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देश की वो जगह, जहां इस खौफ के कारण 150 साल से नहीं मनाई गई होली!

Posted On: 28 Feb, 2018 Common Man Issues में

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देश भर में होली को लेकर उत्‍साह है। लोग इस त्‍योहार को मनाने की तैयारियों में जुटे हैं। स्‍कूलों, कॉलेजों और गली-मोहल्‍लों में रंग-गुलाल उड़ने लगे हैं। देश के हर कोने में लोग होली के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। मगर देश में ही एक ऐसी जगह है, जहां होली को लेकर कोई उत्‍साह नहीं है। वहां मनहूसियत फैली है। यहां एक ऐसा खौफ है, जिसकी वजह से वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। आइये आपको बताते हैं कि देश में ऐसी कौन सी जगह है और किस डर से वहां के लोग होली नहीं मनाते।


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बोकारो के एक गांव में इस वजह से नहीं मनाते होली

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, झारखंड में बोकारो के कसमार ब्लॉक स्थित दुर्गापुर गांव ऐसी जगह है, जहां होली के दौरान मनहूसियत छाई है। यहां के लोग होली पर एक-दूसरे को रंग नहीं लगाते, क्योंकि उन्हें डर है कि ऐसा करने से गांव में महामारी और आपदा आएगी। ऐसी परंपरा पिछले 150 साल से भी ज्यादा समय से चली आ रही है। खांजो नदी के पास स्थित करीब 9 हजार आबादी वाले इस गांव के लोग होली न मनाने के पीछे की वजह बताते हैं कि उन्हें डर है कि अगर राजा के आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो उनका भूत गांव में कहर बरपा देगा।


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राजा को पसंद थी होली, लेकिन खुद लगाई रोक

दरअसल, यह किस्‍सा कुछ इस तरह है कि पहले दुर्गापुर में राजा दुर्गा प्रसाद का शासन था और उन्हें होली मनाना बेहद पसंद था। मगर राजा के बेटे की होली के दिन ही मौत हो गई। इसके बाद से जब भी गांव में होली का आयोजन होता, यहां कभी भयंकर सूखा या फिर महामारी का सामना करना पड़ता, जिससे गांव में कई लोगों की मौत हो जाती थी। गांव के बुजुर्ग एम महतो का कहना है कि अपनी मौत से पहले राजा ने आदेश दिया था कि उसकी प्रजा कभी होली न मनाए। संयोग से एक युद्ध के दौरान राजा की मौत भी होली के दिन हुई, इसलिए 150 साल से भी ज्यादा समय से गांव में होली नहीं मनाई जाती। गांव वाले इस आदेश को अभी भी मानते हैं और राजा के भूत का डर भी है।


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होली मनाई, तो हो गई मौत और फैली महामारी!

खबरों की मानें, तो होली के दिन रंग, संगीत और उत्सव की बजाय इस गांव की गलियां किसी बेजान जगह सी नजर आती है। गांव में राजा के भूत का डर इतना ज्यादा है कि आस-पास के गांव के लोग भी यहां के ग्रामीणों को होली पर न गुलाल लगाते हैं और न ही उन पर रंग फेंकते हैं। गांव के पुजारी का कहना है कि करीब 50-55 साल पहले दुर्गापुर में कुछ मछुआरे आए थे और उन्होंने परंपरा तोड़कर होली मनाई थी। इसके बाद उन सभी की मौत हो गई और गांव में महामारी फैल गई। कुछ गांववालों का कहना है कि समय के साथ यहां के लोग भी बदले हैं और अब यहां के युवा दुर्गापुर से बाहर जाकर होली मनाने लगे हैं। जो लोग होली मनाना चाहते हैं, वे गांव छोड़कर दूसरे गांव में होली मनाते हैं…Next


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