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'सम्मेलन हार्ट आफ एशिया' कहावत है चोर को मत मारो चोर की माँ को मारो

Posted On: 5 Dec, 2016 Others में

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गुरु नगरी अमृतसर में हार्ट आफ एशिया सम्मेलन में 40 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया| यह 14 देशों का संगठन है इसकी शुरुआत टर्की के इस्ताम्बुल में 2011 में की गयी थी इसमें अफगानिस्तान ,अजरबेजान भारत ,चीन ,ईरान  किर्गिस्तान कजाकिस्तान ,पाकिस्तान ,रूस ,तजाकिस्तान  सउदी अरब ,संयुक्त अरब अमीरात तुर्की और तुर्कमिस्तान शामिल हैं |इसके कई  देश सोवियत संघ के टूटने पर अलग हुए थे | 17 सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया |संगठन के गठन का उद्देश्य अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी देशों के बीच रक्षा,आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है | अफगानिस्तान आतंकवादी  कट्टरता ,उग्रवाद के खतरे से कैसे निपटे ? पकिस्तान की जमीन से आतंकवादी संगठनों ने हमले तेज कर दिए देश आतंकवाद के साये में जी रहा है अत: अफगानिस्तान की कोशिश है पाकिस्तान अपनी जमीन को आतंकवादियों के आकाओं को उसके  विरुद्ध इस्तेमाल न करने दे| दोनों देश मुस्लिम देश हैं फिर इतना वैमनस्य क्यों?

अफगानिस्तान को सोवियत संघ अपने प्रभाव में लेना चाहता था अत :1979 के अंतिम सप्ताह रशियन सेनाओं ने अफगानिस्तान में प्रवेश किया | अमेरिका किसी भी कीमत पर इस क्षेत्र में रशियन प्रभाव  नहीं चाहता था | अमेरिका के लिए अफगानिस्तान में डटे रह कर अड्डे बनाना उसकी विदेश नीति का हिस्सा था| उसने रशिया से सीधे झगड़ा मोल लेने के बजाय पाकिस्तान का सहारा लिया |पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में गुरिल्ला युद्ध छेड़ने के लिए तालिबान जैसा आतंकी संगठन गठित किया | अफगानिस्तान में कबीला सिस्टम है उसने गरीब ,पिछड़े बेरोजगार लोगों को भर्ती कर सैन्य अधिकारियों से प्रशिक्षित करवाया | अमेरिकन प्रशासन ने पाकिस्तान को जम कर आर्थिक सहायता और आधुनिक हथियारों से युक्त किया | अफगानी संकट को इस्लाम पर आये संकट का नाम दे कर ऐसा माहौल बनाया जैसे रशिया मुस्लिम देश को अपने कब्जे में लेना चाहता है |युद्ध को धर्म युद्ध ‘जेहाद’ का नाम दिया, दीनी सियासत का कोई तोड़ नहीं है | उस समय अफगानिस्तान में अफीम की खेती होने लगी ड्रग की सप्लाई मुख्य व्यवसाय बन गया| विश्व के देशों में पाकिस्तान के रास्ते सप्लाई की जाती थी पकिस्तान में भी नार्थ वेस्ट फ्रंटियर के लोग अफीम की खेती करते हैं अत: ड्रग कल्चर बढ़ने लगा| अफगानिस्तान में मुजाहिदीनों के तालिबानी और अलकायदा जैसे संगठन बन गये |रशियन सेनायें अफगानिस्तान से पलायन करने के लिए मजबूर हो गयी सोवियत यूनियन भी टूट गया लेकिन पाकिस्तान पर भी आंच आई यह जेहादी पकिस्तान के लिए सिरदर्द बन गये |वह चाहता था उनका रुख कश्मीर में जेहाद के नाम पर मोड़ दिया जाये |भारत के लिए आतंक वाद सिर दर्द बन जाए यही हुआ | अफगानिस्तान में अमेरिकन प्रयत्नों से प्रजातांत्रिक व्यवस्था की स्थापना के लिए चुनाव हुए लेकिन शांति की स्थापना न हो सकी पाकिस्तान ने होने भी नहीं दी |

पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज एक दिन पहले अमृतसर पहुंच गये थे लेकिन पंजाब पुलिस ने उन्हें स्वर्ण मन्दिर में जाने और प्रेस कांफ्रेंस करने की सुरक्षा कारणों से इजाजत नहीं दी वह अधिकतर होटल में ही रहे |उनसे भारत और पकिस्तान में द्विपक्षीय वार्ता पर भी कोई बात नहीं हुई |मोदी जी ने सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान से सम्बन्ध बढाने की भरपूर कोशिश लेकिन पाकिस्तान की भारत के प्रति नीति नहीं बदली वह बेशक बर्बाद हो जाए लेकिन भारत की तरक्की को बाधित करता रहेगा | भारत से युद्ध में हार जाने पर भी वहाँ के नीति विशेषज्ञ और सैन्य अधिकारी खुश होते हैं वह हारे लेकिन उन्होंने भारत की तरक्की को काफी वर्ष पीछे धकेल दिया| आतंकवाद के आकाओं के प्रोत्साहन पर आतंकवादियों को सेना के कवर में कश्मीर के अंदर प्रवेश कराया जाता है सीमा पर निरंतर तोपें गरजती रहती हैं | पाकिस्तान में अनेक आतंकवादी संगठन पनप रहे हैं किसी एक संगठन पर बैन लगता है वही संगठन दूसरे नाम से सक्रिय हो जाता है| भारत ने सदैव बड़े भाई की भूमिका निभायी है भलमनसाहत का फायदा उठाना हमारा पड़ोसी अच्छी तरह से जानता है | शान्ति पकिस्तान में भी नहीं है आतंकवादी संगठन पाकिस्तानी सरकार को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं जनता की चुनी हुई सरकार जरूर है लेकिन सेना और आतंकवादी आकाओं के प्रभाव में काम करती है राहेल शरीफ गये जनरल जावेद बाजवा आये भारत के प्रति नीति में कोइ फर्क नहीं है | नरेंद्र मोदी जी ने सरताज अजीज से दूरी बनाये रखी |

यही हाल अफगानिस्तान का है| पाकिस्तान ने आर्थिक मदद की पेशकश की लेकिन अफगानिस्तान ने मना कर दिया |वहाँ के राष्ट्रपति अशरफ गनी चाहते हैं उनके क्षेत्र में शांति की स्थापना के साथ आर्थिक विकास हो | अफगानिस्तान में ‘अफीम की खेती के स्थान पर केसर की खेती’ को प्रोत्साहन दिया जा रहा है |मोदी जी से उनकी द्विपक्षीय वार्ता में युद्ध से जर्जर देश के निर्माण, निवेश बढाने  तथा सुरक्षा विषयों पर बातचीत हुई| लग रहा था हार्ट आफ एशिया सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा छाया रहेगा  वही हुआ | अबकी बार सरताज अजीज ने कश्मीर का मुद्दा न उठा कर आतंकवाद पर सब मिल कर अटैक करने पर बल दिया | विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बीमार है उनके स्थान पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा ‘आतंकवाद न अच्छा होता है न बुरा सभी तरह के आतंकवादी संगठन और चरमपंथी क्षेत्र की शान्ति के लिए घातक होते हैं, आतंकवाद , आतंकवाद ही होता है’ |अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी मोदीजी से पहले बोले, उनका भाषण आतंकवाद के मुद्दे और अपने देश की तरक्की पर केन्द्रित था मोदी जी ने नाम न लेकर पाकिस्तान पर प्रहार किये (गावँ की भाषा में चोर को न मारो चोर की माँ को मारों)  मोदी जी ने कहा अफगानिस्तान में अस्थिरता भीतरी मुद्दा नहीं है अस्थिरता बाहर से थोपी जा रही है शांति के लिए केवल आवाज उठाना काफी नहीं है आतंक के पोषक आकाओं को भी रोकना होगा| अफगानिस्तान को आर्थिक ,सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत कर आतंक का खात्मा मिलजुल कर इच्छा शक्ति से किया जा सकता है अफगानिस्तान ऐसा देश है जिसके सहारे दक्षिणी एशिया को सेंट्रल एशिया से जोड़ा जा सकता है |ईरान का चाबहार बन्दरगाह इसी के मार्ग में एक कदम है | अफगानिस्तान आर्थिक रूप से मजबूत हो वहाँ के युवक उच्च शिक्षा प्राप्त करें | सम्मेलन में आतंक विरोधी प्रस्ताव पास हुआ |सभी तरह के आतंकवाद को खत्म किया जाये आतंकी संगठनों द्वारा अफगानिस्तान में हिंसा पर चिता व्यक्त की गयी अफगानिस्तान के पुननिर्माण पर बल दिया |

गुरु नगरी अमृतसर में हार्ट आफ एशिया सम्मेलन में 40 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया| यह 14 देशों का संगठन है इसकी शुरुआत टर्की के इस्ताम्बुल में 2011 में की गयी थी इसमें अफगानिस्तान ,अजरबेजान भारत ,चीन ,ईरान  किर्गिस्तान कजाकिस्तान ,पाकिस्तान ,रूस ,तजाकिस्तान  सउदी अरब ,संयुक्त अरब अमीरात तुर्की और तुर्कमिस्तान शामिल हैं |इसके कई  देश सोवियत संघ के टूटने पर अलग हुए थे | 17 सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया |संगठन के गठन का उद्देश्य अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी देशों के बीच रक्षा,आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है | अफगानिस्तान आतंकवादी  कट्टरता ,उग्रवाद के खतरे से कैसे निपटे ? पकिस्तान की जमीन से आतंकवादी संगठनों ने हमले तेज कर दिए देश आतंकवाद के साये में जी रहा है अत: अफगानिस्तान की कोशिश है पाकिस्तान अपनी जमीन को आतंकवादियों के आकाओं को उसके  विरुद्ध इस्तेमाल न करने दे| दोनों देश मुस्लिम देश हैं फिर इतना वैमनस्य क्यों?

अफगानिस्तान को सोवियत संघ अपने प्रभाव में लेना चाहता था अत :1979 के अंतिम सप्ताह रशियन सेनाओं ने अफगानिस्तान में प्रवेश किया | अमेरिका किसी भी कीमत पर इस क्षेत्र में रशियन प्रभाव  नहीं चाहता था | अमेरिका के लिए अफगानिस्तान में डटे रह कर अड्डे बनाना उसकी विदेश नीति का हिस्सा था| उसने रशिया से सीधे झगड़ा मोल लेने के बजाय पाकिस्तान का सहारा लिया |पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में गुरिल्ला युद्ध छेड़ने के लिए तालिबान जैसा आतंकी संगठन गठित किया | अफगानिस्तान में कबीला सिस्टम है उसने गरीब ,पिछड़े बेरोजगार लोगों को भर्ती कर सैन्य अधिकारियों से प्रशिक्षित करवाया | अमेरिकन प्रशासन ने पाकिस्तान को जम कर आर्थिक सहायता और आधुनिक हथियारों से युक्त किया | अफगानी संकट को इस्लाम पर आये संकट का नाम दे कर ऐसा माहौल बनाया जैसे रशिया मुस्लिम देश को अपने कब्जे में लेना चाहता है |युद्ध को धर्म युद्ध ‘जेहाद’ का नाम दिया, दीनी सियासत का कोई तोड़ नहीं है | उस समय अफगानिस्तान में अफीम की खेती होने लगी ड्रग की सप्लाई मुख्य व्यवसाय बन गया| विश्व के देशों में पाकिस्तान के रास्ते सप्लाई की जाती थी पकिस्तान में भी नार्थ वेस्ट फ्रंटियर के लोग अफीम की खेती करते हैं अत: ड्रग कल्चर बढ़ने लगा| अफगानिस्तान में मुजाहिदीनों के तालिबानी और अलकायदा जैसे संगठन बन गये |रशियन सेनायें अफगानिस्तान से पलायन करने के लिए मजबूर हो गयी सोवियत यूनियन भी टूट गया लेकिन पाकिस्तान पर भी आंच आई यह जेहादी पकिस्तान के लिए सिरदर्द बन गये |वह चाहता था उनका रुख कश्मीर में जेहाद के नाम पर मोड़ दिया जाये |भारत के लिए आतंक वाद सिर दर्द बन जाए यही हुआ | अफगानिस्तान में अमेरिकन प्रयत्नों से प्रजातांत्रिक व्यवस्था की स्थापना के लिए चुनाव हुए लेकिन शांति की स्थापना न हो सकी पाकिस्तान ने होने भी नहीं दी |

पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज एक दिन पहले अमृतसर पहुंच गये थे लेकिन पंजाब पुलिस ने उन्हें स्वर्ण मन्दिर में जाने और प्रेस कांफ्रेंस करने की सुरक्षा कारणों से इजाजत नहीं दी वह अधिकतर होटल में ही रहे |उनसे भारत और पकिस्तान में द्विपक्षीय वार्ता पर भी कोई बात नहीं हुई |मोदी जी ने सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान से सम्बन्ध बढाने की भरपूर कोशिश लेकिन पाकिस्तान की भारत के प्रति नीति नहीं बदली वह बेशक बर्बाद हो जाए लेकिन भारत की तरक्की को बाधित करता रहेगा | भारत से युद्ध में हार जाने पर भी वहाँ के नीति विशेषज्ञ और सैन्य अधिकारी खुश होते हैं वह हारे लेकिन उन्होंने भारत की तरक्की को काफी वर्ष पीछे धकेल दिया| आतंकवाद के आकाओं के प्रोत्साहन पर आतंकवादियों को सेना के कवर में कश्मीर के अंदर प्रवेश कराया जाता है सीमा पर निरंतर तोपें गरजती रहती हैं | पाकिस्तान में अनेक आतंकवादी संगठन पनप रहे हैं किसी एक संगठन पर बैन लगता है वही संगठन दूसरे नाम से सक्रिय हो जाता है| भारत ने सदैव बड़े भाई की भूमिका निभायी है भलमनसाहत का फायदा उठाना हमारा पड़ोसी अच्छी तरह से जानता है | शान्ति पकिस्तान में भी नहीं है आतंकवादी संगठन पाकिस्तानी सरकार को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं जनता की चुनी हुई सरकार जरूर है लेकिन सेना और आतंकवादी आकाओं के प्रभाव में काम करती है राहेल शरीफ गये जनरल जावेद बाजवा आये भारत के प्रति नीति में कोइ फर्क नहीं है | नरेंद्र मोदी जी ने सरताज अजीज से दूरी बनाये रखी |

यही हाल अफगानिस्तान का है| पाकिस्तान ने आर्थिक मदद की पेशकश की लेकिन अफगानिस्तान ने मना कर दिया |वहाँ के राष्ट्रपति अशरफ गनी चाहते हैं उनके क्षेत्र में शांति की स्थापना के साथ आर्थिक विकास हो | अफगानिस्तान में ‘अफीम की खेती के स्थान पर केसर की खेती’ को प्रोत्साहन दिया जा रहा है |मोदी जी से उनकी द्विपक्षीय वार्ता में युद्ध से जर्जर देश के निर्माण, निवेश बढाने  तथा सुरक्षा विषयों पर बातचीत हुई| लग रहा था हार्ट आफ एशिया सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा छाया रहेगा  वही हुआ | अबकी बार सरताज अजीज ने कश्मीर का मुद्दा न उठा कर आतंकवाद पर सब मिल कर अटैक करने पर बल दिया | विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बीमार है उनके स्थान पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा ‘आतंकवाद न अच्छा होता है न बुरा सभी तरह के आतंकवादी संगठन और चरमपंथी क्षेत्र की शान्ति के लिए घातक होते हैं, आतंकवाद , आतंकवाद ही होता है’ |अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी मोदीजी से पहले बोले, उनका भाषण आतंकवाद के मुद्दे और अपने देश की तरक्की पर केन्द्रित था मोदी जी ने नाम न लेकर पाकिस्तान पर प्रहार किये (गावँ की भाषा में चोर को न मारो चोर की माँ को मारों)  मोदी जी ने कहा अफगानिस्तान में अस्थिरता भीतरी मुद्दा नहीं है अस्थिरता बाहर से थोपी जा रही है शांति के लिए केवल आवाज उठाना काफी नहीं है आतंक के पोषक आकाओं को भी रोकना होगा| अफगानिस्तान को आर्थिक ,सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत कर आतंक का खात्मा मिलजुल कर इच्छा शक्ति से किया जा सकता है अफगानिस्तान ऐसा देश है जिसके सहारे दक्षिणी एशिया को सेंट्रल एशिया से जोड़ा जा सकता है |ईरान का चाबहार बन्दरगाह इसी के मार्ग में एक कदम है | अफगानिस्तान आर्थिक रूप से मजबूत हो वहाँ के युवक उच्च शिक्षा प्राप्त करें | सम्मेलन में आतंक विरोधी प्रस्ताव पास हुआ |सभी तरह के आतंकवाद को खत्म किया जाये आतंकी संगठनों द्वारा अफगानिस्तान में हिंसा पर चिता व्यक्त की गयी अफगानिस्तान के पुननिर्माण पर बल दिया |

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