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घोटालों का खेल! कॉमनवेल्थ गेम्स

Posted On: 5 Aug, 2010 Sports में

खेल संसारकौन जीता कौन हारा कौन बना सरताज, खेलों की दुनियां का लिखते सब हाल

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आजकल यूपीए सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा जारी पूर्वानुमान के बाद खुश है जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भविष्यवाणी की है कि अगले वित्तीय वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था 8.4% के दर से विकसित होगी. अब तो ऐसा लगता है जैसे यूपीए सरकार भी “फील गुड फैक्टर” महसूस कर रही है परन्तु यूपीए सरकार को ज़रा सचेत रहना होगा क्योंकि यही “फील गुड फैक्टर” था जो 2004 के आम चुनाव में भाजपा की राजग सरकार के पतन का कारण बना था. परन्तु क्या यूपीए सरकार का खुश होना जायज़ है? और वह भी तब जब मुद्रा स्फीति की दर असमान छू रही है और जिससे सबसे ज़्यादा प्रभावित भारत का सबसे बड़ा तबका यानी आम इंसान है.

The-Commonwealth-Games-2010आजकल यूपीए सरकार एक और समस्या से परेशान है कॉमनवेल्थ गेम्स और उससे जुड़े मुद्दे और घोटाले. हाल तो इतने बदतर हो गए हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में रोज कोई न कोई घोटाले की खबर आने लगी है. यहाँ तक यूपीए सरकार में पूर्व खेल मंत्री एवं राज्यसभा सदस्य रहे मणि शंकर अय्यर ने अपने एक वक्तव्य में यह तक कह डाला कि इन खेलों का संरक्षण “भगवान नहीं बल्कि शैतान’ करेगा, और ‘जो लोग खेलों का संरक्षण कर रहे हैं, शैतान ही हो सकते हैं, भगवान नहीं.” उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह खेल सफल रहते हैं तो वह ‘नाखुश’ होंगे.

2006 सिडनी में हुए राष्ट्रमंडल खेल के समापन समरोह के दौरान मौजूद भारत की कॉमनवेल्थ गेम्स समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को जब कॉमनवेल्थ गेम्स की बैटन थमाई गयी थी तब शायद सारे भारतीय खुश हुए थे क्योंकि 1982 के एशियाई गेम्स के बाद यह पहले मौका था जब कोई अंतरराष्ट्रीय खेल समारोह भारत में आयोजित होना था.

कॉमनवेल्थ गेम्स के सफल आयोजन के लिए एक समिति बनाई गयी जिसका अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को बनाया गया जिसके अंतर्गत अलग–अलग चरण में कार्य होना था और हर चरण के लिए सुनिश्चित बजट भी निर्धारित किया गया था परन्तु अब शायद कार्यकारणी समिति के कार्य के बारे में केवल भारत ही नहीं पूरा विश्व जानता है.
अगर हम कॉमनवेल्थ गेम्स को “घोटालों का खेल” कहें तो गलत नहीं होगा. पहले स्टेडियम बनाने में देरी हुई, अब जब स्टेडियम तैयार हो गए हैं तो मानसून ने पूरे कार्य पर पानी फेर दिया है. लोगों का इतना कहना है कि अगर खेलों के दौरान स्टेडियम गिर गए तो आश्चर्य की बात नहीं होगी क्योंकि स्टेडियम बनाने के लिए उपयोग में आया सामान मिलावटी था.

Suresh-Kalmadi-Commonwealth-Games_0कौन देगा इसका जवाब?

“क्यों बोली लगाने वालों को ऊंची दरों पर ठेके दिए गए? क्यों थी कंस्ट्रक्शन की क्वॉलिटी खराब? क्यों दिया गया अक्षम एजेंसियों को काम?”

आज कॉमनवेल्थ गेम्स का बजट निर्धारित बजट से 17 गुना बढ़ गया है जिसका मुख्य कारण कॉमनवेल्थ गेम्स समिति के लोगों द्वारा की गई घूसखोरी और धांधली है. घूसखोरी और धांधली का आलम यह था कि अगर चार्ल्स सोबराज़ भी हो तो वह भी शर्मा जाए .

कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए बाहर सारा निर्माण किया जाना था जिसके लिए बहुत सारे टेंडर भी आए परन्तु किसी को नहीं पता कि टेंडर कब खुले और किसको मिले. इसके अलावा बहुत सारा सामान भी खरीदा गया जो ज़रुरी भी था लेकिन जो सामान खरीदा गया वह 10 गुना अधिक दामो में. उदाहरण के तौर पर एक सो़प सैनिटाइज़ की बाज़ार में कीमत 296 रुपए है परन्तु वही सो़प सैनिटाइज़ 3,336 रुपए का खरीदा गया. ऐसे ही 56,000 रुपए का कंप्यूटर प्लेटफार्म एक लाख से भी ज़्यादा का खरीदा गया. जब इनका पेट इससे भी नहीं भरा तो स्पॉंसरशिप लेने के लिए एक कंपनी की सेवाएं ली गईं जिसको 50 करोड़ रूपया दिया गया लेकिन भाई साहब इस विदेशी कंपनी ने एक भी स्पॉंसर नहीं दिया. वह 50 करोड़ कहाँ गया वह तो भगवान ही जाने.

imagesबैटन रेस का घोटाला

लंदन में हुए बैटन रिले समारोह के लिए एएम फिल्म्स नामक एक कंपनी को बिना किसी कॉन्ट्रैक्ट के भुगतान किया गया था. ब्रिटिश सरकार ने एएम फिल्म्स को मोटी रकम ट्रांसफर किए जाने पर सवाल उठाए थे. आरोप है कि बैटन रिले समारोह के लिए ब्रिटिश बैंक के जरिए कंपनी को 4.50 लाख पाउंड की रकम ट्रांसफर की गई. यह भी कहा गया कि इस कंपनी को हर महीने कॉस्ट्यूम डिजाइन के लिए 25,000 पाउंड दिए गए. इस घोटाले ने हमारे देश की छवि न केवल भारत में बल्कि पूरे संसार में धूमिल कर दी है.

कार्यसमिति ने घोटाले तो कर दिए परन्तु इस कुकर्म की सज़ा आम आदमी को भुगतनी पड़ रही है. आज हमारा देश बढ़ती हुए कीमत से परेशान है ऊपर से कॉमनवेल्थ गेम्स का बढ़ा हुआ खर्चा भी आम जनता से बटोरा जा रहा है. कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम पर बहुत सारे निर्माण भी हुए परन्तु क्या आम आदमी को इससे कुछ फायदा होगा? शायद नहीं. आम जनता को तो सिर्फ खुशहाल जिंदगी चाहिए जो उसे इस महंगाई के दौर में नसीब नहीं है.

commonwealth-arenaसरकार तो मुद्दों और घोटाले की छानबीन के लिए एक और समिति बना देगी, जो अगले दस सालों तक छानबीन ही करती रहेगी न्याय का तो सवाल ही नहीं. परतु इन सब में पिसेगा कौन – केवल आम आदमी.

Common Wealth Games Delhi 2010 was seen as an event to mark the India sporting presence in the World Map, but nothing is going as per the plan. “Corruption is ruling the Progress of the games” and same is being said in this Hindi Common Wealth Games Sports Blogs.

There are lots of problems and issues related to Common Wealth Games. It is been said that “Every day a Scandal in being reveled about the Common Wealth Games”. Sponsorship and Smam Company Scandal is the latest in the kitty which is also been told in this Common Wealth Games Blog.

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