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रिक्शा चालक की बेटी स्वप्ना ने जीता गोल्ड, राहुल द्रविड़ के फाउंडेशन ने की थी मदद

Posted On: 31 Aug, 2018 Sports में

Shilpi Singh

खेल संसारकौन जीता कौन हारा कौन बना सरताज, खेलों की दुनियां का लिखते सब हाल

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इंडोनेशिया के जकार्ता में जारी 18वें एशियाई खेलों में एक बार फिर भरात की बेटी स्वप्ना ने हर भारतीय का सपना पूरा कर दिया। स्वप्ना ने इंडोनेशिया के जकार्ता में जारी 18वें एशियाई खेलों की हेप्टाथलन स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ये गोल्ड इसलिए भी खास है क्योंकि इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं। आज लोग उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं लेकिन उनका सफर इतना भी आसान नहीं था, ऐसे में चलिए एक नजर स्वप्ना के सफर पर।

 

 

दांत में दर्द के बावजूद दिखाया शानदार खेल

उत्तरी बंगाल के शहर जलपाईगुड़ी से आने वाली सपना तब लोगों की नजरों में आई जब उन्होंने हेप्टाथलन स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। ये खेल उनके लिए आसान नहीं था क्योंकि उन्हें इस दौरान उनके दांतों में दर्द था बावजूद इसके उन्होंने शानदार खेल दिखाया स्वप्ना ने सात स्पर्धाओं में कुल 6026 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। स्वप्ना की कामयाबी पर देश नाज कर रहा है।

 

 

पिता रिक्शा चलाते थे

स्वप्ना के पिता पंचन बर्मन रिक्शा चलाते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से उम्र के साथ लगी बीमारी के कारण बिस्तर पर हैं। लेकिन बेटी स्वप्ना ने हार नहीं मानी और अपनी मां के सपनों को पूरा किया और भारत की झोली में एक और गोल्ड लाकर दिखाया।

 

 

पैरों में छह-छह उंगलियां हैं

स्वप्ना के दोनों पैरों में छह-छह उंगलियां हैं, जिस वजह से उन्हें दौड़ने में और जूते पहनने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता था बावजूद इसके उन्होंने इस कमजोरी को खुद पर हावी नहीं होने दिया। पांव की अतिरिक्त चौड़ाई खेलों में उनकी लैंडिंग को मुश्किल बना देती है, इसी कारण उनके जूते जल्दी फट जाते हैं। लेकिन स्वप्ना ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से वोकर दिखाया है जिसका सपना हर खिलाड़ी देखता है।

 

 

कोच ने बचपन में ही पहचानी प्रतिभा

स्वप्ना के बचपन के कोच सुकांत सिन्हा ने कहा कि उसे अपने खेल संबंधी महंगे उपकरण खरीदने में काफी परेशानी होती है। बकौल सुकांत, ‘मैं 2006 से 2013 तक उसका कोच रहा हूं। वह काफी गरीब परिवार से आती है और उसके लिए अपनी ट्रेनिंग का खर्च उठाना मुश्किल होता है। जब वह चौथी क्लास में थी, मैंने उसकी प्रतिभा पहचान ली थी। इसके बाद मैंने उसे ट्रेनिंग देना शुरू किया।

 

 

राहुल द्रविड की फाउंडेशन ने ऐसे की स्वप्ना की मदद

पूर्व क्रिकेट राहुल द्रविड़ की गो स्पोर्ट्स फाउंडेशन ने स्वप्ना के हुनर को पहचाना और मदद करनी शुरू की, जिसकी वजह से वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर पा रही हैं। साल 2017 से ही राहुल की कंपनी स्वप्ना को स्पोर्ट कर रही है। वहीं, ग्रेट स्पोर्ट्स इंफ्रा नाम की कंपनी ने भी स्वप्ना को 1.5 लाख की स्कॉलरशिप दी थी जिससे उन्हें बहुत मदद हुई।

 

 

इसके पहले भी कर चुकी हैं शानदार प्रर्दशन

स्वप्ना ने एथलेटिक्स के हेप्टाथलन में 2017 पटियाला फेडरेशन कप में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा भुवनेश्वर में एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। चार साल पहले इंचियोन में आयोजित किए गए एशियाई खेलों में स्वप्ना कुल 5178 अंक हासिल कर चौथे स्थान पर रही थीं।…Next

 

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