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पति और पत्नी दोनों को पता होने चाहिए अपने ये 5 कानूनी अधिकार

Posted On: 7 Jun, 2019 Common Man Issues में

Pratima Jaiswal

जन-जन से जुड़ी दास्तांसमाज की विभिन्न जरुरतों व समस्यायों को उभारता और समाधान तलाशता ब्लॉग

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कहते हैं आप जानकारी और ज्ञान ऐसी चीजें हैं, जो कभी भी व्यर्थ नहीं होती। आपको रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनाने के लिए आपसे जुड़ी हुई बातों की जानकारी रखनी ही चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में ऐसा फैसला दिया है, जो आपसे जुड़ा हुआ है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि पति की कुल सैलरी का एक तिहाई हिस्सा पत्नी को गुजारा भत्ते के तौर पर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि आमदनी के बंटवारे का फॉर्म्युला तय है। इसके तहत नियम है कि अगर कोई और निर्भर नहीं हो तो पति की कुल सैलरी के दो हिस्से पति के पास और एक हिस्सा पत्नी को दिया जाएगा। कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता महिला की अर्जी पर फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया है कि महिला को पति की सैलरी से 30 फीसदी मिले। इस अधिकार के अलावा ऐसे और भी अधिकार है जिसके बारे में पति-पत्नी दोनों को जानकारी रखनी चाहिए।

 

 

 

पत्नी खुद को संभालने में सक्षम है, पति से गुजारे भत्ते की हकदार नहीं
फरवरी 2018 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुजारे भत्ते को लेकर अहम आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि पत्नी खुद को संभालने में सक्षम है तो वह पति से गुजारे भत्ते की हकदार नहीं है। इस फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने फाजिल्का निवासी महिला की याचिका को खारिज कर दिया।

 

दूसरी पत्नी, पहली के जीवित रहते गुजारा भत्ते की हकदार नहीं
फरवरी 2018 में ही एक अन्य फैसले के मुताबिक, पहली पत्नी से तलाक लिए बिना पुरुष से शादी करने वाली दूसरी पत्नी पहली के जीवित रहते गुजारा भत्ते पाने की हकदार नहीं है। हालांकि दूसरी पत्नी से पैदा हुई अविवाहित संतान भत्ते की हकदार जरूर होगी।

 

भले ही पत्नी के अप्राकृतिक संबंधों के आरोप साबित न हों, फिर भी तलाक मंजूर
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। फैसला पलटते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही पत्नी के अप्राकृतिक संबंधों के आरोप साबित न हों फिर भी परिस्थितियों को आधार बनाकर तलाक मंजूर किया जा सकता है।

 

 

पत्नी से मारपीट ही नहीं गुजारा भत्ता देने से इनकार करना भी क्रूरता
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा तलाक के लिए दाखिल की गई याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पत्नी से मारपीट ही नहीं बल्कि उसको गुजारा भत्ता देने से इनकार करना भी उसके साथ क्रूरता है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने महिला की तलाक के लिए दायर की गई याचिका को मंजूर करते हुए डिवोर्स डिक्री उसके हक में जारी कर दी। याचिका दाखिल करते हुए कपूरथला निवासी महिला ने कहा था कि उसका प्रेम विवाह 2005 में चंडीगढ़ में हुआ था।

 

पति भिखारी हो तो भी उसे पत्नी को हैसियत के अनुसार गुजारा भत्ता
पत्नी को गुजारा भत्ता देने पर स्थिति स्पष्ट करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी कर कहा है कि यदि पति भिखारी हो तो भी उसे पत्नी को उसकी हैसियत के अनुसार गुजारा भत्ता देना होगा। हाईकोर्ट का यह आदेश छात्र होने और परिजनों पर आश्रित होने की दलील देते हुए पत्नी को गुजारा भत्ता देने में सक्षम नहीं होने की पति की दलील को खारिज करते हुए आया है।…Next

 

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