हैं अपनी बात में फंस जाने पर प्रश्न पर प्रश्न करते हैं केवल अपनी बात कहते हैं सामने वाले के तर्कों के सामने जल्दी ही पटरी से उतर कर धमकाने वाली भाषा का प्रयोग करते हैं अपने समर्थकों के सामने उनकी जुबान जहर उगलती है |कानून की पढाई की है अत: जम्हूरियत ,न्यायव्यवस्था, संविधान और मौलिक अधिकारों की आड़ लेते हैं हैदराबाद में मजलिसे –ए इत्तेहादुल मुसलमीन का प्रभाव रहा है यह 80 वर्ष पुरानी संस्था है 1957 में संगठन पर ओबेसी परिवार का कब्जा है उन्होंने संगठन के नाम के साथ आल इंडिया जोड़ दिया था | श्री जावेद अख्तर साहब ने राज्यसभा में अपने विदाई भाषण में ओबेसी का नाम लिए बगैर उनके वक्तव्य का जम कर विरोध किया था ‘वह (ओबेसी )किसी भी कीमत पर भारत माता की जय नहीं बोलेंगे’ | जावेद साहब ने सदन में कहा ‘आंध्रप्रदेश में एक शख्स है जिन्हें गुमान हो गया है कि वह राष्ट्रीय नेता हैं जिनकी हैसियत एक शहर या एक मुहल्ले के नेता से अधिक नहीं है उन्होंने कहा भारत माता की जय बोलना मेरा कर्तव्य नहीं अधिकार है|’ तीन बार भारत माता की जय कहा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा इन्हीं ओबेसी साहब को चैनल वाले बहस चटपटी करने के चक्कर में राष्ट्रीय नेता बनाने पर तुले हैं जबकि भारत को वह मेरा देश न मान कर इस देश से सम्बोधित करते हैं | अमेरिकन चैनलों की हर सम्भव कोशिश थी हिलेरी क्लिंटन अमेरिका की राष्ट्रपति बने वह हार गयी, ट्रम्प जीत गये |

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