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एक झोपड़ी से हुई थी डेरा सच्चा सौदा आश्रम की शुरुआत, इन वजहों से लोग बनते थे उसके 'भक्त'

Posted On: 28 Aug, 2019 Others में

Pratima Jaiswal

जन-जन से जुड़ी दास्तांसमाज की विभिन्न जरुरतों व समस्यायों को उभारता और समाधान तलाशता ब्लॉग

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कहते हैं आप किसी इंसान से कभी न भी डरें लेकिन आपको वक्त से जरूर डरना चाहिए। वक्त के सामने किसी इंसान की नहीं चलती. वक्त कब किसी को राजा से रंक बना दे कहा नहीं जा सकता। राम रहीम पर भी यह बात बिल्कुल सही बैठती है. रेप के मामले में सजा काट रहा राम रहीम फिलहाल, जेल से बाहर आने के लिए जोर लगा रहा है. पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पैरोल देने की उनकी पत्नी की मांग को खारिज कर दिया। राम रहीम की पत्नी ने दलील दी थी कि राम रहीम पर 19 साल तक केस चला लेकिन कभी कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं हुई, ऐसे में उन्हें पैरोल दी जाए।

 

 

 

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि दो साल पहले पंचकूला में क्या हुआ वह हम भूले नहीं है, इसलिए इतिहास की बात न ही की जाए तो अच्छा है। हाईकोर्ट के इस रुख के बाद पत्नी ने याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी जिसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया। आज जेल से बाहर आने की कोशिशों में लगा राम रहीम कभी अपनी आलीशान जिंदगी की वजह से सुर्खियों में रहता था। आइए, जानते हैं राम रहीम के अर्श से फर्श तक की कहानी-

 

 

झोपड़ी से हुई थी सच्चा सौदा की शुरुआत

इन दिनों जो डेरा सच्चा सौदा विवादों में है, वह एक सामाजिक कल्याण एवं आध्यात्मिक संगठन है। इसकी स्थापना मस्ताना बलूचिस्तानी नामक एक साधु ने 29 अप्रैल 1948 को एक आध्यात्मिक शिक्षा केंद्र के रूप में की थी। इसकी शुरुआत एक झोपड़ी से आध्यात्मिक कार्यक्रमों और सत्संगों का आयोजन करके हुई थी। समय के साथ डेरा सच्चा के अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई। बाबा मस्ताना बलूचिस्तानी को उनके समर्थक बेपरवाह मस्तानाजी महाराज के नाम से बुलाते थे। बाबा मस्ताना बलूचिस्तानी का 18 अप्रैल 1960 को निधन हो गया, जिसके बाद 1960 से 1990 तक शाह सतनाम जी महाराज डेरा प्रमुख रहे। उन्होंने ही वर्ष 1990 में गुरमीत राम रहीम सिंह को डेरा प्रमुख बनाया।

 

 

कई देशों तक फैला है साम्राज्‍य

हरियाणा के सिरसा जिले में डेरा सच्चा सौदा का आश्रम 69 वर्षों से चल रहा है। इसका साम्राज्य अमेरिका, कनाडा व इंग्लैंड से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूएई तक फैला है। इस संगठन के अनुयायियों में सिख धर्म, हिंदू धर्म व पिछड़े और दलित वर्ग के लोग शामिल हैं। डेरा सच्‍चा सौदा के पास कई राज्यों में ज़मीन है। इस जमीन पर खेती से होने वाली आय से संगठन चलाने और समाज सेवा के कार्य किए जाते थे। डेरा सभी धर्मों-वर्गों के लोगों का अपने बीच स्वागत करता था। डेरा समर्थकों का कहना था कि डेरा सभी धर्मों का आदर-सम्मान करता है और सभी धर्मों में आस्था रखने वाले लोगों का वहां स्वागत है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शायद यही कारण है कि दलित और पिछड़े वर्ग के अनेक लोग डेरे के ऊंच-नीच, जात-पात और गरीब-अमीर के फर्क से ऊपर उठने के वादे से प्रभावित होकर डेरे की ओर चले आते थे। डेरा के समर्थक इसे सच्चा धार्मिक आश्रम कहते थे। 

 

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समाज सेवा के उद्देश्‍य से स्‍थापना

डेरा सच्‍चा सौदा की स्‍थापना का उद्देश्‍य समाज सेवा था। डेरे की ओर से समय-समय पर रक्तदान और नेत्र जांच शिविर जैसे आयोजन किए जाते थे। साथ ही किसी प्राकृतिक आपदा आने पर उससे प्रभावित लोगों की मदद भी डेरा करता है, मगर इसकी आड़ में गुरमीत राम रहीम सिंह ने रेप जैसे अपराध शुरू कर दिए। डेरे का दावा है कि दुनिया भर में उसके करीब पांच करोड़ और हरियाणा में 25 लाख अनुयायी रहे हैं।…Next

 

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