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रॉयल जीत से खुला खाता तो दादागिरी पर भारी पड़ी माहीगिरी

Posted On: 18 Mar, 2010 Sports में

खेल संसारकौन जीता कौन हारा कौन बना सरताज, खेलों की दुनियां का लिखते सब हाल

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जी हां, कल आईपीएल के मैदान में भारी उलट फेर हुए. जहां एक तरफ बेंगलूर रायल चैलेंजर्स ने सीरीज में अपनी पहली जीत दर्ज की वहीं दूसरी ओर चेन्नई ने कोलकाता के विजय रथ पर रोक लगा कर शाहरुख के सपनों पर पानी फेर दिया. वाकई इन दोनों मैचों के परिणाम ने यह दर्शा दिया है कि आगे होने वाले मुकाबले काफी रोमांचक होने वाले हैं.

आइये आपको बताते हैं कल का हाल

कल के पहले मुकाबले में पंजाब के शेरों का सामना हुआ बेंगलूर रायल चैलेंजर्स से. जहां एक तरफ पंजाब की टीम पूरी तरह युवाओं से लैस थी वहीं दूसरी तरफ बेंगलूर की टीम श्रृंखला में टेस्ट टीम सी लग रही थी. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरे किंग्स इलेवन को बोपारा और बिसला ने शतकीय शुरुआत दी. दाएं हाथ के बल्लेबाज बिसला ने मात्र 36 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया जबकि टीम ने 41 गेंदों में 50 रन जोड़े. बिसला ने सात चौके और चार छक्कों की मदद से 51 गेंदों में 75 रन बनाए. वह कालिस की गेंद पर इयान मोर्गन के हाथों लपके गए. नए बल्लेबाज युवराज सिंह (9) आज भी नहीं चले और दहाई का आंकड़ा छूए बगैर तेज गेंदबाज डेल स्टेन की गेंद मोर्गन ने  लपक लिया. पंजाब की टीम ने तीन विकेट के नुकसान पर 203 रन बनाए. जिसमें बोपारा का अर्धशतक भी शामिल था.

PTI3_16_2010_000167Bजवाब में विशाल लक्ष्य के आगे गत उप चैंपियन बेंगलूर को शीर्ष क्रम से विस्फोटक शुरुआत मिली. मनीष पांडे ने 26 गेंदों में दो चौके व तीन छक्कों की मदद से 38 रन बनाकर नए बल्लेबाजों को जीत राह दिखा दी. और बाकी का काम राबिन उथप्पा (51) के आक्रामक और जैक्स कालिस (नाबाद 89) की संतुलित पारी ने कर दिया जिसकी बदौलत बेंगलूर रायल चैलेंजर्स ने आईपीएल के सातवें मुकाबले में पंजाब किंग्स इलेवन को सात गेंद शेष रहते आठ विकेट से हरा दिया. बेंगलूर ने इसके साथ ही टूर्नामेंट में पहली जीत का स्वाद चख लिया जबकि पंजाब को फिर हार का सामना करन पड़ा है. जैक्स कालिस को उनके नाबाद 89 रनों के लिए मैच ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला.

इतिहास ने खुद को दोहराया

खैर अब बात करते हैं दूसरे मैच की जिसके सबसे रोमांचक होने की उम्मीद थी, मगर कोलकाता नाइटराइडर्स के लचर प्रर्दशन ने मानों इतिहास को दुबारा दोहरा दिया हो. पहले दोनों मैच जीतने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स से हार कर शायद दादा को साल 2008 की याद आ गई होगी.

पहले बल्लेबाजी के लिए उतरे चेन्नई सुपर किंग्स की शुरुआत बेहद खराब थी, हेडन का नया बल्ला चलने का नाम नहीं ले रहा था तो दूसरे सलामी बल्लेबाज मुरली विजय भी ज्यादा आक्रामक नहीं दिखे. और इसके बाद धोनी ने शुरुआत में जो धीमापन दिखाया वह टी-ट्वेंटी में टेस्ट की याद दिला रहा था मगर जल्द ही धोनी ने रंग बदल लिया और बेहद आक्रमक रुख अख्तियार कर लिया. धोनी ने अपनी नाबाद 66 रन की पारी में 33 गेंदों में छः चौके और तीन छक्के  जड़े. जबकि बद्रीनाथ ने 33 गेंदों में तीन चौका व एक छक्का जड़कर 43 रन बनाए.

जवाब में केकेआर की मुश्किलें अपनों ने ही बढ़ा दी. पहली ही गेंद पर ब्राड हाज बिना खाता खोले ही एल्बी मोर्कल की गेंद पर कैच आउट हो गए. इसके अगले ओवर में मनोज तिवारी (8) दो लगातार चौके लगाने के बाद मनप्रीत गोनी की गेंद पर बोल्ड हो गए. कप्तान सौरव गांगुली फिर नहीं चले  और 20 गेंदों का सामना करने के बाद एक चौके की मदद से 11 रन बनाकर कैंप के शिकार बने. पूरी टीम 19.2 ओवर में 109 रन पर आल आउट हो गई.

यानी दादागिरी के आगे माहीगिरी जीत गई , भूत पर भारी रहा वर्तमान .

अपने बेहतर prप्रदर्शन के लिए महेन्द्र सिंह धोनी को मैच ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला.

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