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कुंवारापन एक मिथ्याभ्रम

Posted On: 10 Oct, 2010 Common Man Issues में

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यह कलियुग़ है, आज बिल्ली सौ चूहे खाने के बाद भी हज पर जाती है. ठीक उसी तरह जैसे आजकल लोग विवाह से पहले तो शारीरिक संबंध  का आनंद उठाने से जरा भी नहीं हिचकते, लेकिन जब उन्हें अपना जीवनसाथी चुनना हो तो उन्हें एक कुंवारा साथी चाहिए. फिर चाहे खुद शादी से पहले उसने कितनों का कौमार्य भंग किया हो. लेकिन यह रुढ़िवादी परंपरा कइयों के लिए सजा भी बन जाती है जैसे नीचे कुसुम के केस में हुआ.


rape_girlकुसुम मध्य प्रदेश की रहने वाली लड़की है. बचपन में उसके ही एक रिश्तेदार ने मात्र 14 साल की उम्र में उसका बलातकार कर दिया. दुनियां वालों की नजरों से बचने के लिए जैसे-तैसे उसके परिवार वालों ने 2-3 साल उसे अलग-अलग जगह रखा, कई मुसीबतें झेलीं फिर उसकी शादी का फैसला किया. लेकिन हालात और किस्मत के मारों को यहां भी निराशा ही मिली. शादी से पहले लड़के की मौसी ने लड़की का कौमार्य परीक्षण लेने की बात कही और परीक्षण में साफ हो गया कि कुसुम का कौमार्य पहले ही भंग था. इस वजह से यह रिश्ता तोड़ दिया गया. रिश्ता टूटने और परिवार वालों की आंखों की किरकिरी बन चुकी कुसुम ने एक रात अपने ही हाथों अपने जीवन के दीपक को बुझा लिया.


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21 शताब्दी में आधुनिक विश्व कहां है? आज भी लोगों को शादी में सबसे अहम बात लगती है लड़की का कौमार्य. लड़की जो शुरु से ही समाज के बंधनों में बंधने के लिए ही जैसे पैदा हुई हो. लड़का चाहे शादी से पहले कितने ही संबंध बनाए, कितने ही लड़कियों के कौमार्य को भंग करें, लेकिन जब खुद उसकी शादी हो तो लड़की ढूंढी जाए ऐसी जो कुंवारी हो.

दरअसल यह सब समाज का रचा प्रपंच है. आज का समाज भी पुरुष प्रधान ही है. आज भी शारीरिक संबंध के मामले में पुरुष ही पहल करते हैं. पुरुषों के लिए महिलाएं भोग का खिलौना हैं जिन्हें वह अपने तरीके से चलाना चाहते हैं.

लेकिन अब शिक्षा और आधुनिकता के इस युग में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं और वह भी शारीरिक संबंध का भरपूर मजा लेती हैं. उनका भी मानना है कि उनका साथी ऐसा हो जो पूर्ण रुप से कुंवारा हो. इसी के साथ अब महिलाएं भी विवाहेत्तर संबंधों को गलत नहीं मानतीं बल्कि इसे सहर्ष स्वीकार करती हैं. यानी अब हम नहीं कह सकते कि पुरुष ही सेक्स का भूखा है. लेकिन बात थी कौमार्य की.

090711140039_mass_dulhan226कौमार्य की महत्ता इतनी बढ़ गई है कि चीन और जापान जैसे देशों में हाइमेनोप्लास्टी नामक एक ऑपरेशन होता है जो कौमार्य के बारे में जानकारी देने वाली झिल्ली(हाइमेन) की मरम्मत कर उसे यथास्थान पर कर देता है. एशियाई देशों में जहां कौमार्य की इतनी मांग है वहां इसका होना लाजमी ही था.


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लेकिन क्या कौमार्य सिर्फ शारीरिक संबंध या सेक्स के समय ही क्षतिग्रस्त होता है? जी नहीं, यह तो हमारे रुढ़िवादी दिमाग की उपज है. हाइमेन का भंग होना प्रथम सम्भोग से ही नहीं होता बल्कि इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे कि साइक्लिंग करना, जिमनास्टिक्स, तैराकी जैसी शारीरिक क्रियाएं.

मान लीजिए किसी लड़की का रेप हो गया, तो क्या भविष्य में वह कभी शादी कर ही नहीं सकती. क्या मात्र कौमार्य ही पवित्रता की निशानी है. इस संदर्भ में प्राचीन महाभारत की एक चरित्र कुंती का उदाहरण बेहद दिलचस्प है जिनका सूर्य की किरणों से कौमार्य भंग हो गया था.

अगर भारत की बात की जाए तो मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में बाल विवाह इसीलिए अधिक प्रचलित थे ताकि लड़के को कुंवारी लड़की मिल सके. कौमार्य हर गुण और शिक्षा से ऊपर माना जाता है.

भारत में अगर किसी लड़की का शादी से पहले रेप, बलात्कार या किसी पुरुष से शारीरिक संबंध रहा हो और लड़के वाले को यह पता चल जाए तो यकीनन 90 फीसदी चांस है कि शादी होगी ही नहीं.

आज हम सभी काफी आगे बढ़ चुके हैं. विज्ञान के युग में अंधविश्वास की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. कौमार्य, कुंवारापन जैसे शब्द मन की पवित्रता को नहीं दर्शाते. लड़के या लड़की का चरित्र और व्यवहार ही उसकी पवित्रता का प्रमाण-पत्र होता है. लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि शादी से पहले शारीरिक  संबंध जायज है. वासना और शारीरिक  संबंध  की आंधी में बहने से अच्छा है अपनी इंद्रियों पर काबू रखें और एक खुशहाल जीवन बिताएं.


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