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शरतचंद्र की ऐसी 5 कहानियां, जो भागती-दौड़ती जिंदगी को कुछ वक्त के लिए थाम देती हैं

Posted On: 15 Sep, 2017 Common Man Issues में

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‘इस धरती पर एक विशेष प्रकार के प्राणी हैं जो मानो फूस की आग हैं. जो अचानक ही जल उठते हैं और झटपट बुझ भी जाते हैं. उनके पीछे हमेशा एक आदमी रहना चाहिए, जो जरूरत के मुताबिक उनके लिए पानी व फूस जुटा दिया करे’.  ये चंद पक्तियां है शरतचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखी गई कहानी ‘बिलासी’ की. जिसमें इंसान के स्वभाव और समाज को बहुत बारीकी से उकेरा गया है. समाज के दोहरे मापदंड में उलझे कुछ खास चरित्रों के जीवन की कहानियों को शब्दों में पिरोने में उन्हें विशेष महारथ हासिल थी. शरतचंद्र के बारे में कहा जाता है कि उनकी कहानी के हर पात्र उनके असल जीवन से प्रभावित थे.

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देवदास, मंझली दीदी, चरित्रहीन, स्वामी, श्रीकांत, पाथेर ढाबी, स्वामी उनकी इन कहानियों के पात्र उनके असल जिंदगी के बहुत करीब रहे. उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कभी भी कुछ बनने की कोशिश नहीं की, जिंदगी उन्हें वक्त के साथ जिस तरफ भी दे गई, बस उन्होंने उसी तरफ चलना शुरू कर दिया. समाज के जर्जर रिवाजों से उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता था. उनके फक्कड़पन के कारण लेखक विष्णु प्रभाकर ने उनपर ‘आवारा मसीहा’ किताब लिखी. आइए, जानते हैं उनकी ऐसी कहानियां जिन्हें पढ़कर आपको वो कहानियां हकीकत लगेगी


1. देवदास

शरतचंद्र की लिखी देवदास किसी पहचान की मोहताज नहीं है. देवदास पर कई फिल्में बन चुकी है. बचपन के प्यार पर किस तरह समाज की बनाई जात-पात का असर पड़ता है और कैसे दो जीवन बर्बाद हो जाते हैं. शरतचंद्र की रचना से बखूबी पता चलता है. देवदास को उन्होंने 1901 में लिखा था, जिसे 1917 में छपवाया गया था.


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2. चरित्रहीन

बंगाली संस्कृति को समेटे इस उपन्यास को 1900 के शुरूआती सालों में लिखा गया था. इस उपन्यास में किसी महिला या पुरूष को समाज ‘चरित्रहीन’ किन पैमानों के आधार पर समझता है, उसमें एक कटाक्ष दिखाया गया है. समाज के दकियानूसी रिवाज किस तरह जिंदगी को प्रभावित करते हैं, सावित्री, किरणमयी, सुरबाला, सरोजनी किरदारों के इर्द-गिर्द कहानियों से पता चलता है.


3. परिणीता

परिणीता पर विद्या बालान, संजय दत्त और सैफ अली खान अभिनीत फिल्म भी बन चुकी है. परिणीता कहानी है बचपन के दो दोस्तों परिणीता और शेखर की. जिनकी प्रेम कहानी को अमीरी-गरीबी का दंश झेलना पड़ता है. लेकिन अंत में शेखर और परिणीता दोनों के बीच बनी दीवार को बनाकर एक हो जाते हैं.


4. बिलासी

उनकी लिखी कहानी ‘बिलासी’ में, सीधे सरल स्वभाव का लड़का मृत्युंजय कैसे अपने चाचा के हाथों से अपमानित होकर एकांत में रहना पसंद करने लगता है. उसे बेहतरीन ढंग से दिखाया गया है. मृत्युंजय की सेवा में दिन-रात में लगी गरीब सपेरे की बेटी बिलासी की प्रेम कहानी व सांप के काटने से मृत्युंजय की मौत से इस कहानी के दुखद अंत को दिखाया गया है.


5. मंझली दीदी

मंझली दीदी भी उनकी असल जिंदगी की एक किरदार थी, जिन्हें उन्होंने कहानी का रूप दे दिया. बचपन में उनके घर के पास एक विधवा स्त्री रहती थी, जिन्हें वो प्यार से दीदी कहते थे. उन दिनों विधवा स्त्री पर समाज की बहुत-सी बंदिशे थी. वो ज्यादा लोगों से मिलती-जुलती नहीं थी, धीरे-धीरे दीदी की मुलाकात एक रोज एक नौजवान से होती है. दोनों प्रेम करने लगते हैं. लेकिन वो नौजवान उस विधवा स्त्री को धोखा देकर चला जाता है, तब सभी उस स्त्री को नीच, चरित्रहीन कहने लगते हैं, इन सभी चीजों से परेशान होकर शरत बाबू की मुंहबोली दीदी आत्महत्या कर लेती है. जीवन की इस घटना ने उनपर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि उन्होंने कई सालों बाद ‘चरित्रहीन’ और ‘मंझली दीदी’ कहानियों में समाज से दुत्कारे हुए ऐसे ही पात्रों को जींवत कर दिया….Next



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