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जब ये कीमती चीजें ही हो जाएगी खत्म, तो फ्यूचर प्लानिंग करके क्या करेंगे आप! इनपर टिका है हमारा अस्तित्व

Posted On: 22 May, 2019 Common Man Issues में

Pratima Jaiswal

जन-जन से जुड़ी दास्तांसमाज की विभिन्न जरुरतों व समस्यायों को उभारता और समाधान तलाशता ब्लॉग

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आपने अपने आसपास ऐसे कई लोगों को देखा होगा, जो जानवरों को परेशान करते हैं या कुत्तों को बिना बात के पत्थर या लात मारते हैं। वहीं, ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो पानी बर्बाद करते हैं। कहने का अर्थ यह है कि कई लोगों को ये मुद्दे बहुत छोटे लग सकते हैं लेकिन इनसे हमारा भविष्य टिका हुआ है। पृथ्वी पर मौजूद जीव-जंतु, पेड़-पौधे ये ऐसी संपदा हैं, जिनसे हमारा अस्तित्व है। इनके खत्म होने से हमारे जीवन पर भी खतरा मंडराने लगेगा। ईको-सिस्टम को बनाए रखने के लिए पृथ्वी पर ये चीजें भी उतनी ही जरूरी है, जितना कि मानवजीवन। जैसे, आप अपने भविष्य को लेकर कितनी ही प्लानिंग करते हैं लेकिन क्या आपने सोचा है कि वो सारी प्लानिंग ऐसे ही रह जाएगी, अगर हमारे संसाधन खत्म हो जाते हैं। ऐसे में समय रहते इन चीजों को बचाने की जरूरत है। आज पूरी दुनिया ‘जैव विविधता दिवस’ मना रही है। ऐसे में एक जिम्मेदार इंसान होने के नाते आपका भी प्रकृत्ति की तरफ कोई कर्तव्य है. ऐसे में जानते हैं ऐसी कौन-सी चीजें है, जिनके खत्म होने से हमारा अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। इन चीजों को आज से ही बचाने की जरूरत है।

 

 

जीव-जंतु
बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें जानवरों से कुछ खास लगाव नहीं होता। उन्हें गलियों में घूमते हुए कुत्ते बुरे लगते हैं या उन्हें गाय-भैसों से परेशानी होती है। ऐसे में उन लोगों को यह बात समझने की जरूरत है कि जानवरों के रहने से ही ईको सिस्टम बना रह सकता है। वहीं, इस पृथ्वी पर उनका भी इतना ही अधिकार है, जितना की हमारा। जैसे अगर हम कीट-पतंगे खाने वाले सारे पक्षियों को मार देंगे, तो हमारी फसलें भी बच नहीं पाएंगी। 22 जनवरी 1970 को समुद्र में तीन मिलियन गैलेन तेल रिसाव हुआ था, जिससे 10,000 सीबर्ड, डॉल्फिन, सील और सी लायन्स मारे गए थे।

 

पेड़-पौधे
पिछले 20-30 दशकों से जनसंख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जिससे वन कटाव चौगुना हो गया है। ऐसे में आधुनिकता की आड़ में हमने बहुत कुछ खो दिया है। पेड़-पौधों की कमी के चलते प्रदूषण में काफी इजाफा हुआ है। जितनी तेजी से पृथ्वी से पेड़-पौधे कम हो रहे हैं, एक समय ऐसा आएगा जब पेड़-पौधे किताबों में ही सीमित रह जाएंगे।

 

 

पानी
बूंद-बूंद पानी की कीमत उन लोगों को देकर पता चलती है, जो पानी लाने के लिए मीलों का सफर करते हैं। महाराष्ट्र के लातूर में पानी की कमी की वजह से रोजाना झगड़े होते थे। झगड़े इतना खूनी रूप ले चुके थे कि वहां धारा-144 लगानी पड़ी थी। ऐसे में अगर आप या आपके आसपास कोई पानी बर्बाद करते हुए दिखाई दे, तो आपकी जिम्मेदारी है उसे रोकने की।

 

 

दूध
आपने ऐसी खबरें जरूर सुनी होगी, जहां भूखमरी है और बच्चे बिना अन्न के कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। वहीं, दूसरी तरफ कई टन दूध की बर्बादी आस्था के नाम पर की जाती है। ऐसे में आपका कर्तव्य है कि आप समय रहते इस अनमोल संपदा का महत्व समझें। …Next

 

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