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भावनात्मक शोषण है विवाहित जीवन में दोस्तों का दखल !!

Posted On: 10 Nov, 2011 Common Man Issues में

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friendship after marriageदिनोंदिन जटिल होती जीवनशैली के कारण व्यक्ति को अपने निजी जीवन में भी कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. प्राय: देखा जाता है कि काम की व्यस्तता के कारण व्यक्ति के लिए अपने परिवार के साथ समय गुजारना, उनकी छोटी-छोटी खुशियों में शामिल होना तक दूभर हो जाता है. सफलता के पीछे भागते हुए और अपने प्रतिद्वंदियों से आगे निकलने की चाहत कभी-कभी उसे ऐसे मुकाम पर ला खड़ा करती है जब उसके परिवार वाले भी उसकी अनुपस्थिति को वहन करना सीख जाते हैं. इसे कुछ अति व्यस्त लोग परिवार को खुशी देने और उन्हें आर्थिक रूप से दुरुस्त रखने के लिए किया गया त्याग मानकर चलते हों, लेकिन उनका यह त्याग कब उनके लिए एक सजा बन जाता है उन्हें पता भी नहीं चलता.


पहले जहां महिलाओं का अपने पति के अलावा किसी अन्य पुरुष बात करना, मेल-मिलाप निंदनीय समझा जाता था. वहीं आज साथ पढ़ने और काम करने के कारण महिला और पुरुष एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं. परिणामस्वरूप ऐसी कोई भी मानसिकता अब निरर्थक करार दी जा चुकी है. इतना ही नहीं आजकल सोशल नेटवर्किंग साइटें भी अपनी लोकप्रियता के चरम पर हैं. इन साइटों के माध्यम से महिला हो या पुरुष दोनों ही ऐसे अनजान दोस्तों के संपर्क में आ जाते हैं जिन्हें भले ही वह जानते ना हों लेकिन उनके साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस करने लगते हैं. लगातार एक दूसरे से जुड़े होने के कारण वह एक ऐसी डोर से बंध जाते है जिसे वह कोई नाम नहीं दे सकते. युवाओं के लिए इसे दोस्ती का नाम देना बेहद आसान होता है. किसी प्रतिबद्ध संबंध में ना बंधे होने के कारण वह अपने ऑनलाइन फ्रेंड के साथ प्रेम-प्रसंग शुरू कर देते हैं. लेकिन अगर किसी विवाहित व्यक्ति की ऐसी दोस्ती समाज या उसके परिवार के सामने आ जाती है तो उस संबंध की हकीकत और औचित्य जाने बिना ही व्यक्ति पर कई तरह के आक्षेप लगने शुरू हो जाते हैं. उसे चरित्रहीन की संज्ञा तक दी जाती है.


प्राय: देखा जाता है कि वे विवाहित व्यक्ति जो अपने साथी को भावनात्मक लगाव प्रदान नहीं कर पाते या अत्याधिक व्यस्तता के कारण अपने साथी के साथ जरूरी समय व्यतीत नहीं कर पाते हैं उनका साथी अपना ध्यान दूसरी ओर लगाने के लिए अपने दोस्तों के साथ अधिकाधिक समय व्यतीत करने लगता है. इन्हीं दोस्तों में वह अपनी खुशियों की तलाश भी करने लगता है. अगर इन दोस्तों के बीच उसे ऐसा व्यक्ति मिल जाए जो उसके खाली पड़े भावनात्मक पक्ष को भरने में सफल रहे तो निश्चित रूप से यह उनके विवाहित जीवन में दरार और तनाव पैदा कर सकता है. विशेषकर अगर वह दोस्त विपरीत लिंग का हो तो शक की दीवार खड़ी होने में ज्यादा समय नहीं लगता. विवाहित दंपत्ति के बीच पनपता यह शक और उपेक्षा उनके संबंध को बुरी तरह प्रभावित करते हैं.


कार्यक्षेत्र से संबंधित अपनी परेशानियों में उलझा व्यक्ति अपने निजी जीवन की खुशियों को बचा नहीं पाता. वह खुद को भावनात्मक रूप से शोषित समझने लगता है और अपने साथी पर शक होने के कारण अपने विवाह की आहुति तक दे देता है.


लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या अपने जीवन साथी की उपेक्षा झेल रहे व्यक्ति का बाहर किसी दोस्त के साथ एक स्वस्थ संबंध बनाना गलत है? अगर उस दोस्त की दोस्ती के कारण वह कुछ खुशी के कुछ ऐसे पल बिता लेता है जिनकी अपने जीवन साथी से आश रखना उसके लिए बेमानी है तो क्या वह कुछ गलत कर रहा है?


जैसा कि हर परिस्थिति और समस्याओं के दो पहलू होते हैं वैसे ही मनुष्य की इस प्रवृत्ति को भी दो अलग दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है.


दोस्त के साथ भावनात्मक जुड़ाव धोखा नहीं है

सबसे पहले तो यह बात समझनी होगी कि किसी भी व्यक्ति के साथ भावनात्मक लगाव पहले से ही निर्धारित नहीं होता और ना ही आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि आप कब और किसके साथ परस्पर भावनाओं से जुड़ जाते हैं. हमारे समाज में कभी भी एक महिला और पुरुष की दोस्ती को सम्मानपूर्वक नहीं देखा जाता. फिर भले ही उन दोनों के बीच स्वस्थ दोस्ती जैसा पवित्र संबंध ही क्यों ना हो, उनके रिश्ते को हमेशा गलत ही माना जाता है. दोस्त की संज्ञा ऐसे व्यक्ति को दी जाती है जिसके साथ आप अपने सारे सुख-दुख बेहिचक बांट सकते हैं. इस उम्मीद से कि वह आपकी परेशानियों को सुलझाने का प्रयत्न करेगा और हर संभव तरीके से आपको खुश रखने की कोशिश करेगा. ऐसे संबंध भावनाओं से जुड़े होते हैं ना कि शारीरिक तौर पर. जीवन साथी के पास समय ना होने के कारण दूसरे व्यक्ति को चाहे ना चाहे ऐसे सहारे तलाशने ही पड़ते हैं जिनके द्वारा वह अपनी सभी परेशानियों को भूल सके. महिला और पुरुष की दोस्ती पर गलत धारणा बनाकर निश्चित तौर पर हम दोस्ती जैसे संबंध का अपमान करते हैं.


विवाह के पश्चात किसी अन्य व्यक्ति से भावनात्मक लगाव निंदनीय है

हमारे समाज में विवाह से पहले और बाद में महिला और पुरुष दोनों का ही किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध सही नहीं माना जाता. ऐसी धारणा है कि विपरीत लिंग के लोग जब लगातार एक दूसरे के निकट रहते हैं तो कभी ना कभी उन दोनों के बीच शारीरिक आकर्षण पनपने लगता है. वर्तमान हालातों में तो यह धारणा व्यावहारिक तौर पर भी देखी जाती है. कितने ही लोग दोस्ती की आड़ में अनैतिक संबंधों का अनुसरण करते हैं. प्रेम-प्रसंग हो या फिर विवाह दोनों ही हालातों में ऐसे उदाहरण देखे जा सकते हैं जब साथी की अनुपस्थिति या उनसे छुपाकर दोस्ती की सभी सीमाएं लांघ दी जाती हैं. भले ही महिला और पुरुष खुद को एक दोस्त मानते हों लेकिन कब भावनाओं के आवेग में आकर उनकी यह दोस्ती अनैतिक रूप ले ले कहा नहीं जा सकता. ऐसे में कहां तक हम दोस्ती के संबंध पर विश्वास कर सकते हैं.


निःसंदेह हम दोस्ती को गलत नहीं कह सकते. दोस्ती एक ऐसा संबंध है जो मनुष्य के जीवन की सभी जटिलताओं को दूर करता है. लेकिन ऐसे में हम विवाह और उससे जुड़े उत्तरदायित्वों को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते. विवाह के पश्चात वैवाहिक धर्म को निभाना और जीवन साथी के साथ पूरी ईमानदारी बरतना ही व्यक्ति का पहला धर्म है. दोस्ती को एक सीमित स्थान ही दिया जाए तो बेहतर है. इसके अलावा उन लोगों को भी अपनी कार्यप्रणाली और मानसिकता बदलने की जरूरत है जो समय की कमी की दुहाई देकर अपने जीवनसाथी से दूरी बनाने लगते हैं. ऐसे लोगों को अपने जीवनसाथी की जरूरतों और उसकी अपेक्षाओं का ध्यान रखना चाहिए. क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करते तो विवाहित जीवन की स्थिरता पर प्रश्न चिंह लग सकता है.


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