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मंजिलें हासिल होती गईं - सानिया मिर्जा

Posted On: 12 Sep, 2010 Sports में

खेल संसारकौन जीता कौन हारा कौन बना सरताज, खेलों की दुनियां का लिखते सब हाल

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भारत में लड़कियों को ऐसे तो घर की शोभा के रुप में देखा जाता है और उन्हें घर में सजा कर रखने वाली वस्तु माना जाता है लेकिन जब भी कोई लड़की अपनी क्षमता के हिसाब से दुनियां के सामने आती है तो उसकी ख्याति दुनियां भर में फैल जाती है. इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, पीटी ऊषा, किरण बेदी आदि सबको देश ने ही नहीं बल्कि विदेशों ने भी जाना.


आज की नारी प्रगति की सूचक है. वह हर क्षेत्र में अपने पांव पसार रही है और पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने को भी तैयार है. खेल के क्षेत्र में भी महिलाओं को उनके प्रदर्शन की वजह से बहुत ख्याति मिल रही है. इधर कुछेक सालों की बात करें तो सानिया मिर्ज़ा ने भारतीय खेल जगत में तहलका मचा रखा था. हैदराबाद जैसे शहर से आने वाली सानिया ने विश्व टेनिस में कई उपलब्धियां हासिल कर देश का नाम रोशन किया.

Sania Mirza childhoodशुरुआत एक फूल की


15 नवम्बर, 1986 को मुंबई में जन्मी सानिया के पिता इमरान मिर्ज़ा एक खेल संवाददाता थे. कुछ समय के बाद उन्हें हैदराबाद जाना पडा जहां एक पारंपरिक शिया खानदान के रुप सानिया का बचपन गुजरा. निज़ाम कल्ब हैदराबाद में सानिया ने छ्ह साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरु किया था. पिता के सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प के सहारे वह आगे बढ़ती रही.


कहते हैं गुरु ही शिष्य की सफलता को निर्धारित करता है यहां भी यही हुआ. महेश भूपति के पिता और भारत के सफल टेनिस प्लेयर सीके भूपति से सानिया ने अपनी शुरुआती कोचिंग ली.


उनके पिता के पास इतने पैसे नही थे जो वह सानिया को प्रोफेशनल ट्रेनिंग करवा सकें. इसके लिए उन्होंने कुछ बड़े व्यापारिक समुदायों से स्पॉंशरशिप ली. जीवेके इंड्रस्ट्रीज और एडीडास ने सानिया मिर्ज़ा को 12 साल से ही स्पॉंशर करना शुरु कर दिया. उसके बाद उनके पिता ने उनकी ट्रेनिंग का जिम्मा ले लिया.

sania-mirza_1उभरती सानिया


अपने कॅरियर की शुरुआत उन्होंने 1999 में उन्होंने विश्व जूनियर टेनिस चैम्पियनशिप में हिस्सा लेकर किया. इसके बाद उन्होंने कई अंतररार्ष्ट्रीय मैचों में शिरकत की और सफलता भी पाई. 2003 उनके जीवन का सबसे रोचक मोड़ बना जब भारत की तरफ से वाइल्ड कार्ड एंट्री करने के बाद सानिया मिर्ज़ा ने विम्बलडन में डबल्स के दौरान जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और सफलता दर सफलता प्राप्त करती गईं.


वर्ष 2004 में बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्हें 2005 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 2005 के अंत में उनकी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 42 हो चुकी थी जो किसी भी भारतीय टेनिस खिलाड़ी के लिए सबसे ज्यादा थी. 2009 में वह भारत की तरफ से ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं.


sania-mirza-shoaib-malik-weउतार चढ़ाव का दौर


सानिया मिर्ज़ा एक मुस्लिम परिवार से है जहां लडकियों को बुर्के में रखने की प्रथा है ऐसे में सानिया का शॉर्ट स्कर्ट पहन मैदान में खेलना कइयों को पसंद नहीं आया. 2005 में एक मुस्लिम समुदाय ने सानिया के खेलने के खिलाफ फ़तवा तक जारी कर दिया था. इसके बाद जमात-ए-इस्लामी हिन्द नामक संगठन ने कहा कि उन्हें सानिया के खेलने से परहेज नहीं बल्कि वह सिर्फ यह कहना चाहते हैं कि सानिया खेलते समय ड्रेस कोड का ध्यान रखें. इसके साथ और भी कई मुश्किल भरे दौर आए उनकी जिंदगी में.

अभी हाल ही में सानिया ने पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी शोएब मलिक के साथ निकाह रचाया. उनकी शादी के समय तो इतना ड्रामा हुआ कि उसे मीडिया ने एक गर्म मसाला न्यूज के तौर पर पेश किया. लेकिन इन सब के बावजूद सानिया ने एक भारतीय नारी की तरह हर मोर्चे पर शोएब मलिक का साथ दिया.

शोएब मलिक के साथ विवाह करने को लेकर उन्हें कई लोगों से कड़ी प्रतिक्रियाएं भी मिली लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की.


आज सानिया मिर्जा भारत की शान मानी जाती हैं. हर खेल आयोजन में उन्हें विशेष स्थान दिया जाता है. हैदराबाद की एक छोटी सी लड़की जिसके पिता के पास ट्रेनिंग तक के पैसे नहीं थे आज वह भारत की टेनिस सनसनी बन चुकी है.

सानिया मिर्ज़ा की ज्योतिषीय विवरणिका देखने के लिए यहां क्लिक करें.

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