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विशेष दर्जा पर योजना क्या ?

Posted On: 17 Mar, 2013 Others में

sudhblogहम कहाँ जा रहे हैं पता नहीं .....इसे खोजने की एक कोशिश

सुधीर कुमार सिन्हा

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जनता दल यू के लोग बिहार को विशेष दर्जा दिलाने के लिए दिल्ली में अधिकार रैली के लिए घूम – घूम कर सभा भी कर रहे हैं । दावा किया जा रहा हैं कि विशेष दर्जा प्राप्त होने के बाद राज्य का पिछड़ापन खत्म हो जाएगा । मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने भी यही कहा है पर ये लोग ये स्पष्ट नहीं कर रहे हैं कि विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त होने के बाद इनके पास ऐसा कौन सा प्लान है जिसके क्रियान्वयन से राज्य का पिछड़ापन दूर हो जाएंगा ? यह ठीक है कि एक विशेष पैकेज मिल जाएंगा लेकिन पैसा मिल जाना ही विकास का मापदंड है या कोई प्लानिंग भी होनी चाहिए ? मेरा क्या सभी लोगों का मानना है कि किसी भी कार्य के सुपरिणाम तक पहुँचने के लिए एक रूपरेखा का होना जरूरी है जो इन लोगों के पास नहीं है । अपने यहाँ एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि हम मुद्दे को लेकर आंदोलन तो करते हैं पर आंदोलन की सफलता के बाद हम क्या करेंगे इसकी कोई ठोस योजना अपने पास नहीं रहती । भारत की आजादी के पूर्व अपने पास सिर्फ एक लक्ष्य था भारत को आज़ाद कराना एक पूरा समाज इस पुनीत कार्य में लगा था पर जब पुछा जाता था कि आजादी के बाद ? तो जवाब रहता पहले आजादी तो प्राप्त कर लें फिर बैठकर रूपरेखा भी बना लेंगे । जुनून ने ये काम कर दिया । आजादी मिल गई । पर भारत , भारत नहीं रहा इसका अपना मोलिक संविधान भी नहीं रहा । कई देशों के संविधान के टुकड़ों को जोड़कर अपना संविधान बना दिया गया । देश विकास करे इसका देशी मॉडल रहते हुए विदेशी मॉडल को अपना लिया गया और यह कहा गया कि अभी इसकी आवश्यकता है , यानि अपने संसाधनो की तलाश कर उसके आधार पर विकास की रूपरेखा तैयार न करके ओद्योगिक विकास की कल्पना ही नहीं गई बल्कि उसको साकार रूप भी दे दिया गया । जो इस देश के अनुकूल नहीं था । द्वितीय पंचवर्षीय योजना में कृषि योग्य जमीन पर यह कहकर कि ये कृषि योग्य नहीं है उसपर बड़े उद्योग स्थापित कर दिये गए । इसकी कोई रूपरेखा नहीं तैयार हुई , आनन – फानन में ये सारा कार्य हुआ । नतीजा अपने सामने है कि कृषि योग्य जमीन तो समाप्त तो हुई ही साथ ही ये सारे उद्योग भी धीरे – धीरे बंद हो गए या बंद होते जा रहे हैं । ये सब प्लानिंग के अभाव के कारण हुआ है । आंदोलन तो अपना मकसद नहीं मकसद तो आंदोलन के जरिये विकास करना है और विकास कैसे करना है इसकी योजना और क्रियान्वयन की ब्लू प्रिंट तैयार करना है , लेकिन ऐसा तब भी नहीं हुआ था और आज भी नहीं हो रहा है । दिल्ली में आयोजित रैली के माध्यम से अधिकार प्राप्त करना है पर अधिकार प्राप्त कर क्या करना है इसका ब्लू प्रिंट / एक्शन प्लान भी सामने आना था । अधिकार तो राजनीतिक पार्टियां चुनाव में भी प्राप्त कर लेती हैं पर अधिकार मिलने के बाद अपने चुनावी घोषणा पत्र को भूल जाती हैं । उसका कुछ नहीं हो पाता तो इसका क्या होगा , कुछ तो स्पष्ट होना चाहिए अन्यथा , पिछड़ापन दूर हो जाएगा कह देने मात्र से राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त हो जाने के बाद भी शायद पिछड़ापन दूर होना संभव नहीं है । बस इतना होगा कि हमने दिल्ली तक अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी , इस उपलब्धि से ही संतोष करना पड़ेगा और शायद इस आरोप को भी झेलना पड़ेगा कि सरकार ने जनता को वास्तविक मुद्दों से हटा कर विशेष दर्जे के अधिकार की लड़ाई में उलझा दिया ।

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