blogid : 316 postid : 1103014

नदी का यह रूप भी गणेश जी के भक्तों को प्रथा निभाने से रोकने में नाकाम रहा

Posted On: 28 Sep, 2015 Common Man Issues में

जन-जन से जुड़ी दास्तांसमाज की विभिन्न जरुरतों व समस्यायों को उभारता और समाधान तलाशता ब्लॉग

Social Issues Blog

782 Posts

830 Comments

जब तस्वीर कहानी खुद बयां करे तो शब्द बेमानी लगते हैं. पहली तस्वीर को देखकर भले ही आपको यह लग रहा हो कि यह किसी फिल्मी सेट का नजारा हैं और गणेशजी की मूर्ति बादलों के ऊपर उड़ रही है लेकिन वास्तविकता यह है कि यह तस्वीर दिल्ली में यमुना नदी की है और गणेशजी की मूर्ति बादलों के ऊपर नहीं उड़ रही है. एक गणेशभक्त यमुना में प्रदूषण के कारण उफनते फेन के बीच गणेशजी की मूर्ति को विसर्जित कर रहा है.


INDIA-RELIGION


यह गणेशजी के प्रति इस भक्त की आस्था ही है कि वह यमुना में इस भयंकर प्रदूषण की परवाह किए बगैर अपने गणपत्ति बप्पा के साथ इसमें प्रवेश कर गया है. यमुना के इस प्रदूषित जल के कारण उसे स्किन कैंसर और त्वचा संबंधित अन्य भयंकर बीमारियां हो सकती हैं. अगर यह जल उसके शरीर के भीतर प्रवेश किया तो न जाने कौन-कौन सी बीमारियों को जन्म देगा.


Read: क्या सचमुच प्रयाग में होता है तीन नदियों का संगम…जानिए सरस्वती नदी का सच


शायद इस भक्त को अपने स्वास्थ संबंधित इन खतरों का इल्म नहीं है और यदि है तो फिक्र नहीं है. हो सकता है कि उसे गणपति बप्पा पर पूरा विश्वास हो कि वे उन्हें कुछ नहीं होने देंगे. आखिर गणेशजी की प्रतिमा को विसर्जित कर यह भक्त गणेश जी की सेवा ही तो कर रहा है.

ganesh-2


कुछ गणेश भक्तों को इस प्रकार की भोली सोच के लिए माफ किया जा सकता है. लेकिन समाज के रूप में हम और समाज के व्यवस्थापक के रूप में सरकार भी यदि ऐसी ही सोच रखती है तो यह क्षम्य नहीं है.


chhath-puja1


ऐसे नजारे सिर्फ गणपति विसर्जन के समय दिखते हों ऐसा नहीं है. कुछ ही दिनों में उत्तरभारत का एक लोकप्रिय पर्व छठ आएगा. पिछले वर्ष छठ के अवसर पर इन्हीं हलातों में यमुना में अर्घ्य देते हुए लोगों की तस्वीरें मीडिया में आईं थी. इन तस्वीरों पर हो-हल्ला तो खूब हुआ लेकिनी जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं हुआ. अबकी छठ में भी दिल्ली के यमुना घाटों पर हम बदली हुई तस्वीर देखेंगे इसकी उम्मीद कम ही है.


chath 2p


यह तस्वीरें दिखाती हैं कि नदियों का भारत के लोगों के जीवन और संस्कृति से अटूट रिश्ता है. नदियां जहरीली हो चली हैं लेकिन लोगों को अब भी वे जीवनदायनी व मोक्षदायनी प्रतीत होती हैं.


Read: कलयुग का भागीरथ: मृत हो चुकीं पांच नदियों में फूंके प्राण


भारतीय जनमानस का नदियों से रिश्ता टूटे यह असंभव सा प्रतीत होता है. हालांकि इन जहरीली हो तुकी नदियों के कारण लोगों की सेहत, आस्था और जीवन के साथ खिलवाड़ होता रहे और हम सब “सब चलता है” वाला रवैया अख्तियार किए बैठे रहें, यह भी मंजूर नहीं है.


ganesh 3


यमुना एक दिन में इस हालत में नहीं पहुंची, नाहीं इसके लिए किसी खास वर्ग या संस्था को जिम्मेवार ठहराया जा सकता है. इसलिए इसकी हालत सुधारने की जिम्मेदारी सबकी होनी चाहिए. सरकार की भी और उन भक्तों की भी जो गणेश जी की मूर्तियों को ऐसी हालत में छोड़ जाते हैं. विसर्जन के बाद इन मूर्तियों में इस्तेमाल हुए रसायन भी पहले से प्रदूषित यमुना को और प्रदूषित करने में कसर नहीं छोड़ते. छठ जैसे त्योहारों में जो पूजन सामग्री हम घाटों पर छोड़ आते हैं वे भी नदियों को और गंदा बनाती हैं. Next…

Read more:

अद्भुत नजारा: नदी के ऊपर नदी जिस पर चलता है पानी का जहाज

रहस्यमयी है यह मंदिर जहां भक्त नहीं मां गंगा स्वयं करती हैं शिवलिंग पर जलाभिषेक

जानिए, किस भगवान के पैरों के पसीने से हुआ था गंगा का जन्म

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग