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तुम्हारा : सुजीत

Posted On: 10 May, 2020 Others में

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sujeetmishra

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हां ये भी सच है कि बराबर हम नहीं तेरे
तुम रात पूनम की हम अमावस के अंधेरे

तुम गुल ए गुलज़ार मौसम हो बहार का
मैं हूं जैसे पतझड़ में पत्ता टूटा कोई डाल सा

तुम तो रुख़ से ही लगो की जैसे अप्सरा कोई
हम तो सजने पर भी लगते जैसे बंजारा कोई

है बहुत ही दूरियां पाबंदियां भी है कई
पर तुझे पाने की दिल से आस मेरे न गई

सुन ले तू ये सच के तुझको चाहते बेहद है हम
ख़ुदा से और तुझसे तुझको मांगते रहते है हम

है एकतरफ़ा मोहब्बत पर कम नही होगी कभी
हम तुम्हे भूले ये ख़्वाब में भी होगा न कभी

बस यही अरदास है है यही एक आरजू
बनना चाहूँ मैं तेरा बस मैं रहूँ तेरे रूबरू

मान लो ये इल्तिज़ा तुमसे है पहली औ आख़िरी
है ये वादा मेरे जीवन मे हो पहले रहोगे आख़िरी

 

 

 

नोट : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं।

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