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कभी सड़कों पर मां के साथ पापड़ बेचते थे आनंद, अब ऋतिक निभाएंगे इनका किरदार

Posted On: 7 Feb, 2018 Common Man Issues में

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ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो गरीब बच्चों के सपनों को पूरा करने में अपना जीवन लेते हैं पटना के आनंद कुमार ऐसे ही व्यक्ति हैं आज दुनिया आनंद कुमार को ‘सुपर 30 संस्था के संस्थापक के रूप में जानती है। हर साल उनकी संंस्था से निकले बच्चे विश्व में नाम कमाते हैं, लेकिन उनकी यह सफलता इतनी आसान नहीं थी। उन्होंने खुद को इस काबिल बनाने के लिए बहुत मेहनत की है, आइए जानते हैं उनकी प्रेरणादायक कहानी के बारे में।


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हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़े हुए हैं आनंद कुमार

बिहार के पटना से ताल्लुक रखने वाले आनंद कुमार के पिता पोस्टल डिपार्टमेंट में क्लर्क की नौकरी करते थे। घर की माली हालत अच्छी न होने की वजह से उनकी पढ़ाई हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल में हुई जहां गणित के लिए लगाव हुआ था। यहां उन्होंने खुद से मैथ्स के नए फॉर्मुले ईजाद किए।

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मां के साथ पापड़ बेचते थे

पिता के जाने के बाद सारा दारोमदार आनंद पर ही था। उस दौरान उन्होंने रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमैटिक्स नाम का एक क्लब खोला था। यहां वे अपने प्रोफेसर की मदद से मैथ के छात्रों को ट्रेनिंग दिलाते थे और एक भी पैसा नहीं लेते थे। दिन में वह क्लब में पढ़ाते और शाम को अपनी मां के साथ पापड़ बेचा करते थे।


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कैंब्रिज यूनिवर्सिटी जाने वाल थे आनंद कुमार

ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने नंबर थ्योरी में पेपर सब्मिट किए जो मैथेमेटिकल स्पेक्ट्रम और मैथेमेटिकल गैजेट में पब्लिश हुए। इसके बाद आनंद कुमार को प्रख्यात कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से एडमीशन के लिए बुलाया गया लेकिन पिता की मृत्यु और तंग आर्थिक हालत के चलते उनका सपना साकार नहीं हो सका।


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ऐसे पड़ी सुपर 30 की नींव

आनंद जब रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमैटिक्स में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना शुरू कर दिया था। दो बच्चों से अब वहां आने वले स्टूडेंट्स की संख्या 500 तक हो गई थी। एक दिन एक लड़के ने आनंद से कहा कि सर हम गरीब हैं अगर हमारे पास फीस ही नहीं है तो देश के अच्छे कॉलेजों में पढ़ सकते हैं और तब जाकर 2002 में आनंद ने सुपर 30 की नींव रखीं।


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केवल गरीब बच्चों को देते हैं शिक्षा

2002 में जब आनंद ने इसकी शुरुआत की थी तो उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके 30 में से 18 बच्चे आईआईटी प्रवेश परीक्षा में अव्वल आएंगे। उसके बाद 2004 में 30 में से 22 बच्चों और 2005 में 26 बच्चों को सफलता मिली। उनकी इस सफलता का डंका पूरे देश में बजा और लोगों ने उनके जज्बे को खूब सराहा। आनंद ने एक इंटरव्यू में कहा कि, ‘वह गरीब बच्चों को इसलिए शिक्षा देते हैं क्योंकि वह गरीब हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वो शहरों में जाकर लाखों की फीस दे सकें, वह उनकी मेहनत और लगन को सहारा बनाते हैं और तभी ये ‘सुपर 30’ इस मुकाम पर पहुंचा है।


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विद्यालय खोलने का है सपना

आनंद कहते हैं उनकी मेहनत ने कई गरीब बच्चों का सपना पूरा किया है अब वह अपनी इस सफलता को और बढ़ाना चाहते हैं। अब उनका सपना एक विद्यालय खोलने का है। उनका कहना है कि, गरीबी के कारण कई बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं और आजीविका कमाने में लग जाते हैं। इसलिए वह ऐसा स्कूल खोलेंगे जहां हर विषय की पढ़ाई होगी।


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डिस्कवरी बना चुका है डॉक्युमेंट्री

डिस्कवरी चैनल ने आनंद कुमार पर एक डाक्यूमेंट्री भी बनाई है। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स में भी इनकी बायोग्राफी प्रकाशित हो चुकी है। आनंद कुमार को प्रो यशवंतराव केलकर पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका हैं। आनंद कुमार को बिहार गवर्नमेंट ने अब्दुल कलाम आजाद शिक्षा अवार्ड से भी नवाजा है।


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जल्द जीवन पर आएगी फिल्म


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पिछल साल ही आनंद कुमार अमिताभ के शो कौन बनेगा करोड़पति में नजर आए थे, इस दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ अहम बातें बताई थी। अब आंनद कुमार पर जल्द ही फिल्म बनने वाले ही जिसकी शूटिंग शुरु हो चुकी है। फिल्म में आनंद कुमार का किरदार मशहूर अभिनेता ऋतिक रोशन निभाएंगे।…Next

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