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शादी में कुंडली मिलान एक कुरीति या वैज्ञानिक रीति

Posted On: 14 Oct, 2011 Common Man Issues में

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kundali matching before marriageभारतीय परिदृश्य में विवाह के समय कुंडली मिलान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यह कहना भी गलत नहीं होगा कि वैवाहिक संबंध कुंडली के माध्यम से ही तय होते हैं. अगर संबंधित युवक-युवती के ग्रह-नक्षत्र एक-दूसरे से मेल नहीं खाते तो अभिभावक विवाह करने का निर्णय तक त्याग देते हैं. हालांकि कुछ लोग विवाह से पहले कुंडली मिलाना कोई आवश्यक नहीं समझते. उनका मानना है कि यह एक लंबे समय से चलती आ रही परंपरा है जिसका वर्तमान समय में कोई औचित्य नहीं है. इन रूढ़ हो चुकी परंपराओं का व्यक्ति के वैवाहिक जीवन से कोई लेना-देना नहीं हैं, विवाह पूर्णत: आपसी सामंजस्य और व्यवहार पर निर्भर करता है.


दोनों विचारधाराओं में अंतर जरूर है लेकिन इन्हें तब तक गलत नहीं कहा जा सकता जब तक हमारे पास इन्हें नकारने का कोई ठोस कारण ना हो. इनके विषय में किसी भी प्रकार की राय बनाने से बेहतर है कि पहले कुंडली मिलान से जुड़े विभिन्न पक्षों का आंकलन अपनी समझ के अनुसार किया जाए.


कुंडली मिलान एक कुरीति

रीति-रिवाज या मान्यताएं तब तक नकारात्मक या सकारात्मक नहीं कहे जा सकते जब तक उनका अनुसरण व्यक्ति के हित में होता हैं. हां, लेकिन अगर यही परंपराएं और पारिवारिक मान्यताएं बिना सोचे-समझे अपनाई जाएं तो नि:संदेह एक कुरीति को विकसित कर सकती हैं. अकसर देखा जाता है कि अभिभावक अपने बच्चे के लिए उपयुक्त और योग्य साथी से कहीं ज्यादा महत्व एक ऐसे व्यक्ति को देते हैं जिसकी कुंडली उनकी संतान के साथ मिल जाती है. इसी चक्कर में माता-पिता किसी नौसिखिए ज्योतिषी के भ्रम जाल में फंसकर अपने बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर बैठते हैं. आमतौर पर सभी लोगों को ज्योतिष विद्या का ज्ञान नहीं होता इसीलिए वे ज्योतिषियों के कहे अनुसार चलते हैं. इसी मानसिकता का परिणाम है कि आज हर गली-नुक्कड़ पर खुद को ज्योतिष विद्या के जानकार कहने वाले लोग मिल जाते हैं. अभिभावक अपनी समझ और अनुभव को बिलकुल दरकिनार कर देते हैं और उनके बहकावे में आ जाते हैं. हद तो तब हो जाती है जब उन्हें अपनी मांगलिक संतान के लिए जीवन-साथी का चुनाव करना पड़ता है. वे बिना किसी ठोस जानकारी और कुंडली के परिणामों के जो जैसा कहता है वैसा-वैसा करते रहते हैं. समय के साथ-साथ संतान की आयु बढ़ती रहती है, लेकिन वह मात्र कुंडली मिलान को लेकर ही चिंतित रहते हैं. प्रौद्योगिकी के इस युग में जब हर घर में कंप्यूटर आ चुका है तो ऐसे में कुंडली की समस्या अत्याधिक विकट बन पड़ी है. जैसे ही कोई रिश्ता आता है तो अभिभावक सबसे पहले कंप्यूटर के जरिए कुंडली मिलवाते हैं. आगे का निर्णय कुंडली के मिलने या ना मिलने पर ही निर्भर करता है. लेकिन वे इस ओर ध्यान नहीं देते कि व्यक्ति की कुंडली और उसके ग्रह-नक्षत्रों के लिए कंप्यूटर पर भरोसा करना कितना सार्थक है. ऐसी परिस्थितियों में नि:संदेह कुंडली मिलान को एक बेहद संकीर्ण और रुढ़ परंपरा कहा जा सकता है.


kundaliकुंडली मिलान का वैज्ञानिक पक्ष

ऐसा माना जाता है कि प्रत्येक जीवित व्यक्ति का अपना उर्जा क्षेत्र होता है, जिन्हें किसी ना किसी ग्रह के द्वारा नियंत्रित किया जाता है. किसी ग्रह या राशि के द्वारा परिचालित होने के कारण यह ऊर्जा क्षेत्र अन्य क्षेत्रों के साथ मेल नहीं बैठा पाते. उदाहरणस्वरुप, जल और अग्नि का एक दूसरे के साथ मेल नहीं हो सकता, क्योंकि पानी आग को बुझा सकता है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह काफी मजबूत स्थिति में होता है तो वह बहुत उत्साही और तीव्र स्वभाव का होता है. ऐसे में अगर उसका विवाह किसी ऐसे व्यक्ति से किया जाए जिसका मंगल कमजोर है तो संभवत: मजबूत मंगल वाले व्यक्ति को हमेशा यही लगेगा कि उसका साथी काफी सुस्त तथा अनुत्साहित है. इसी तरह कमजोर मंगल वाला अपनी साथी की गति तथा तीव्रता के कारण आजीवन दबाव महसूस करता रहेगा. ऐसे वैवाहिक जोड़ों को आदर्श जोड़ा नहीं कहा जा सकता. इसके अलावा संतान के विषय में व्यक्ति की कुंडली बहुत कुछ कहती है. ऐसे में कुंडली मिलान का महत्व अत्याधिक बढ़ जाता है.



विवाह के पश्चात जब पति-पत्नी एक दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पित हो जाते हैं तो बेहतर है उनके सफल भविष्य की कामना करते हुए कुंडली के गुण-दोषों को भी परख लिया जाए. ताकि विवाह के पश्चात उनमें टकराव की स्थिति पैदा ना हो. लेकिन इन पर विश्वास करने से पहले अपनी सूझ-बूझ का प्रयोग करना भी बेहद आवश्यक है. ताकि किसी के बहकावे में आकर आप अपनी संतान के जीवन, उसकी आकांक्षाओं के साथ खिलवाड़ ना कर बैठें.

व्यावहारिक तौर पर ज्योतिष एक ऐसा विज्ञान है जो व्यक्ति के जीवन में होने वाली हलचलों को पहले ही भांप लेता है. बशर्ते कुंडली किसी विद्वान और विश्वसनीय ज्योतिषी को दिखाई जाए.

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