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70वें स्वतन्त्रता दिवस की ‘नई सुबह’ पाकिस्तान के खिलाफ विदेश नीति में बदलाव के संकेत (बलूचिस्तान ) 'जागरण जंगशन फोरम'

Posted On: 19 Aug, 2016 Others में

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3 जून 1947 भारत के विभाजन प्लान के अनुसार हिंदुस्तान और पाकिस्तान दो राष्ट्रों का निर्माण होगा और आजादी के दिन से ब्रिटिश साम्राज्य में विलीन रियासते भी आजाद हो जायेंगी वह चाहें तो आजाद रह सकतीं हैं या हिन्दुस्तान, पाकिस्तान में विलय कर सकती हैं| 14 अगस्त 1947 मध्य रात्रि गुलामी की बेड़ियों टूट गई ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा उपहार स्वरूप भारत की शक्ति को कमजोर करने के लिये दो नये राष्ट्रों का विश्व पटल पर उदय हुआ |पन्द्रह अगस्त की सुबह सूयोदय के साथ नव प्रभात लाई आजादी का नवप्रभात | बलूचिस्तान भी ब्रिटिश साम्राज्य में शामिल था जिसे 1944 में आजाद करने का विचार ब्रिटिशर के मन में आया था | 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान का कलात ब्रिटिश साम्राज्य से आजाद होने की घोषणा कर एक आजाद मुल्क  बन गया लेकिन अप्रेल 1948 में मुहम्मद अली जिन्ना के निर्देश पर पाकिस्तान सेना ने क्वेटा पर कब्जा कर मीर अहमद यार खान को जबरदस्ती अपना राज्य छोड़ने के लिए मजबूर कर उनसे कलात प्रदेश की आजादी के विरुद्ध एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करवा लिए |बलूचिस्तान पकिस्तान के कब्जे में आ गया | बलूच कौन हैं ?विषय में मतभेद होते हुए भी सभी मानते हैं यह  मुख्यतया सीरिया से आये थे इनके 44 कबीले ईरान के रास्ते आये अन्य समुद्र के रास्ते से |इनके रिवाज अरबों से बहुत मिलते हैं |कुछ इन्हें गुर्जर भी कहते हैं यह एक खानाबदोश कौम थी भेड़ बकरियां पालते थे अब वक्त के साथ जैसे दूसरी कौमें बदली यह भी बदल गये | बलूचिस्तान पकिस्तान का पश्चिमी प्रान्त है इसके एक और अरब सागर है यह भूभाग ईरान के सीस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान से सटा है यहां की राजधानी क्वेटा  है | ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान का बलूच हिस्सा मिल कर स्वायत्त शासी बलूचिस्तान की स्थापना करना चाहता है|  पकिस्तानी बलूच भी उसके आधीन नहीं रहना चाहते उनकी लीडर शिप मानती है बलूचों पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया है |

बलूचिस्तान पकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है जिसका क्षेत्र फल सबसे बड़ा लेकिन आबादी कम है | इनकी जनसंख्या कुल एक करोड़ तीस लाख है इनकी बोली जाने वाली भाषा बलूची है |यह ईरान की प्राचीनतम भाषा अवस्ताई जो वैदिक संस्कृत के बहुत करीब है और प्राचीन फारसी से जन्मीं फ़ारसी ,बलूची दरी पश्तो और खुर्दी भाषाओं में से एक हैं, पाकिस्तान में बलूची समेत नौं सरकारी भाषायें हैं |कहते हैं विश्व में 80 लाख से अधिक लोग बलूची मातृभाषा के रूप में में बोलते हैं | प्रदेश खनिज सम्पत्ति से भरपूर है लेकिन गरीबी से इसका बुरा हाल है बलूचों को दुःख है पाकिस्तान ने उन्हें कभी अपना नहीं समझा केवल प्रदेश का दोहन किया है यहाँ 85% जनसंख्या को पीने का साफ़ पानी नहीं मिलता ,बिजली की हालत खराब है 70% बच्चों के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं है 63% गरीबी की रेखा से नीचें है जिनके पैरों में पहनने को चप्पल भी नहीं है| पकिस्तान का तर्क है बलूच लीडर अन्य सरदारों की तरह धनवान है विदशों में रहते हैं उनके बच्चे वहीं पढ़ते हैं | पाकिस्तानी अक्सर रोष जाहिर करते थे जब भी कोई  अमरीकी नीति कार पकिस्तान में आता है सबसे पहले बलूचों के लीडर से मिलता है बलूचों के राष्ट्रीय नेता अकबर खान बुगती की जिनका बहुत मान सम्मान था राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ के आदेश से पाकिस्तानी सेना द्वारा हत्या कर दी गयी।जिसका दर्द आज भी बलूचों के दिल में है |सत्तर के दशक में पाकिस्तान के खिलाफ आन्दोलन हुआ जिसे सेना द्वारा कुचल दिया गया |

22 फरवरी 1994 नरसिंहाराव के समय आतंकवादी घटनाओं और कश्मीर विवाद को उठाने के विरोध में संसद के दोनों सदनों ने एक मत से प्रस्ताव पास कर घोषणा की थी जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है पकिस्तान को अपने कब्जे वाले कश्मीर को खाली कर देना चाहिए लेकिन 2009 में तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और उस समय के प्रधान मंत्री युसफ रजा गिलानी के बीच  उच्च स्तरीय बैठक में पहली बार बलोचिस्तान का जिक्र किया गया  जिसमें हमारे प्रधान मंत्री नें साँझा ब्यान में कहा दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ उग्रवादी कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनेंगे जबकि भारत की विदेश नीति कभी किसी देश में हस्ताक्षेप की नहीं रही है प्रधान मंत्री दबाब में मान आये भारत बलूचिस्तान में उग्रवाद भड़काता हैं | भाजपा ने जम कर विरोध किया था नवाज शरीफ ने अक्तूबर 2015 में यू. एन  जरनल असेम्बली में कश्मीर का मुद्दा उठा कर विश्व के राष्ट्रों का ध्यान खींचने की कोशिश की जिसका जबाब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दे कर नवाज की बोलती बंद दी | पीओके विदेशी शक्तियों के कब्जे में है तो यह शक्ति पाकिस्तान है |बलूचिस्तान में होने वाले जुल्मों की कहानी का विश्व को ज्ञान नहीं था| अब दुनिया के विकसित देश ब्रिटेन ,योरोप ,अमेरिका और अन्य देश जानते हैं बलूचों के साथ क्या हो रहा है? बलूचों को घर से उठा कर ले जाना उनपर असहनीय झुल्म ढाना रोज का काम है कई बलूच घरों से उठा कर गायब कर दिए गये कईयों के शव मिले प्रदेश का केवल दोहन किया गया शियाओं पर हमले करना आम बात है क्या वह इन्सान नहीं हैं ,मुसलमान नहीं है ?  कहने को पकिस्तान उन्हें अपना नागरिक कहता है परन्तु हेलीकाफ्टर से उन पर बम बरसाए जाते हैं निरीह बलूच कितने आतंकित होते होंगे आप सोच भी नहीं सकते बलूचिस्तान के चगाई में 28 मई 1998 को बिना विशेष सुरक्षा के  जल्द बाजी में परमाणु विस्फोट किया जिसके बाद विकलांग बच्चे पैदा हो रहे हें कई शिशू  चर्म रोग के शिकार हैं हाल बेहाल हैं | मानवाधिकार वादियों ने सदैव बलूचों पर होने वाले जुल्मों की निंदा की है |आतंकवादियों द्वारा हाल ही में क्वेटा के अस्पताल के पास किये बम बिस्पोटों में कई वकील और आम नागरिक मारे गये और जख्मी जख्मी हुये |

कश्मीर में हिजबुल मुजाहदीन के बुरहान बानी की मृत्यु का लाभ उठा कर पाकिस्तान ने धन और आतंकवादियों की बड़ी खेप भेज कर कश्मीर के हालात बिगाड़ दिए अलगाववादी बच्चों को आगे कर जलूस निकालते हैं पीछे उनके आतंकवादी चलते हैं और बच्चे सुरक्षा सैनिकों पर पथराव करते हैं मजबूरन उनका विरोध करना पड़ता है कश्मीर की स्थिति पहले कभी इतनी खराब नहीं हुई थे लेकिन जब से इस्लामिक स्टेट की विचार धारा बढ़ी है पकिस्तान ने भी अपनी पूरी शक्ति छद्म युद्ध में झोंक दी है| प्रधानमन्त्री ने सर्वदलीय बैठक में सबकी सम्मति से पाक अधिकृत कश्मीर और बलूचिस्तान के हालत को विश्व समुदाय के सामने उठाने की सहमती दी | 70वें स्वतन्त्रता दिवस  के अवसर पर लाल किले से नरेंद्र मोदी जी ने पाकिस्तान के प्रति देश की विदेश नीति के बदलाव के संकेत दिए अब देश का रुख आक्रामक होगा उन्होंने कहा ‘मैं बलूचिस्तान गिलगित, बाल्टिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर के निवासियों पर ढाये जा रहे हैं उनकी बात करता हूँ ,उनका दर्द महसूस करता हूँ , उन्होंने आभार प्रगट किया यह गर्व की बात हैं बलूच भारत की तरफ उम्मीद से देख रहे हैं हम उनके मुद्दे विश्व के सामने उठायेंगे |प्रधान मंत्री ने लाल किले से बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा होने वाले जुल्मों की तरफ विश्व का ध्यान खींचा लेकिन आश्चर्य की बात हैं मनमोहन सरकार के समय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने मोदी जी के बलूचिस्तान पर दिए भाषण की आलोचना की उनके अनुसार बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा है वह पहले ही भारत पर आक्षेप लगाता है बलूचों की समस्या वहां की उग्रवादी घटनाओं में हमारा हाथ है पीओके पर चर्चा कर सकते हैं यही रुख भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने दर्शाया| लेकिन कांग्रेस ने खुर्शीद के ब्यान को उनका निजी ब्यान कह कर किनारा कर लिया| भारत मे लम्बे समय तक कांग्रेस की सरकार रही है कांग्रेस जानती है आज तक पाकिस्तान से होने वाली राजनैतिक वार्तायें कश्मीर के प्रश्न पर टूटती रही है |भारतीय सौहार्द की भावना को हमारी कमजोरी समझा है| मोदी जी पकिस्तान के प्रति विदेश नीति में इंदिरा जी जैसा सख्त कूटनीतिक रुख अपनाते दिखे | कूटनीति की माहिर महिला प्रधान मंत्री ने , पूर्वी पकिस्तान से निरंतर आने वाले रिफ्यूजियों और सेना के जुल्मों के विरुद्ध पहले विश्व में जनमत बनाया फिर पकिस्तान से मुक्ति के इच्छुक जन समूह और नेतृत्व की मदद कर बंगला देश बनाया| पकिस्तान इस दर्द को भूल नहीं सका आज पकिस्तान आर्थिक दृष्टि से जर्जर हो रहा है अमेरिकन मदद पर ज़िंदा है ,भारत शक्ति शाली है |वहाँ के कूटनीतिज्ञ जानते हैं भारत क्या कर सकता है ?

भारत के कूटनीतिक कदम से पाकिस्तान की सरकार ,सेना और आतंकवादी सरगना में खलबली मच गयी |  आजतक कश्मीर में मुस्लिम बहुल का मुद्दा उठा कर कश्मीर पर हक जमा रहा था है  भूल गये बंगलादेश मुस्लिम बाहुल्य था उस पर इतने जुल्म क्यों ढाये गये यही हाल बलूचों का किया गया |अब तो जब से ग्वादर बन्दरगाह चीन के हवाले किया है चीनी सैनिक भी वहाँ नजर आते हैं झगड़े की एक वजह ग्वादर का बन्दरगाह है |चीन  दक्षिणी पकिस्तान में आर्थिक कारीडोर बनाना चाहता है अत: 2002 से निर्माण कार्य शुरू हुआ है ग्वादर पर पकिस्तान का नियन्त्रण है निर्माण कार्य में चीनी इंजीनियर और कारीगर लगाये गये हैं कहते हैं आसपास की जमीनें बलूचों से सरकारी अधिकारियों ने  सस्ते भाव में खरीद कर महंगे दामों पर बेचा जिससे बलूचों में असंतोष फैलने लगा जिसे सैनिक कार्यवाही से दबाया गया लेकिन 2004 बलूच अलगाव वादियों ने तीन चीनी इंजीनियर मार दिए  बलूचिस्तान में संघर्ष  मे बढ़ता जा रहा है| दिल्ली स्थित पाक एम्बेसी के राजदूत अब्दुल वासिद ने अपने मुल्क की आजादी को कश्मीर की आजादी से जोड़कर भारत को चुनौती दी| किसी भी देश का राजदूत जो बोलता है वह उस देश की नीति होती है |सरताज अजीज ने इस्लामाबाद में मोदी जी का विरोध करते हुए बलूचिस्तान को पाकिस्तान का अभिन्न अंग बताया | मोदी जी के वक्तव्य से स्पष्ट होता है भारत अपने खुफिया संगठन के जरिये आतंकवाद को हवा दे रहा है |नवाज शरीफ ने फिर कश्मीर का राग अलापा सबसे अधिक हाफिज  सईद ने चिंघाड़ते हुए अपनी सरकार को जिन्ना की नीति की याद दिलाई वह कश्मीर को पकिस्तान के गले की नस मानते थे यदि तुम कुछ नहीं कर सकते वह करें |आतंकवादी पाकिस्तान को पकड़ने के लिए तैयार है हाफिज भी शायद मन ही मन खलीफा बनने के सपने बुन रहा हो ,भूल गया है विश्व भी आतंकवाद से त्रस्त है लेकिन अब इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ने वालों के घुटने टूट गये हैं|  कश्मीर गले की नस नहीं भारत का मस्तक है | पाकिस्तान  सरकार को आतंकवादियों का सरगना ने आदेश देते हुए कहा पूरा मंत्री मंडल और सरकार विश्व में बलूचिस्तान और कश्मीर का पर भारत के बदले सुरों की निंदा करे कश्मीर में अपने हक का प्रचार करे |

बंगलादेश ने पाक सेना के जुल्मों को सहा है उन्होंने तुरंत बलूचिस्तान पर मोदी जी के बक्तव्य का समर्थन किया | भारत सरकार चाहती है पहले विश्व में प्रवासी बलूचियों तक बलूचियों का दर्द उन पर होने वाले जुल्म पहुचाये जायें वह भी अपनी मातृभूमि का दर्द समझें |पाकिस्तान की कश्मीर पर काट ही बलूचिस्तान नीति है मोदी जी ने दोस्ती का हाथ बढ़ा कर देख लिया लाभ नहीं हुआ |शठ से उसी की भाषा में बात करना ही कूटनीति है | चीन का भी ग्वादर बन्दरगाह पर पैसा लगा है उसके हित में है बलूचिस्तान शांत रहे | लेकिन भारत की नीति केवल कागजी बन कर न रह जाये यह ठीक है बलूचिस्तान से भारत की सीमा नहीं मिलती परन्तु बलूचिस्तान को हम मौरल सपोर्ट दे सकते हैं वहाँ के लोग भारत जैसे मजबूत देश की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे हैं मोदी जी के अपने भाषण में पकिस्तान के प्रति अपनी सरकार के रुख के बदलाव के स्पष्ट संकेत दे दिए है नीति का असर भी दिखाई दे रहा है पकिस्तान ने बलूच नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है |

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