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गुनगुनायें (CONTEST)

Posted On: 4 Jan, 2014 Others में

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vaidya surenderpal

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*गीत प्यारा गुनगुनायें*
.
प्रकृति के साथ हिलमिल,
गीत प्यारा गुनगुनायें।
.
भोर की बेला सुनहरी,
प्राणियों ने चक्षु खोले।
हर तरफ हैं स्वर्ण किरणें,
होँठ पर प्रिय सुर अबोले।
.
पाखियों के झुंड मिलकर चहचहायें।
प्रकृति के साथ हिलमिल,
गीत प्यारा गुनगुनायें।
.
ओस की बूँदे टपकती,
मखमली सी घास पर।
और चूल्हों का धुआँ,
उठ रहा आकाश पर।
.
खिल उठी हैं
सुप्त मन की भावनायें।
प्रकृति के साथ हिलमिल,
गीत प्यारा गुनगुनायें।
.
चल पड़ी है जिन्दगी,
स्वयं अपनी राह पर।
छल कपट से दूर अब तक,
प्रीत अपनी चाह पर।
.
स्नेह की अविराम निर्मल भावनायें।
प्रकृति के साथ हिलमिल,
गीत प्यारा गुनगुनायें।
——————-
-सुरेन्द्रपाल वैद्य।

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