blogid : 316 postid : 1391006

कहीं सिरदर्द न बन जाए क्रेडिट कार्ड! मुश्किलों से बचने के लिए जान लें ये खास बातें

Posted On: 6 Sep, 2019 Common Man Issues में

Pratima Jaiswal

जन-जन से जुड़ी दास्तांसमाज की विभिन्न जरुरतों व समस्यायों को उभारता और समाधान तलाशता ब्लॉग

Social Issues Blog

970 Posts

830 Comments

शॉपिंग करने के लिए अकसर लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। इसका $फायदा यह है कि पर्स या वॉलेट में बहुत ज़्यादा रुपये रखने की टेंशन नहीं रहती। जब किसी सुविधा से $फायदा मिल रहा हो तो उससे होने वाले नुकसान पर भी गौर फरमाना ज़रूरी हो जाता है।
क्रेडिट कार्ड के बढ़ते चलन की वजह से बैंक और कई ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स विभिन्न पेशकश के ज़रिये अपने उपभोक्ताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले ऑफर्स के लालच में लोग बिना सावधानी बरते ही खरीदारी करने लग जाते हैं। आइए जानते हैं क्रेडिट कार्ड की कुछ शर्तों के बारे में –

 

 

देना पड़ता है शुल्क
क्रेडिट कार्ड मुफ्त मेंं नहीं मिलता है। बैंक या क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले संस्थान 200 रुपये में कार्ड देते हैं। उनमें सालाना शुल्क भी लगता है जो 299 रुपये से आठ हजार रुपये तक का होता है। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं जो एक निश्चित राशि खर्च करने की शर्त पर सालाना शुल्क नहीं लेती हैं।

 

जानें भुगतान का तरीका
क्रेडिट कार्ड से आप जो भी खरीदारी करते हैं, उसके बिल के भुगतान की समय सीमा तय होती है। चेक, नकद, ड्राफ्ट, ऑनलाइन बैंकिंग या डेबिट कार्ड से पेमेंट किया जा सकता है। नकद बिल जमा करने पर 100 रुपये का शुल्क लिया जाता है। शहर से बाहर का चेक होने पर या चेक रिटर्न होने की स्थिति में भी शुल्क देना पड़ता है।

 

कब नहीं लगेगा ब्याज
कार्ड पर 20 से 50 दिन की ब्याजमुक्त अवधि दी जाती है। इस अवधि में खर्च करने के बाद उसी दौरान कार्ड वापस कर देने पर ब्याज नहीं लगता है। उसके बाद तय शर्तों के मुताबिक 22 से 48 फीसदी सालाना ब्याज देना पड़ता है। क्रेडिट कार्ड पर ब्याज ज़्यादा लगता है क्योंकि उसे असुरक्षित लोन की श्रेणी में रखा गया है।

 

 

तय है क्रेडिट सीमा
क्रेडिट कार्ड में हर माह खर्च करने की एक सीमा तय होती है, जिसे क्रेडिट लिमिट कहते हैं। कुछ शर्तों के साथ क्रेडिट लिमिट से ज़्यादा खर्च करने का विकल्प होता है, पर वह बहुत महंगा पड़ता है। कार्ड धारक के फाइनेंशियल स्टेटस, खर्च करने के तरीके व अन्य मानकों के आधार पर कंपनियां एक समय अंतराल पर क्रेडिट सीमा का आकलन करती रहती हैं।

जब खो जाए कार्ड
कार्ड के खोने या चोरी हो जाने की स्थिति में उसकी सूचना तुरंत बैंक या कंपनी को दे कर कार्ड ब्लॉक करवा देना चाहिए। उसके बाद भी यदि कार्ड से कोई खरीदारी  होती है तो शिकायतकर्ता की जि़म्मेदारी नहीं होगी। अन्य परेशानी होने पर नज़दीकी पुलिस स्टेशन में भी रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं।
किसी भी सुविधा का लाभ उठाने से पहले उसकी छुपी हुई शर्तों के बारे में जान लेना फायदेमंद रहता है। कार्ड का इस्तेमाल सोच-समझकर करने से आप किसी तरह की मुसीबत में नहीं फंसेंगे।…Next

 

Read More :

सोशल मीडिया पर झूठे प्यार में फंसने के खिलाफ पुलिस ने छेड़ा अभियान, जानें क्या है रोमांस स्कैम

20 मौतों में से एक की वजह शराब, WHO की 500 पन्नों की रिपोर्ट में सामने आई ये बातें

2,874 बाल आश्रय गृहों में से सिर्फ 54 के मिले पॉजिटिव रिव्यू, NCPCR की रिपोर्ट सामने आई ये बातें

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग