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पैसे की बलि चढ़ते वैवाहिक संबंध

Posted On: 20 Oct, 2011 Common Man Issues में

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money vs marriageप्रत्येक व्यक्ति के जीवन में वैवाहिक संबंध अत्याधिक महत्वपूर्ण होते हैं. विवाह के पश्चात महिला और पुरुष समर्पण भावना का परिचय देते हुए, एक दूसरे के प्रति उत्तरदायी हो जाते हैं. उनके बीच में किसी भी प्रकार का मनमुटाव या मतभेद उनके वैवाहिक जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. इसीलिए ऐसा माना जाता है कि अगर वैवाहिक जोड़े के बीच प्रेम या लगाव नही है तो उनके संबंध के टूटने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हालांकि यह धारणा भी प्रमुख रूप से विद्यमान है कि जब विवाह के बाद महिला और पुरुष एक साथ रहने लगते हैं, तो उनमें प्रेम रूपी भावनाओं का विकास होना स्वाभाविक है. लेकिन एक नए अध्ययन ने हमारी इस मानसिकता को गलत साबित कर दिया है.


वाशिंगटन स्थित ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक रिसर्च के अनुसार यह बात प्रमाणित हुई है कि अधिकांश वैवाहिक दंपत्ति भावनाओं से ज्यादा भौतिकवादी वस्तुओं और धन-दौलत को तरजीह देते हैं. उनके बीच प्रेम जैसी कोई चीज नहीं होती.


दुनियाभर के 1,734 वैवाहिक जोड़ों के संबंध की स्टडी करते हुए शोधकर्ताओं ने पाया कि मात्र 10-15 प्रतिशत लोग ही अपने संबंध में पैसे से ज्यादा भावनाओं और संबंध की गुणवत्ता को जरूरी समझते हैं. ज्यादातर वैवाहिक जोड़े सिर्फ भौतिकवादी सुख के कारण एक-दूसरे के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं.


इस स्टडी के मुख्य जेसन कैरोल का कहना है कि ऐसे वैवाहिक जोड़ों के अंदरूनी हालात ज्यादा चिंतनीय हैं जिनमें पति-पत्नी दोनों ही भौतिकवादी मानसिकता से ग्रस्त हैं. ऐसे जोड़ों में व्यक्ति ना तो एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं, ना पारस्परिक मसलों को सुलझाते हैं और ना ही सुख-दुख में शामिल होना जरूरी समझते हैं. वे बस अपने जीवन को बिना किसी बंधन के जिए चले जाते हैं.


नतीजों के अनुसार हर पांच में से एक जोड़े ने इस बात को स्वीकार किया है कि वे अपने संबंध में पैसों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं. आर्थिक तौर पर सशक्त होने के बावजूद पति-पत्नी के बीच पैसों को लेकर विवाद और तनाव रहता है. अगर किसी वैवाहिक दंपत्ति में से एक व्यक्ति पैसों के प्रति ज्यादा आकर्षित रहता है तो दूसरा उसकी कमी को पूरा कर लेता है लेकिन जिनमें दोनों ही एक-दूसरे को महत्व ना दें, तो ऐसे में हालात घातक होते हैं.


इस अमरीकी अध्ययन को अगर हम भारतीय परिदृश्य में देखें तो यहां विवाह जैसे संबंध अपेक्षाकृत अधिक महत्व रखते हैं. परंपरागत विवाह शैली, जिसके अंतर्गत पति-पत्नी विवाह के पहले ना एक-दूसरे को जान पाते हैं और ना ही कभी उन्हें मिलने का मौका मिलता है लेकिन वे अपने वैवाहिक संबंध को सम्मानपूर्वक अपनाते हुए एक-दूसरे के प्रति खुद को पूरी तरह समर्पित कर देते हैं. वे ऐसी डोर से बंध जाते हैं जो उन्हें हर सुख-दुख, परेशानी में साथ रखती है. यह पारस्परिक भावना ही है जो उन्हें संबंध की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है.


भारतीय अर्थव्यवस्था एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है. पैसों का महत्व समझना सभी के लिए आवश्यक है. लेकिन वैवाहिक धर्म और परिवार जनों की खुशी सर्वोपरि है. पति-पत्नी के बीच छोटे-मोटे विवाद होना कोई बड़ी बात नहीं है. पति अपने हितों को नजरअंदाज करता हुआ पत्नी की जरूरतों के विषय में सोचता है, वहीं पत्नी पैसे को लेकर कोई भी योजना बनाने से पहले पति की खुशियों को महत्व देती है. लेकिन निश्चित तौर पर भारतीय संबंधों में पैसे जैसी भौतिकवादी व्यवस्था को आपसी भावनाओं के आगे महत्व नहीं दिया जाता. हालांकि अपवाद सभी जगह होते हैं, लेकिन उन अपवादों को सार्वजनिक तौर पर सभी पर लागू करना पूर्णत: असंगत है.


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