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क्‍या होता है संसदीय सचिव, जानें कैसे है ये लाभ का पद

Posted On: 22 Jan, 2018 Common Man Issues में

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आम आदमी पार्टी ने 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के मामले में हाईकोर्ट में दायर पुरानी याचिका वापस ले ली। पार्टी अब मंगलवार सुबह हाईकोर्ट में नई याचिका दाखिल करेगी। दरअसल, राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के फैसले पर मुहर लगाते हुए आप के 20 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया। राष्ट्रपति के फैसले के बाद स्थितियां बदल गईं, जिसकी वजह से पार्टी ने पुरानी याचिका वापस ली। आप के इन विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किए जाने को लेकर राष्‍ट्रपति ने यह फैसला दिया है। आइए आपको बताते हैं कि संसदीय सचिव क्या होते हैं और इनका काम क्या होता है।


arvind kejriwal


क्या होता है संसदीय सचिव

संसदीय सचिव का पद वित्तीय लाभ का पद है। वह जिस भी मंत्री के साथ जुड़ा होता है, उसके कार्यों में उसकी मदद करता है। इसके बदले उसे तनख्वाह, कार और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। एक तरह से संसदीय सचिव जिस मंत्री के साथ जुड़ा होता है, उसके लगभग सभी कार्यों में उसकी मदद करता है। मंत्री किसी भी व्यक्ति को अपना संसदीय सचिव नियुक्त कर सकता है।


ऐसे है लाभ का पद

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट यानी लाभ के पद के मामले को इस तरह समझ सकते हैं कि सरकार नियुक्ति को नियंत्रित करती है, व्यक्तियों को हटाने या उनके परफॉर्मेंस को नियंत्रित करती है तो यह लाभ का पद है। दूसरा अगर इस पद के साथ तनख्वाह या पारिश्रमिक जुड़ा हो, तो भी यह लाभ के पद का मामला बनता है। तीसरा जिस जगह यह नियुक्ति हुई है, वहां सरकार की ऐसी ताकत हो जिसमें फंड रिलीज करना, जमीन का आवंटन और लाइसेंस देना शामिल हो। चौथा अगर पद ऐसा हो कि वह किसी के निर्णय को प्रभावित कर सकता है, तो उसे भी लाभ का पद माना जाता है।


kejriwal


इस वजह से फंसे आप के 20 विधायक

यह बात सच है कि मंत्री अपने संसदीय सचिव के रूप में किसी भी व्यक्ति को नियुक्त कर सकता है। मगर यह बात भी सही है कि कोई विधायक या संसद सदस्य इस पद पर नहीं हो सकता है। क्योंकि विधायक या संसद सदस्य चुने जाने की योग्यता में एक शर्त यह भी है कि वह किसी लाभ के पद पर आसीन न हो। दिल्ली सरकार में किसी मंत्री का संसदीय सचिव बनने के साथ ही आम आदमी पार्टी के इन 20 विधायकों ने अपनी इसी योग्यता को खो दिया, इसलिए उनकी सदस्यता को रद्द करने की सिफारिश चुनाव आयोग ने की। हालांकि, आप ने अपने 20 विधायकों का बचाव करते हुए कहा कि उन पर लाभ के पद का मामला बनता ही नहीं है। पार्टी का तर्क है कि संसदीय सचिव बनाए गए इन विधायकों को इसके बदले न तो वेतन दिया गया और न ही कार या अन्य कोई सुविधा।


ये विधायक अयोग्य करार दिए गए

प्रवीण कुमार जंगपुरा से, शरद कुमार नरेला से, आदर्श शास्त्री द्वारका से, मदन लाल कस्तूरबा नगर से, शिव चरण गोयल मोती नगर से, संजीव झा बुराड़ी से, सरिता सिंह रोहतास नगर से, नरेश यादव मेहरौली से, राजेश गुप्ता वजीरपुर से, राजेश ऋषि जनकपुरी से, अनिल कुमार वाजपेयी गांधी नगर से, सोम दत्त सदर बाजार से, अवतार सिंह कालकाजी से, विजेंदर गर्ग विजय राजेंद्र नगर से, जरनैल सिंह तिलक नगर से, कैलाश गहलोत नजफगढ़ से, अलका लांबा चांदनी चौक से, मनोज कुमार कोंडली से, नितिन त्यागी लक्ष्मी नगर से और सुखवीर सिंह मुंडका से विधायक थे। इन सभी को अयोग्‍य करार दे दिया गया है…Next


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