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करवा चौथ कहानी

Posted On: 21 Oct, 2013 Others में

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karwa chauth speciaकरवा चौथ की पौराणिक कथा के अनुसार एक समय की बात है नीलगिरी पर्वत पर पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने गए. किसी कारणवश उन्हें वहीं रुकना पड़ा. उन्हीं दिनों पांडवों पर गहरा संकट आ पड़ा. तब चिंतित व शोकाकुल द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया तथा कृष्‍ण के दर्शन होने पर पांडवों के कष्टों के निवारण हेतु उपाय पूछा.


तब कृष्ण बोले- हे द्रौपदी! मैं तुम्हारी चिंता एवं संकट का कारण जानता हूं. उसके लिए तुम्हें एक उपाय करना होगा. जल्दी ही कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्थी आने वाली है, उस दिन तुम पूरे मन से करवा चौथ का व्रत रखना. भगवान शिव, गणेश एवं पार्वती की उपासना करना, तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे तथा सबकुछ ठीक हो जाएगा.


कृष्ण की आज्ञा का पालन कर द्रौपदी ने उसी तरह करवा चौथ का व्रत किया. तब उसे शीघ्र ही अपने पति के दर्शन हुए और उसकी सारी चिंताएं दूर हो गईं.

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जब मां पार्वती द्वारा भगवान शिव से पति की दीर्घायु एवं सुख-संपत्ति की कामना की विधि पूछी तब शिव ने ‘करवा चौथ व्रत’ रखने की कथा सुनाई थी. करवा चौथ का व्रत करने के लिए श्रीकृष्ण ने दौपदी को निम्न कथा का उल्लेख किया था.


पुराणों के अनुसार करवा नाम की एक पतिव्रता धोबिन अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित गांव में रहती थी. उसका पति बूढ़ा और निर्बल था. एक दिन जब वह नदी के किनारे कपड़े धो रहा था तभी अचानक एक मगरमच्छ वहां आया, और धोबी के पैर अपने दांतों में दबाकर यमलोक की ओर ले जाने लगा. वृद्ध पति यह देख घबराया और जब उससे कुछ कहते नहीं बना तो वह करवा..! करवा..! कहकर अपनी पत्नी को पुकारने लगा.


पति की पुकार सुनकर धोबिन करवा वहां पहुंची तो मगरमच्छ उसके पति को यमलोक पहुंचाने ही वाला था. तब करवा ने मगर को कच्चे धागे से बांध दिया और मगरमच्छ को लेकर यमराज के द्वार पहुंची. उसने यमराज से अपने पति की रक्षा करने की गुहार लगाई और साथ ही मगरमच्छ को उसके इस कार्य के लिए कठिन से कठिन दंड देने का आग्रह किया और बोली- हे भगवन्! मगरमच्छ ने मेरे पति के पैर पकड़ लिए हैं. आप मगरमच्छ को इस अपराध के दंड-स्वरूप नरक भेज दें.


करवा की पुकार सुन यमराज ने कहा- अभी मगर की आयु शेष है, मैं उसे अभी यमलोक नहीं भेज सकता. इस पर करवा ने कहा- अगर आपने मेरे पति को बचाने में मेरी सहायता नहीं कि तो मैं आपको श्राप दूंगी और नष्ट कर दूंगी.


करवा का साहस देख यमराज भी डर गए और मगर को यमपुरी भेज दिया. साथ ही करवा के पति को दीर्घायु होने का वरदान दिया. तब से कार्तिक कृष्ण की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत प्रचलन में आया जिसे इस आधुनिक युग में भी महिलाएं पूरी भक्ति भाव के साथ करती हैं और भगवान से अपनी पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं.

साभार: राजश्री कासलीवाल

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