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दुनिया के सबसे तेज धावक श्रीनिवास नहीं देंगे नेशनल ट्रायल, भैंसों के साथ दौड़कर तोड़ा है कंबाला खेल का रिकॉर्ड

Posted On: 17 Feb, 2020 Sports में

Rizwan Noor Khan

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भैंसों के साथ दौड़ने वाले कर्नाटक के श्रीनिवास ने पिछले दिनों विश्‍व के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट का 100 मीटर रेस का रिकॉर्ड तोड़ा है। इसके साथ ही उन्‍होंने कंबाला खेल में भैंसा रेस के पिछले 30 साल का रिकॉर्ड भी ब्रेक किया है। रिकॉर्ड ब्रेक करने पर खेल मंत्रालय ने उन्‍हें नेशनल ट्रायल के लिए बुलावा भेजा था।

 

 

 

 

30 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा
कर्नाटक राज्‍य के के मूदाबिदरी गांव निवासी श्रीनिवास गौड़ा ने 100 मीटर रेस का विश्‍व रिकॉर्ड हाल ही में तोड़ा है। दरअसल, श्रीनिवास हर साल पारंपरिक खेल कंबाला यानी कीचड़ में भैंसा दौड़ में हिस्‍सा लेते हैं। इस बार भी वह पिछले दिनों आयोजित कंबाला रेस में अपने दो भैंसों के साथ शामिल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस रेस में उन्‍होंने कंबाला खेल के पिछले 30 साल के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। वहीं, लोगों का मानना है कि उन्‍होंने ओलंपिक गोल्‍ड मेडलिस्‍ट और रिकॉर्डधारी यूसेन बोल्‍ट को भी पीछे छोड़ दिया।

 

 

 

 

टैलेंट सामने आया तो सरकार ने भेजा बुलावा
कंस्‍ट्रक्‍शन का काम करने वाले श्रीनिवास गौड़ा की काबिलियत को बिजनेस टाइकून आनंद महिंद्रा, कांग्रेस लीडर शशि थरूर और कई नामी हस्तियों समेत बड़ी संख्‍या में लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए खेलमंत्री और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को टैग कर दिया। खेलमंत्री ने श्रीनिवास गौड़ा के टैलेंट को सही मुकाम पर लाने के लिए तत्‍काल साई के अधिकारियों को आदेश दिए। खेल मंत्रालय की ओर से श्रीनिवास से संपर्क किया गया और उन्‍हें बंगलौर के साई सेंटर पर ट्रायल और प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया।

 

 

 

 

श्रीनिवास ने ठुकराया ऑफर
भैंसा रेस में रिकॉर्ड रचने वाले श्रीनिवास गौड़ा ने खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण के ऑफर को ठुकरा दिया है। बीबीसी की खबर के मुताबिक श्रीनिवास ने कहा कि वह भैंसों के साथ कीचड़ में दौड़ने वाले आम आदमी हैं। कंबाला रेस के कारण उनके पैर में चोट लगी हुई है। इसलिए वह नेशनल ट्रायल के लिए नहीं जा पाएंगे। इससे साफ हो गया है कि सोमवार को बंगलौर के साई सेंटर में वह अब नहीं आएंगे।

 

 

 

 

कर्नाटक का प्राचीन खेल है कंबाला
बता दें कि कंबाला खेल कर्नाटक पारंपरि‍क और प्राचीन खेल है। इस खेल में कीचड़ से भरे ट्रैक पर भैंसा दौड़ का हर साल आयोजन किया जाता है। यह दौड़ करीब 142 मीटर की होती है। भैंसों के साथ उसका पालक यानी जॉकी भी दौड़ता है। इस रेस को जीतने वाले को नकद इनाम और प्रशस्ति पत्र भी दिए जाते हैं। इसमें हिस्‍सा लेने के लिए पूरे राज्‍य से लोग अपने भैंसों के साथ पहुंचते हैं।…NEXT

 

 

 

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