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न आये लौट के

Posted On: 29 Jun, 2013 Others में

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Sumit

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रूठकर गयी थी सुबह मुझसे
रात का दर्पण दिखा कर
फिर लौट आयी है सुबह !!.
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रूठकर गयी थी बहार मुझसे
पतझड के पत्ते उड़ा कर
फिर लौट आयी है फिजा !!
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रूठकर जो गये तुम मुझसे
न आये लौट के…..लौट के आयी
मन का अज़ाब और यादें नाचार !!
.
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अज़ाब =पीड़ा, नाचार =असहाय
सुमित नैथानी

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