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गैरजिम्मेदाराना प्रदर्शन ने तोड़ी अरमानों की आस

Posted On: 10 May, 2010 Sports में

खेल संसारकौन जीता कौन हारा कौन बना सरताज, खेलों की दुनियां का लिखते सब हाल

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अगर आप एक ही गलती बार-बार दोहराते हैं तो उसे गलती नहीं मानी जाती, फिर तो वह अपराध कहलाता है

जिस चीज़ का डर था वही हुआ, भारतीय टीम ने अपनी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया, और अब वह टी20 विश्व कप से बाहर होने की दहलीज़ पर खड़ी है. कल खेले गए एक अहम मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत को 14 रन से हरा कर सब भारतीयों की आशाओं पर पानी फेर दिया.

अगर हम सुपर-आठ में हुए टीम इंडिया के दोनों मुकाबलों का मूल्यांकन करें तो उनकी हार का मुख्य कारण गेंदबाजों का लचर प्रदर्शन, बल्लेबाज़ों का गैर-जिम्मेदारना खेल, क्षेत्ररक्षण की लापरवाही, रणनीति की कमी और पिछली गलतियों की पुनरावर्ती थी. धोनी को पता था कि एक भी गलत कदम उनकी टीम की प्रतियोगिता से छुट्टी करा सकता है अतः गलती की कोई भी गुंजाइश नहीं छोड़ी जा सकती थी.

CRICKET-T20WC-IND-AUSधोनी को पता था कि केंसिंगटन ओवल, ब्रिजटाउन, बारबडोस की पिच तेज़ गेंदबाजों की सहायक है, इसलिए ज़रुरी था कि रविंदर जडेजा की जगह विनय कुमार को टीम में लिया जाता परन्तु इसके बावज़ूद विनय कुमार को नहीं खिलाया गया. अगर उनको खिलाना नहीं था तो उनका टीम में चयन क्यों किया गया था? अगर हम आई.पी.अल की बात करें तो विनय कुमार ने उम्दा प्रदर्शन किया था, वहीं रविंदर जडेजा ने तो आई.पी.एल. खेला ही नहीं, इसके अलावा टी20 विश्व कप में वह हर क्षेत्र में विफल रहे. यहाँ तक कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ उन्होंने अपने दो ओवर में छः छक्के पिटवाए.

सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर मुरली विजय अब तक कोई भी असर डालने में नकामयाब रहे थे अतः आज दिनेश कार्तिक को खिलाने की दरकार थी परन्तु धोनी ने फिर से मुरली विजय पे भरोसा जताया और उन्हें एक और मौका दिया. लेकिन विजय ने यह भरोसा कायम नहीं रखा और एक बार फिर विफल रहे, इसके साथ-साथ गंभीर भी अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभा पाए.

धोनी का सबसे ज़्यादा भरोसा रैना और युवराज पर था. रैना ने कुछ अच्छे शॉट खेले परन्तु एक बार फिर वह खराब शॉट खेल कर आउट हुए, युवराज तो अपनी लय में दिखे ही नहीं. युसूफ पठान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह तेज़ गेंदबाज़ी का सामना नहीं कर सकते.

इससे पहले वेस्टइंडीज की टीम ने 20 ओवर में 169 रन बनाए जिसका श्रेय किसी हद तक भारतीय गेंदबाजों और क्षेत्ररक्षण को जाता है. “रन गति रोकने का सबसे सफल उपाय निरंतर अंतराल पर विकेट लेना होता है”, परन्तु शायद भारतीय गेंदबाजों को देखकर ऐसा लगता है कि उनको विकेट लेना आता ही नहीं. शुरू के आठ ओवर तक वेस्टइंडीज के बल्लेबाज़ों ने संयम बना कर खेला और एक बार विकेट का सही अनुमान लगने पर उन्होंने ताबड़-तोड़ बल्लेबाज़ी शुरू कर दी. अगर हम वेस्टइंडीज के बल्लेबाज़ों को देखें तो कप्तान गेल ने खुल कर बल्लेबाज़ी करते हुए 98 रन बनाए और दूसरे बल्लेबाजों ने उनका बखूबी साथ निभाया.

एक कुशल रणनीतिकार होने के हिसाब से धोनी को पता था कि गेल ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो अकेले ही मैच का रुख बदल सकते हैं, अतः उनका विकेट सबसे महत्वपूर्ण था, परन्तु भारतीय क्षेत्ररक्षण कि हम दाद देते हैं जिन्होंने 12वें ओवर में उनका कैच टपकाया. अगर हम गेल कि बल्लेबाज़ी को परखें तो यह पता चलता है कि उन्होंने सत्तर प्रतिशत रन लेग-साइड में बनाए, जिसका मतलब गेंदबाजों ने खराब लाइन पर गेंदबाज़ी की. इसके विपरीत वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाज़ों को एक भी शॉट खेलने का मौका नहीं देते हुए उनकी कमजोरी पर वार किया.

सबसे बड़ी कमजो़री बनी नासूर

CRICKET-T20WC-IND-AUSटीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजो़री टीम इंडिया खुद है. यह जानते हुए भी कि भारतीय बल्लेबाज़ों को शॉर्ट-पिच गेंद खेलने में दिक्कत आती है, उन्होंने इस गलती को सुलझाने का कोई उपाय नहीं किया. 2009 टी20 विश्व कप में देखा गया था कि भारतीयों की हार का कारण शॉर्ट-पिच गेंदें रही थीं और यह वेस्टइंडीज टीम ही थी जिसने इस कमजो़री को जग उजागर किया था.

सुपर-आठ के हुए दोनों मुकाबले में एक बार फिर यही कमजो़री उनकी हार का कारण बनी. ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने शॉर्ट-पिच गेंदों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जिसका जवाब भारतीय बल्लेबाज़ों के पास नहीं था. इसके अलावा उनका साथ भारतीय बल्लेबाज़ों ने भी दिया, जिन्होंने गैर-जिम्मेदारना शॉट खेल कर अपना विकेट गवांया. पिच का अनुमान किए बिना ही शुरू से ही भारतीय बल्लेबाज़ बड़े शॉट खेलने को आतुर थे जिसका खामियाज़ा उन्होंने अपना विकेट गंवा कर दिया.

साख की लड़ायी

मंगलवार को सुपर-आठ में भारतीय टीम का आखिरी मुकाबला श्रीलंका से होगा और शायद यह टीम इंडिया का 2010 टी20 विश्व कप का आखिरी मैच हो. जहाँ श्रीलंका यह मैच जीतकर सेमी-फाईनल का रास्ता तय करना चाहेगी, वही टीम इंडिया यह मैच अपनी साख बचाने के लिए खेलेगी. अतः प्रतियोगिता की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण मुकाबला होगा.

CRICKET-T20WC-AUS-INDश्रीलंका की तरफ से महेला जयवर्धने शानदार फॉर्म में चल रहे हैं. वह अभी तक इस प्रतियोगिता में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं, इसके अलावा कप्तान संगकारा और एंजेलो  मैथ्यूज दोनों ही अकेले दम पर मैच जिता सकते हैं. श्रीलंका की गेंदबाज़ी का मुख्य हथियार लसिथ मलिंगा हैं जों शानदार फॉर्म में चल रहे है. मलिंगा एक चतुर गेंदबाज़ हैं जो बाउंसर के साथ-साथ यॉर्कर और गतिपरिवर्तन का बखूबी इस्तेमाल करते हैं जिनको खेलना बहुत कठिन है. अगर भारत को यह मैच जीतना है तो उनको वेस्टइंडीज से प्रेरणा लेनी चाहिए जिसने समय के अनुसार अपना स्तर उठाया और तय रणनीति से खेले. भारतीयों को ज़रुरी है कि वह अहम मौकों पर अपना मनोबल ना गिराएं और बाउंसर की काट ढूँढें.

इसके अलावा युवराज, गंभीर, धोनी, रैना, ज़हीर और हरभजन जैसे अनुभवी खिलाडियों को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी. गेंदबाजों के लिए ज़रुरी है कि वह रनगति रोकने के साथ-साथ  निरंतर अंतराल पर विकेट लेते रहें, जिसके तहत ही मैच जीता जा सकता है. आखिर में धोनी के धुरंधरो से यह उम्मीद है कि अब कप नहीं तो साख ही बचा
लो.

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