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हमारे नुक्कड़ की सुबह

Posted On: 20 Jan, 2010 Others में

Social बकवासSocially networked bakwaas 2.0

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133 Comments

bird1

छोटी चाची : उठ जाओ कमीनो , सुबह हो गयी . घोड़े बेच कर सो रहे हो या अस्तबल ही बेचने की कसम खाई है !!!!!!

 


 

sleeping_dog2

सफेदी रानी : नहीं उठना मैडम , कल रात के पार्टी के बाद , सुपर हैंगोवर हो गया है | गर्रर … | अरे कल्लू कहाँ है ?

 


 

sleeping_dog

कल्लू मियां : भाँड में जाओ सब के सब | मुझे मत रोको | मुझे सोने दो | मैं कसम खाता हूँ मैं कभी दारू नहीं पियूँगा |

 


 

bird2

उस्ताद काँव काँव : अरे हमारी छम्मक छल्लो कहाँ है ? कल तोह पागलों की तरह कमर हिला रही थी

 


 

cat

छम्मक छल्लो : घर्र .. घर्र (खर्राटे लेते हुए सपने में “कटरीना सावधान !!! मैं आ रही हूँ मुंबई !!! फिर देखना मेरे हर ठुमके पे उ.प.-बिहार लूटेगा” ) .. घर्र घ्र्र्र

 


 

camel2

ग्यानी बाबा : हो हो हो हो … कितनी बार समझाया है दारू पीना छोड़ दो | पानी पियो और प्रभु का नाम लो ! बम भोले .. बम भोले

 


 


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