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कोरोना प्रसार मामले पर 32 देशों के 239 वैज्ञानिक और WHO आमने-सामने, बहस में यूएन भी कूदा

Posted On: 7 Jul, 2020 Common Man Issues में

Rizwan Noor Khan

जन-जन से जुड़ी दास्तांसमाज की विभिन्न जरुरतों व समस्यायों को उभारता और समाधान तलाशता ब्लॉग

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पूरी दुनिया को तबाही की ओर ले जा रहा कोरोना महामारी थमने का नाम नहीं ले रही है। हर रोज रिकॉर्ड स्तर पर नए कोरोना संक्रमित मामले सामने आ रहे हैं, जबकि रोजाना कई हजार लोग अपनी जान गवां रहे हैं। इस बीच 239 वैज्ञानिकों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO से कहा है कि वह स्वीकार कर ले कि कोरोना का प्रसार हवा के जरिए भी होता है।

 

 

 

 

नई स्टडी में नया खुलासा
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक आस्ट्रेलिया और अमेरिका के दो वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के प्रसार की तरीकों पर स्टडी की। स्टडी में पाया गया कि कोरोना वायरस खांसने, छींकने से निकलने वाले माइक्रोड्रॉपलेट्स के अलावा हवा से भी फैलता है। इस स्टडी को क्लीनिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

 

 

 

 

 

WHO का दावा फेल, हवा से फैलता है वायरस
विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने महामारी की शुरुआत में कहा था कि वायरस खांसने, छींकने से निकलने वाले माइक्रोड्रॉपलेट्स से और एक दूसरे के टच करने से फैलता है। WHO ने वायरस के हवा से फैलने की संभावनाओं से इनकार कर दिया था। वायरस की गंभीरता को पहचानने में देर करने की वजह से WHO को पूरी दुनिया में किरकिरी झेलनी पड़ी है। ?

 

 

 

 

32 देशों के साइंटिस्ट ने लिखा पत्र
दो साइंटिस्ट की इस स्टडी को 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने समर्थन दिया है। वैज्ञानिकों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को पत्र लिखकर कहा है कि यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि कोरोना वायरस हवा से भी फैलता है। वायरस के एयरबार्न कम्यूनिटी ट्रांसफर के कारण ही पूरी दुनिया इसके गंभीर परिणाम भुगत रही है।

 

 

 

 

यूएन ने कहा स्टडी का हुआ है मूल्यांकन
स्टडी के दावे और इसे 239 वैज्ञानिकों का समर्थन मिलने के बाद यूनाइटेड नेशंस की स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि इस स्टडी के बारे में पहले से अवेयर थी। स्टडी के दावों पर तकनीक विशेषज्ञ मूल्यांकन कर रहे थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि एयरबॉर्न ट्रांसमिशन के जोखिमों गंभीर हो सकते हैं।..NEXT

 

 

 

 

 

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