blogid : 316 postid : 1390292

दिल्ली के कई क्षेत्रों में बेंजीन का स्तर दुगुना, जानें क्या है बेंजीन और इसके खतरे

Posted On: 12 Dec, 2018 Common Man Issues में

Pratima Jaiswal

जन-जन से जुड़ी दास्तांसमाज की विभिन्न जरुरतों व समस्यायों को उभारता और समाधान तलाशता ब्लॉग

Social Issues Blog

904 Posts

830 Comments

दिल्ली की हवा एक बार फिर से जहरीली हो गई है। ऐसे में लोग सर्दी और प्रदूषण से निपटने की तैयारी करते हुए घर से बाहर निकल रहे हैं।
अगर आपके घर में एयर प्यूरीफायर नहीं है और इंडोर पल्यूशन भी है, तब भी बाहर निकलने से अधिक सेफ आप घर पर ही हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिल्ली की हवा में बेंजीन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का बढ़ा हुआ स्तर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा हैं। ये पीएम 2।5 से भी कहीं ज्यादा बुरा असर डाल रही हैं।

 

 

दिल्ली की इन जगहों पर ज्यादा खतरा
दिल्ली के ज्यादातर क्षेत्रों में बेंजीन का स्तर दो से तीन गुना ज्यादा है। बेंजीन की मात्रा सबसे अधिक 14।5, जहांगीरपुरी में 13।6, वजीरपुर में 12।9, अशोक विहार में 16।3, रोहिणी में 9।2, सोनिया विहार में 15।2, पूंठखुर्द में 10।7 एमजीसीएम है। जबकि इसकी तय मात्रा सिर्फ 5 एमजीसीएम है।
अगर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की बात करें, तो पंजाबी बाग में 154।9, रोहिणी में 167।7, सोनिया विहार में 143।4, नेहरू नगर में 135।5 एमजीसीएम रहा। जबकि इसकी तय मात्रा 80 एमजीसीएम है। इसके अलावा, पीएम 2।5 का स्तर भी वजीरपुर में 574, अशोक विहार में 575, ओखला फेज-टू में 554, रोहिणी में 642, विवेक विहार में 520 एमजीसीएम दर्ज हुआ, जबकि इसकी सामान्य मात्रा महज 60 एमजीसीएम है।

क्या है बेंजीन
यह एक रंगहीन या हल्के पीले रंग का रसायन है, जो कच्चे तेल, गैसोलिन और सिगरेट के धुएं से पैदा होता है। यह वाष्पीकृत होकर हवा में घुल जाता है। कुछ उद्योगों में बेंजीन को अन्य रसायनों के निर्माण के लिए भी उपयोग किया जाता है।

 

 

 

कैसे बढ़ता है बेंजीन
गाड़ियों के धुएं, गैस स्टेशन व उद्योगों और तंबाकू।
घर में अमूमन बेंजीन का स्तर अधिक होता है, जिसका कारण हैं ग्लू, पेंट, डिटरजेंट।
इंडस्ट्रीज में काम करने वाले लोग इसके संपर्क में सबसे अधिक आते हैं।

 

बेंजीन का असर
सांस के जरिए इसकी अधिक मात्रा शरीर के भीतर जाने के कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों के भीतर असर दिखने लगता है। जैसे थकान, चक्कर आना, दिल की धड़कनें बढ़ना, सिरदर्द, संभ्रम की स्थिति, बेहोशी और यहां तक कि मौत भी।
लगभग सालभर या इससे ज्यादा समय तक इसके संपर्क में आना बोन मैरो पर असर डालता है। जिसके कारण लाल रक्त कणिकाएं घट जाती हैं और एनीमिया हो जाता है।
महिलाओं में प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है। मासिक धर्म की अनियमितता और ओवरी का आकार भी घट जाता है…Next

 

Read More :

नए रंग-रूप में आया दिल्ली मेट्रो कार्ड, जानें नए कार्ड में क्या है खास बात

इंटरनेट पर करते हैं ये काम, तो इन 5 तरीकों साइबर क्रिमिनल्स बनाते हैं आपको शिकार

क्या है स्मॉग, इन तरीकों से कर सकते हैं इससे बचाव

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग