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सोशल नेटवर्किंग की राह में धोखों की दुकान

Posted On: 25 Jun, 2010 Common Man Issues में

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सोशल मीडिया ने संसार के हर हिस्से में अपनी छाप छोड़ दी है. संसार अब छोटे से ट्विटर में समाने लगा है तो फेसबुक की फेम ने सोशल मीडिया के क्षेत्र में हर तरफ जलवा ही कायम कर दिया है. पहले तो सिर्फ ऑरकुट नाम का एक खलीफा था लेकिन आज उसकी तरह और उससे कई बेहतर नेटवर्किंग साइट आ चुकी हैं. अब न सिर्फ आप अपनी दिनचर्या लोगों के साथ बांट सकते हैं बल्कि अपने से संबंधित हर छोटी-बड़ी चीज यहां डाल सकते हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस काम के लिए आपका व्याकरण या अंग्रेजी आना अब जरुरी नहीं रह गया है.

social-networking-logos3सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने दुनिया को इतना छोटा बना दिया है कि अभी आप दिल्ली में रह कर ऑस्ट्रेलिया के अपने दोस्त से रियल टाइम चैट कर सकते हैं. अब हाल ही में एक वाकया सामने आया कि एक उपभोक्ता ट्विटर पर अपने दोस्तों के साथ एक लड़की को तलाश रहे थे और वह लड़की उसी फ्लाइट में उस लड़के के बगल में बैठी थी. और लड़के ने शरारती अंदाज में अपनी सीट का नम्बर भी अपलोड कर दिया था, अब ऐसे में बेचारी लड़की को कइयों की शक्की निगाहें झेलनी पड़ीं. हालांकि बाद में कई ऑनलाइन यूजर ने इसका विरोध किया.

teens-social-networkingसंसार सोशल नेटवर्किंग का

एक नए किस्म के सामाजिक संसार की रचना सोशल नेटवर्किंग साइट पर हो रही है. किंतु इनमें से ज्यादातर के संबंध हल्के और बिना किसी मूल्य पर टिके होते हैं.  सोशल नेटवर्क के लोगों के संबंधों में विश्वास का अभाव है.  यहां ऐसे लोगों के समूह हैं जिनके आपसी राय मिलते-जुलते हैं. यहां पर लोग आपसी सहमति तो रखते हैं लेकिन विश्वास करना नहीं जानते. यही वजह है कि इन्हें कारगर नहीं माना जाता.

माना कि विज्ञान के इस दौर में यह सोशल नेटवर्किंग साइट बेहद नवीनतम है और इनका उपयोग हर किसी को आना चाहिए, लेकिन इसमें अपनी निजता खोने वाला कोई काम नहीं करना चाहिए.

social-networking-stockxpertcom_id28512311_jpg_4438588357c41d17db0a53d0f34e3c34क्या यह सही है

सोशल नेटवर्किंग सही है या गलत इसका फैसला तो हमारे हाथों में ही है. सोशल नेटवर्किंग के जरिए आप अपने सामाजिक दायरे को न सिर्फ बढ़ा सकते हैं बल्कि खुद को संसार से जोड़ भी सकते हैं. अकेलेपन और तन्हाई की तो यह अचूक दवा बन गयी है. चाहे आप फेसबुक का इस्तेमाल करें या ऑरकुट का हर जगह आपको मनोरंजन के साधन मिलेंगे. तो यह है न आपके लिए फायदेमंद.

आज के तेज समय में आपको हर समय अपने दोस्तों के पास रहने का मौका नहीं मिलता ऐसे में सोशल नेटवर्किंग साइट्स आपकी काफी मदद करते हैं. आज हम अपने क्षेत्र से ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व से जुड़ना चाहते हैं, ऐसे में यह काफी मददगार साबित होता है.

b1क्या बुराई है सोशल नेटवर्किंग में

जब भी किसी चीज की अति होती है तो वह नुकसानदायक बन जाता है. चाहे शराब हो या शवाब अति हर चीज की बुरी है. जब तक सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल एक सीमा में किया गया तब तक तो ठीक था लेकिन जैसे ही लोगों ने इसका इस्तेमाल अधिक करना शुरु किया इसके दुष्प्रभाव सामने आने लगे. लोगों की दूसरे के बारे में जानने की लालसा और बाजारवाद के इस दौर में खुलेपन की कीमत बहुत बड़ी साबित हुई है.

आए दिन यह खबर सुनने में आती है कि सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से फलां अपराध हुए आदि आदि…. इन सब के पीछे हाथ हम जैसों का ही है, हमारी गलतियों की वजह से ही दूसरे हमारा फायदा उठाते हैं. बिना जाने किसी से दोस्ती करना और प्रेम में फंसना न जाने कितनी लडकियों की जिंदगी बर्बाद कर चुका है. विदेशों में तो सोशल नेटवर्किंग साइट को सेक्स हासिल करने का आसान तरीका माना जाता है. जब हम हर बात इन साइट्स पर खुद ही बता डालते हैं तो गोपनीयता की बातें खुद नहीं करनी चाहिए.

साथ ही सोशल नेटवर्किंग साइटस पर काम करने की आदत एक लत बन जाती है. एक अनुमान के मुताबिक औसतन हर चौथा व्यक्ति जो सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल करता है , वह अपने दिन का तकरीबन चार से पांच घंटे इसे देता है ऐसे में यह देश की अर्थव्यवस्था पर भी खतरा उत्पन्न करता है. अधिक देर एक ही जगह बैठ कर काम करने से कई रोगों की उत्पत्ति भी होती है.

D1208WB1तो क्या इसे बंद होना चाहिए

अब यह आवाज उठने लगी है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स को बंद कर देना चाहिए और अगर यह मुमकिन नहीं तो कम से कम शैक्षिक और कार्यस्थल पर तो इसका इस्तेमाल बंद करना चाहिए.

अगर हम भारत जैसे देश की बात करें जहां के मौलिक अधिकार में ही भावनाओं और शब्दों की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रावधान है तो क्या यहां इसे बंद किया जा सकता है? कहीं इस पर पाबंदी लगाने से भारत के इस मौलिक अधिकार का हनन तो नहीं होगा.

अभिव्यक्ति और स्वतंत्रता का सवाल

सोशल नेटवर्किंग साइट्स के आने से सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि कहीं विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी अराजकता को जन्म तो नहीं देगी. और अगर ऐसा है तो इस आजादी की परिभाषा बदलें या सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल. विचारों की अभिव्यक्ति तो होनी चाहिए लेकिन यह इतना अराजक भी नहीं होना चाहिए कि किसी और की निजता भंग हो.

327382_f520क्या है उपाय

अगर आप खुद दायरे के अंदर रहेंगे तो यह मुमकिन ही नहीं कि कोई आपकी निजता को भंग कर दे. फिर भी निम्न बातों का ध्यान रख कर आप सोशल नेटवर्किंग के धोखे से बच सकते हैं:

1.  अपनी गोपनीय बातें किसी को न बताएं. अपना पता, फोन नम्बर, पासवर्ड, फोटो आदि भूल कर भी किसी अंजान को इंटरनेट पर न दें.

2.  पोर्न के इस्तेमाल से बचें. अक्सर यह देखा जाता है कि पोर्न साइट्स अपने यूजर को मायाजाल में फंसा लेती है जिसका नुकसान आपको भी उठाना पड़ सकता है.

3.  फोटो अपलोड करते समय सावधानी बरतें. अपनी निजी फोटो और खासकर महिलाओं को तो अपनी फोटो डालते समय सावधान रहना चाहिए क्योंकि फोटो के साथ छेडछाड़ को मुश्किल काम नहीं होता.

4.  एक सीमा में ही दोस्ती रखें. अक्सर यह देखा जाता है कि इन साइट्स पर दोस्ती को युवा वर्ग प्यार मान बैठता है जो अक्सर धोखा साबित होता है.

5.  एक समय सारणी बना कर रखें ताकि आपका काम इन साइट्स की वजह से बर्बाद न हो.

6.  अपने जान-पहचान वालों को ही दोस्त बनाएं हालांकि यह मुमकिन नहीं.

तो यह मात्र कुछ सुझाव थे यह आपके हाथ में है कि आप किस तरह इनका इस्तेमाल करते हैं क्योंकि सोशल नेटवर्किंग साइट्स को बंद करना तो मुमकिन नहीं, मगर अपने पर काबू रखना आसान है.

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