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जिंदगी में क्यों होने लगती है कभी-कभी बोरियत! इन वजहों पर ध्यान देकर इसे कर सकते हैं कम

Posted On: 18 Sep, 2019 Others में

Pratima Jaiswal

जन-जन से जुड़ी दास्तांसमाज की विभिन्न जरुरतों व समस्यायों को उभारता और समाधान तलाशता ब्लॉग

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सारा काम खत्म हो गया, डिनर के लिए बाहर जाने का मन नहीं है, इस सप्ताह कोई अच्छी फिल्म भी रिलीज नहीं हुई, समझ नहीं आ रहा क्या करें, कहां जाएं? आपको भी अपने आसपास अक्सर ऐसी बातें सुनने को मिलती होंगी। ऐसा सोचने या कहने का सीधा मतलब यही है कि व्यक्ति अपनी वर्तमान स्थिति से खुश नहीं है और इसी वजह से उसे बोरियत महसूस हो रही है-

 

 

समस्या की जड़ें
जब कभी जीवन में ठहराव आने लगता है तो इससे बोरियत पैदा होती है। आज की तेज र$फ्तार जिंदगी ने इंसान को काफी हद तक वर्कोहॉलिक बना दिया है। अब लोग दिन-रात मशीन की तरह काम में जुटे रहते हैं। जैसे ही उनका कार्य पूरा हो जाता है, उन्हें खालीपन महसूस होने लगता है। आज लोगों के सामने मनोरंजन के विकल्पों का बड़ा अंबार है, फिर भी वे बोरियत से परेशान रहते हैं। सीमित साधनों के बीच संतुष्ट और खुश रहना आसान है, लेकिन ढेर सारे विकल्प हमें केवल भ्रमित करते हैं और अंतत: इनकी वजह से बोरियत पैदा होने लगती है। नियमित दिनचर्या का न होना भी इसका बहुत बड़ा कारण है।

 

बोर होते बच्चे
आजकल बच्चों को भी बहुत जल्दी बोरियत महसूस होती है। पुराने समय में बच्चे एक ही खिलौने से महीनों तक खेलते थे, पर आज के बच्चे दो ही दिनों के बाद अपने लिए नए खिलौने की मांग करने लगते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अब पेरेंट्स के पास बच्चों के लिए समय नहीं है। इस समस्या से बचने के लिए वे छोटी उम्र से ही बच्चों को उनकी मनमर्जी का काम करने की छूट दे देते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों की फ्रस्ट्रेशन टालरेंस खत्म हो रही है। अगर माहौल उनकी पसंद के प्रतिकूल हो तो वे पांच मिनट में ही ऊबने लगते हैं। कभी-कभी बोरियत होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह स्थायी मनोदशा बन जाए तो चिंताजनक है। बोरियत नकारात्मक विचारों की जड़ है। इससे व्यवहार में चिड़चिड़ापन आने लगता है। कार्यक्षमता और रिश्तों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से व्यक्ति को डिप्रेशन भी हो सकता है।

 

कैसे करें बचाव
खुद को बोरियत से बचाने के लिए जीवन में संतुलन बेहद जरूरी है। जिस तरह वर्कोहॉलिक होना नुकसानदेह है, उसी तरह ज्य़ादा आरामतलबी और मनोरंजन की अधिकता भी व्यक्ति को बहुत जल्दी बोर कर देती है। इन दोनों स्थितियों से बचते हुए दिनचर्या में संतुलन बनाए रखना चाहिए। जिस तरह शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए आप एक्सरसाइज करते हैं या जिम जाते हैं। ठीक उसी तरह दिमा$गी सेहत का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी। इसके लिए $फुर्सत के पलों में टीवी देखने के बजाय कोई अच्छी किताब पढ़ें, अपने करीबी लोगों से बातचीत करें या बागवानी करें। कोई भी ऐसी गतिविधि, जिसमें व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक ऊर्जा खर्च होती हो, वह उसे बोरियत से बचाती है। ऐसी समस्या से बचने के लिए सहनशीलता की आदत विकसित करना बहुत जरूरी है। खास तौर से बच्चों को शुरुआत से ही धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करना और प्रतिकूल स्थितियों में शांत रहना सिखाना चाहिए, ताकि बड़े होने के बाद उन्हें ऐसी समस्या न हो।

 

अच्छी है थोड़ी बोरियत
अमेरिका स्थित टेक्सास यूनिवर्सिटी में वर्षों से इस विषय पर गहन शोध चल रहा है। शोधकर्ता हीदर लेंच कहती हैं कि बोरियत हमेशा नुकसानदेह नहीं होती, बल्कि ऐसी मनोदशा हमें पुराने खांचों में पड़े रहने से रोकती है। इससे व्यक्ति की कल्पना शक्ति और रचनात्मक कौशल में वृद्धि होती है। बोरियत इंसान को कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित करती है। हीदर का मानना है कि जब बोरियत हमें नुकसान पहुंचाने लगे तो इससे डरने के बजाय हमें इसका आनंद उठाना चाहिए। मिसाल के तौर पर जब आपकी कार ट्रैफिक में फंस जाए बोरियत से खीझने के बजाय म्यूजिक सिस्टम ऑन करके मनपसंद संगीत का आनंद लें।…Next

 

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