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समाज ने किया बहिष्कार, परिवार ने भी नहीं दिया साथ लेकिन फिर भी इन दोनों ने पेश की एक नई मिसाल

Posted On: 10 Feb, 2016 Common Man Issues में

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‘यार, मुझे उसकी छोटी नाक पंसद नहीं थी इसलिए रिजेक्ट कर दिया. बेशक वो अच्छी दिखती थी, स्वभाव अच्छा था. लेकिन तुम तो जानते ही हो कि मुझे हर चीज में ‘परफेक्शन’ चाहिए.’ किसी को रिजेक्ट करने की ऐसी ही कितनी वजह, हमें अपने आसपास सुनने को मिल जाएगी. क्योंकि बदलाव का असर चीजों के साथ इंसान के दिल- दिमाग पर भी पड़ा है. वहीं बात करें प्यार-मोहब्बत या रिलेशनशिप की, तो मॉर्डन लाइफस्टाइल में लोग अपने लिए परफेक्ट पार्टनर की तलाश करते हैं. ऐसे में एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करने की सोच कहीं पीछे छूटती हुई दिखाई देती है. आज के समाज का ये कड़वा सच है कि जो गुण किसी इंसान में खुद नहीं होते, वो वहीं बात या गुण अपने पार्टनर में तलाश करता है.


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जैसे कोई लड़का खुद सांवला होने पर भी अपनी जीवनसाथी के रूप में, गोरी लड़की को ही चाहता है. लेकिन इन सब बातों से परे हमारे समाज में कुछ मिसालें ऐसी भी हैं जिन्होंने ‘स्टीरियोटाइप’ को चुनौती दी है. साथ ही इन कहानियों ने समाज को एक नई सोच भी दी है. ऐसी ही एक लव स्टोरी है प्रमिला और विजय की. जिन्होंने अपने मजबूत इरादों से न सिर्फ एक दूसरे का साथ मुश्किलों में भी निभाया बल्कि समाज द्वारा बहिष्कार करने पर भी हिम्मत नहीं हारी. दरअसल प्रमिला को जन्म से ही पोलियो था और उनके पति विजय भी पोलियो से ग्रस्त थे. दोनों की पहली मुलाकात एक अस्पताल में हुई थी. जहां प्रमिला रेगुलर चेकअप के लिए आया करती थी. उसी अस्पताल में विजय वॉर्ड बॉय की नौकरी करता था. अपनी पहली मुलाकात के बारे में विजय बताते हैं ‘मैंने जब उसे पहली बार देखा तो मुझे वो बहुत अच्छी लगी. लेकिन मुझमें उससे बात करने की हिम्मत नहीं थी. वो सप्ताह में दो बार अस्पताल आती थी. धीरे-धीरे मेरी बातचीत उससे होने लगी.


vijay and pramila

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उसकी बातों से लगता था कि वो भी मुझे पंसद करती है. मुझे पता चला कि वो उस समुदाय से है जिसे समाज निचले तबके का दर्जा देता हैं. जबकि मैं राजपूत समुदाय था. लेकिन मैं दुनिया की बनाई इस दकियानूसी सोच की वजह से अपने कदम पीछे नहीं हटाना चाहता था’. दूसरी ओर प्रमिला कहती हैं ‘मेरे और उनके घरवालों को हमारी अलग-अलग जाति से एतराज था. उन लोगों ने हमें कई बार धमकी दी. घर से निकाल दिए गए. हम शादी करके अलग रहने लगे. लेकिन हमने एक दूसरे को अपनाने की कसम ले रखी थी. कुछ सालों बाद हमारी जीत हुई और अनगिनत लड़ाई- झगड़ों के बाद हमारे परिवारवालों ने हमें अपना लिया’…Next


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