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यूरो कप 2012: स्पेन की बादशाहत बरकरार

Posted On: 2 Jul, 2012 Sports में

खेल संसारकौन जीता कौन हारा कौन बना सरताज, खेलों की दुनियां का लिखते सब हाल

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spain euroयूरोजोन की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था स्पेन के बैंक आर्थिक संकट के चक्र में लगातार फंसते जा रहे हैं. वहां की सरकार चिंतित है क्योंकि अर्थव्यवस्था को लेकर उनके सभी तरह के प्रयास फेल होते जा रहे हैं. लेकिन इस बीच एक ऐसी घटना घट जाती है जो स्पेन के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए इतिहास बन कर रह जाती है.



स्पेन ने रचा इतिहास

स्पेन ने यूरो कप 2012 का खिताब अपने नाम करने के साथ ही लगातार तीन बड़ी प्रतियोगिताओं का खिताब जीत कर इतिहास रच दिया है. स्पेन ने इससे पहले 2008 में यूरो कप और 2010 का फुटबॉल विश्व कप भी जीता था. खिताब की प्रबल दावेदार माने जाने वाली स्पेन ने यूरो कप फुटबॉल प्रतियोगिता 2012 के फ़ाइनल में इटली को 4-0 से हराकर शानदार जीत अर्जित की. यूरो कप फाइनल के इतिहास में किसी भी टीम की ये अब तक की सबसे बड़ी जीत है. इससे पहले 1972 में पश्चिमी जर्मनी ने सोवियत संघ को 3-0 से हराकर खिताब जीता था.

स्पेन ने लगातार दूसरी बार यूरो का खिताब जीता है. इस तरह से कुल मिलाकर उन्होंने तीसरा यूरो कप खिताब जीता है. स्पेन ने सबसे पहले 1964 में सोवियत संघ को 2-1 से हराकर और फिर 2008 में जर्मनी को 1-0 से हराकर यूरो कप जीता था.


कैसा था मुकाबला

विश्व की चोटी के खिलाड़ियों से सुसजित स्पेन की टीम के बारे में माना जाता है कि वह अपने विरोधियों को जल्दी से परख लेती है और उस पर दबाव बनाने की कोशिश करती है. रविवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में भी स्पेन ने वही किया. उन्होंने शुरुआती दौर में ही इटली पर दबाव बनाया और जब तक इटली अपने आप को संभाल पाती तब तक पासा पूरी तरह से पलट चुका था. स्पेन की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है उन्होंने 14वें मिनट में गोल करके इटली पर 1-0 की बढ़त ले ली थी. उसके बाद लगातार गोल पर गोल करके पूरे मैच को एकतरफा बना दिया.


किसकी रही भूमिका

स्पेन की जीत में आंद्रेस इनिएस्टा और जावी की भूमिका अहम रही जिन्होंने डेविड सिल्वा (14वें मिनट), जोर्डी अल्बा (41वें मिनट) और फर्नान्डो टोरेस (84वें मिनट) के गोल में अहम भूमिका निभाई. जुआन मार्टा (88वें मिनट) ने टीम की ओर से चौथा गोल दागा.


इटली को निराशा हाथ लगी

मैच से पहले इटली को एक ऐसे टीम के रूप में देखा जा रहा था जो स्पेन जैसी मजबूत टीम के खिलाड़यों पर अंकुश लगा सकती थी. लेकिन अंत में जो परिणाम देखने को मिला उसे देखकर ऐसा कभी नहीं कहा जा सकता कि यह वही इटली की टीम है जिसने सेमीफाइनल में मारियो बालोटेली के दो अहम गोल की बदौलत जर्मनी को हराया था. पूरे मैच में इटली अपने आप असहाय महसूस करती रही.

स्पेन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि फुटबॉल के क्षेत्र में वह सर्वश्रेष्ठ है और उसे हराना आसान नहीं है. इस जीत को आर्थिक संकट का सामना कर रहे स्पेन के लोगों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.



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