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वेट एंड वाच पीरियड : जम्हूरियत यूपी

Posted On: 2 Jun, 2017 Others में

sach ka aainaअपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

sunita dohare Management Editor

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वेट एंड वाच पीरियड : जम्हूरियत यूपी

देखा जाए तो शराब के खिलाफ आंदोलन उत्तर-प्रदेश में बढ़ता जा रहा है। कभी आंध्रप्रदेश, हरियाणा, बिहार और गुजरात में भी इस तरह के आंदोलन चले थे। आंध्रप्रदेश, बिहार और गुजरात में शराबंदी की भी लागू की गई। लेकिन उत्तर-प्रदेश में शराबबंदी संघर्ष समिति के साहस ने उम्मीद जगाई है। इस आंदोलन की चिंगारी आग का गोला बने यहाँ कि आवाम यही चाहती हैं। यूपी के कई जिलों में इसका जबरदस्त विरोध हो रहा है। अभी के हालातों को देखें तो उत्तर प्रदेश की आवाम के लिए शराब के खिलाफ आवाज़ उठाने के साथ साथ वेट एंड वाच पीरियड हैं।
देखा जाये तो कोई भी सरकार हो, प्रतिनिधि हो या प्रशासन हो, हर बार महिलायों को तवज्जों देने की बात की जाती है पर शराबबंदी आंदोलन को देखते हुये लगता है कि महिलाओं की आवाज को दबाया जा रहा है l सरकार इसे संवेदनशील मुद्दा नही समझ रही है ।
विदित हो कि कुछ समय पहले बीजेपी सरकार में स्वाति सिंह ऐसी महिला मंत्री है, जो शराब की दुकान का उदघाटन कर रही थीं और ऐसा करते हुए ये मैडम अपने आपको बहुत ही गौरान्वित महसूस कर रहीं थीं l ये सब देखते हुए ये प्रतीत होता है कि सरकार की नीति के तहत ही उसके मंत्री शराब को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। सरकार शराब के कारोबार को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में बढ़ावा दे रही है l महिलाओं की आवाज एक महिला ही समझ सकेगी ऐसा शराब से पीड़ित महिलाएं सोचतीं थी लेकिन ऐसा नही हुआl रही सही कसर अर्चना पांडेय ने आबकारी मंत्री बनकर पूरी कर दी l यह मामला स्वाति सिंह का नहीं पूरी सरकार का है और इसी सरकार का नहीं पिछली सरकारों का भी है जो निरंतर आबकारी विभाग के माध्यम से राजस्व का बहाना बनाकर समाज के निर्धन वर्ग खासकर महिलाओं को और दयनीय स्थिति में पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं l
सरकार शराबबंदी के विरोध में तर्क देती है कि ऐसा करने से राज्य के आदिवासी तबके से रोजगार छिन जाएगा। यह तर्क गले नहीं उतरता, क्यूंकि आज यह व्यापार बड़े शराब माफिया समूहों द्वारा ही चलाया जा रहा है। शराब गरीब तबके के लोगों का जीवन और भी नर्क किए हुए है। हजारों परिवार इसके कारण उजड़ गए। बच्चे अनाथ, तो महिलाएं विधवा जीवन जीने का अभिशप्त हैं। शराब के ठेकों पर रोज़ शराब के नाम पर गंदगी और बेहूदगी का ऐसा नजारा होता है जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ एक षड्यंत्र प्रतीत होता है l
लेकिन बधाई के पात्र हैं शराबबंदी संघर्ष समिति के अध्यक्ष जनाब मुर्तजा अली जी जिन्होंने दर-प्रतिदर अपने निर्भीक व बेबाक कार्य प्रणाली के चलते आम-जन के जख्मों को मरहम लगाने का काम किया है समाचार पत्रों व छोटे परदे के माध्यम से आम-जन की समस्याओं को एक आंदोलन का रूप देने का साहसिक व प्रशंसनीय काम किया है !
शराबबंदी संघर्ष समिति के अध्यक्ष जनाब मुर्तजा अली जी ने अपने कार्यों से आम-जन पर होने वाले अन्याय व अत्याचारों पर अंकुश लगाने का काम किया है निश्चित ही शराबबंदी संघर्ष समिति आम-जन के विश्वास का पर्याय बन चुका है l
आज शराब गांव की गलियों से लेकर चौपालों तक आसानी से पहुंच रही है, जिसका दुष्परिणाम यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं व बच्चों के साथ अपराध बढ़ रहे हैं। शराब समाज के विकास में सर्वाधिक बाधक है। शराब के सेवन से परिवार में कलह, आर्थिक तंगी तथा सामाजिक विघटन हो रहा है। महिलाओं को खासकर घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ता है। जनाब मुर्तजा अली ने इसे लेकर कई बार अपनी चिंता ज़ाहिर की है। शराब के मामले में उत्तर प्रदेश को लेकर वे तगड़ा दबाव बनाने की रणनीति पर चल रहे हैं। उन्होंने उत्तर-प्रदेश सरकार से ये आग्रह किया है कि प्रदेश स्तर पर शराबबंदी का कानून बने। सरकार को हाईवे पर पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ानी चाहिए। शराब पीकर ड्राईव करने वाले पर भारी भरकम जुर्माने के साथ उसका लाइसेंस रद्द और वाहन तक जब्त कर लेना चाहिए। सिर्फ जुर्माना ही पर्याप्त नहीं है। सभी हाईवे के टोल नाकों पर परमानेंट एक डाक्टर का इंतजाम और वहां वाहन चालकों का चेकअप किया जाना चाहिए जो नशे में हो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार के ऊपर आम-जन के विश्वास की रक्षा का भार है इसलिए सरकार को अपनी सृजनकारी भूमिका को पहचानने की जरूरत है।
सुनीता दोहरे
प्रबंध सम्पादक
इण्डियन हेल्पलाइन न्यूज़

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