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Homosexuality - मानवता के विरुद्ध घोर अपराध

Posted On: 1 Jul, 2010 Common Man Issues में

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प्रकृति के कुछ नियम होते हैं, जिसके अनुसार जीवन शुरु से चल रहा है. यह नियम कभी अपरिवर्तनीय थे, जिनसे यह समाज डरता तो था लेकिन चोरी छुपे अपने मनुष्य होने की प्रवृति की वजह से इन्हें अंजाम भी देता था. समय आगे बढ़ा मनुष्य ने प्रकृति की गुलामी छोड़ कर उल्टा उसे ही गुलाम बना लिया. प्रकृति का सबसे बड़ा नियम जिससे मनुष्य की संख्या बढ़ती है कि नर नारी की तरफ ही आकर्षित होगा या शारीरिक संबंध बनाएगा. लेकिन विकास के कारण अंधे हो चुके मनुष्य ने इस परम नियम को भंग कर दिया और समय ऐसा आ गया कि नर नर से और नारी नारी से प्रणय-सूत्र में बंधने को तैयार है.

100629113228_iceland_pm282अब दुनिया के ज्यादातर देशों में या तो समलैंगिकता को मान्यता मिल गई है या उसे मान्य बनाने की दिशा में भरपूर कोशिशें जारी हैं. अभी हाल ही में कई देशों में जैसे डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया-अमेरिका, आइसलैंड, अर्जेंटीना में समलैंगिक शादी को मान्यता मिली, भारत में भी समलैंगिकता को कानूनी मान्यता देने के लिए  कानून बनाने की तैयारी चल रही है.

अभी हाल ही में यूरोपीय देश आइसलैंड में समलैंगिकों के बीच विवाह को मान्यता मिली तो वहां की प्रधानमंत्री जोहाना सिगुरदारदोत्ती जिनकी उम्र 68 वर्ष है, उन्होंने इसका जश्न अपनी प्रेमिका, लेखिका जोनिना लियोसदोत्तीर से परिणय सूत्र में बंध कर मनाया. आइसलैंड में इस कानून के लिए वोटिंग का सहारा लिया गया था जिसमें इसे पूरी सर्वसम्मति से पारित किया गया यानी किसी ने भी इसके विरोध में वोट नहीं डाला. यह तो मात्र एक इशारा है कि आज लोग प्रयोग के नाम पर और अपने स्वतंत्र होने की अराजकता को कितना फैला चुके हैं.

homosexuality17Aug1250502260_storyimageसमलैंगिकता क्या किसी को भी हो सकती है

सबसे पहले तो हम अपने पाठकों को यह बता दें कि समलैंगिकता एक मानसिक बीमारी नहीं यह एक विकृत सोच है जिसमें आप अपने समान सेक्स के साथी की तरफ ही आकर्षित होते हैं. जैसे अगर कोई लड़का है तो उसे लड़कियों की जगह लड़कों में ज्यादा दिलचस्पी होगी और वह लड़कों के साथ ही शारीरिक संबंध बनाने में ज्यादा सहज होगा. लेकिन इसमें एक भ्रांति फैली हुई है कि अगर कोई समलैंगिक है तो वह विपरीत सेक्स वाले से संबंध बना ही नहीं सकता जबकि ऐसा कतई नहीं है. एक समलैंगिक अपने विपरीत सेक्स वाले के साथ संबंध तो बना सकता है मगर ऐसे में वह खुद को सहज महसूस नहीं करेगा. इसके साथ ही समलैंगिकता को अगर समय पर पहचान किया जाए तो उसे ठीक भी किया जा सकता है कुछ उपचार से और कुछ सोच में बदलाव लाकर हालांकि ऐसा होना थोड़ा मुश्किल होता है.

homosexualityविश्व में क्यों फैल रही है समलैंगिकता

समलैंगिकता आज विश्व के ज्यादातर हिस्सों में फैल चुकी है, जहां पश्चिमी देशों में यह खुले आम हो रही है तो पूरब और मध्य में चोरी छुपे यह विराजमान है. लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है मनुष्य का खोजी व्यवहार. मनुष्य हमेशा प्रयोग करना चाहता है कुछ नया करना चाहता है. इसी खोज और नएपन ने उसे समलैंगिक बनने की तरफ धकेला है. अक्सर बचपन की बातें और आदतें आने वाले कल पर प्रभाव डालती हैं और बाल समय में की गई गलतियों का ही कभी-कभी नतीजा होती है यह समलैंगिकता.

पश्चिमी सभ्यता और नंगेपन के दौर में वासना की पूर्ति के लिए मनुष्य कुछ भी कर सकता है और इसी दिशा में मनुष्य ने समलैंगिक होने को अपनाया है. वासना और स्वतंत्र होने की अराजक मंशा ने समलैंगिकता को सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया है.

indiaभारत में इसकी जगह

भारत हमेशा से ही पश्चिमी देशों की नकल करता रहा है. विदेशी फैशन, विदेशी शिक्षा और अन्य विदेशी चीजों के साथ एक यह आदत भी आ गई. भारत के किसी भी साहित्य में इसका वर्णन नहीं पाया जाता. हालांकि इस्लाम में जन्नत के वर्णन में हूरों के साथ-साथ लौंडों का भी वर्णन किया गया है. इसके अनुसार कुछ लोग मानते हैं कि अरब मुसलमानों के साथ ही भारत में इस विकृति का आगमन हुआ. खुजराहो के कुछेक चित्रों में समलैंगिक सेक्स को भी दर्शाया गया है मगर इसे सिर्फ कला के रुप में देखा जाता है.

आज भारत में समलैंगिकता किस कदर फैल चुकी है इसका ताजा उदाहरण था कुछ महीने पहले निकली समलैंगिकों की परेड.

भारत में पहले धारा 377 के अंतर्गत एक ही लिंग के दो व्यक्तियों द्वारा यौन संबंध स्थापित करना गैरकानूनी था जिसमें अभी संसोधन कर इसे कानूनी मान्यता दे दी गई है.

समलैंगिक संबंधों की वकालत करते हुए नाज फाउंडेशन नाम की स्वयंसेवी संस्था ने जनहित याचिका दाखिल की थी जिस पर विचार करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने धारा 377 में संशोधन की मांग उठाते हुए कहा था कि अगर आईपीसी की धारा 377 में संशोधन नहीं हुआ तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा, जो सभी नागरिकों को समान अवसर देने और कानून के समक्ष सभी के समान होने की बात कहता है. न्यायालय ने धारा 377 में संशोधन की मांग उठाई और वयस्कों में सहमति से बनने वाले यौन संबंधों को वैध मानने पर मुहर लगा दी.

अब भारत में धारा 377 के अनुसार समलैगिंकता गैर-कानूनी नहीं है लेकिन अवयस्क के साथ और जबरदस्ती बलपूर्वक सेक्स को गैरकानूनी माना जाएगा.

090630124345_cs-homosexuality-3भारत में समलैंगिकता की कानूनी लड़ाई का घटनाक्रम

2001 में समलैंगिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले नाज फाउंडेशन ने जनहित याचिका दायर कर माँग की कि वयस्कों के बीच परस्पर सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को वैध किया जाए.

2 सितंबर 2004  को  दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की माँग की गई थी .

3 अप्रैल 2006  को उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय को मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया.

दो जुलाई 2009 को उच्च न्यायालय ने वयस्कों के बीच परस्पर सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को वैध घोषित किया.

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जुलाई 2009 को समलैंगिकता को वैध ठहराए जाने के बाद भारत इसे वैध मानने वाला दुनिया का 127वाँ देश बन गया, जबकि 80 देश अभी भी इसे अपराध की श्रेणी में रखते हैं. समलैंगिकता को कानूनी मान्यता देने की प्रक्रिया 1989 में डेनमार्क से शुरू हुई थी. वह पहला देश था, जिसने समलैंगिक जोड़ों को विवाहित दंपति के बराबर का दर्जा दिया था. इसके बाद कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने उसका अनुसरण किया था. दिसंबर 2007 में नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को उन कानूनों को समाप्त करने का निर्देश दिया, जो समलैंगिकों के खिलाफ भेदभाव करते थे.

gayसमलैंगिकता बीमारी नहीं सोच – इलाज है मुमकिन

समलैंगिकता बीमारी नहीं है. यह तो मात्र सोच है जो मन के किसी कोने में बैठी होती है. अगर आप बचपन में या समय रहते इसे पहचान लें अथवा समलैंगिकता के लक्षण को पकड़ लें तो उसे ठीक किया जा सकता है. मानसिक और दवाइयों दोनों से इसका इलाज संभव है. तो आगे से अगर इसे खत्म करना है तो इसके लक्षण को पहचानिए, बात करिए और उपचार का सहारा लीजिए.

हालांकि समलैंगिकता को खत्म करने का सबसे बेहतर उपाय है नैतिक आचरण संहिता का प्रचार और पालन जिसका आज के भारत में कोई अस्तित्व नहीं है. सरकार को इस तरह के मामलों पर सही दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और समलैंगिकता या वेश्यावृत्ति को किसी भी रीति से वैध नहीं बनाना चाहिए. शायद हर मामलों में अक्षम सरकारों का एकाध उचित कदम देश को पतन के गर्त में जाने से रोक ले.

जागरण जंक्शन पर सोशल इश्यू में हम अपने पाठकों  को समाज में घटित होनी वाली समस्याओं से रुबरु कराते हैं ताकि कहीं कोई ऐसी घटना आपको प्रभावित न करे. अपने विचार रखें और अगर अन्य किसी सामाजिक विषय पर चर्चा चाहते हैं तो जरुर बताएं.

This article says about impact and effect of homosexuality. Homosexuality is one of the most controversial social and political issue and is also against Indian traditions and culture. Also homosexuality is an issue of religious imbalance. Gays(male) and lesbians(female) come under homosexual category.

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