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“आयना पाहुजा” एक बहादुर रिपोर्टर बनिये....

Posted On: 2 Dec, 2014 Others में

sach ka aainaअपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने...

sunita dohare Management Editor

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sunita dohaare

“आयना पाहुजा”  एक बहादुर रिपोर्टर बनिये….

अभी कुछ दिनों पहले की बात है जब एक रिपोर्टर ने “गोवा फिल्म फेस्टिवल” में गोवा की गवर्नर मृदुला सिन्हा को “गवर्नर ऑफ इंडिया” कहकर संबोधित किया था  रिपोर्टर ने मोदी के ‘अच्छे दिनों’ से लेकर ‘पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया’ जैसे वन लाइनर्स तक यूज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी साथ ही इस रिपोर्टर ने पूरी ईमानदारी से कैमरे के सामने यह भी स्वीकार किया था कि उसको फिल्मों का ज्यादा ज्ञान नहीं है, और फिल्म फेस्टिवल में आकर अगर उसका ज्ञान बढ़ सकता है तो दर्शकों का ज्ञान भी जरूर बढ़ेगा। “गोवा फिल्म फेस्टिवल” की रिपोर्टिंग करने वाली दूरदर्शन की रिपोर्टर की ‘खराब रिपोर्टिंग’ का उस समय जो वीडियो वायरल हुआ था, वो वीडिओ आज तक उस पर भारी पड़ रहा है। मैंने आज “अखबार द टेलिग्राफ” में छपी खबर को देखा, उसमें लिखा था कि “सोशल मीडिया पर अपना मजाक बनाए जाने की वजह से रिपोर्टर गहरे सदमे में चली गई है और उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया है” जिस वजह से उसके घरवाले बहुत परेशान हैं।
गौरतलब हो कि अपनी ‘खराब रिपोर्टिंग’ का विडियो वायरल होने और मजाक उड़ाए जाने के बाद दूरदर्शन की रिपोर्टर आयना पाहूजा ने आज पहली बार इस मामले पर चुप्पी तोड़ी है। फेसबुक पेज ‘द लॉजिकल इंडियन’ ने आयना का विडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि इस समय उनकी आत्महत्या करने जैसी मनोस्थिति हो गई है। आयना ने लोगों से निवेदन किया है कि अब मेरा और मजाक न उड़ाएं।  इस वीडिओ में आयना कहती हैं, यह जो कुछ हुआ है, उसके बाद मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं। मेरे सारे “असाइनमेंट्स और प्रॉजेक्ट्स” मुझसे छीन लिए गए हैं। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं आत्महत्या कर लूं। मुझे नहीं पता कि अब मेरे कैरियर का क्या होगा।
अगर सही मायने में देखा जाए तो ये कोई गंभीर गलती नही है  “गवर्नर ऑफ इंडिया” नाम की कोई पोस्ट ही नही होती, लेकिन कलेक्ट्विली “गवर्नर्स ऑफ इंडिया” मे सभी सूबों के राज्यपाल शामिल होते हैं इस बात के लिये “डीडी” को ज़लील करने का कोई अर्थ नही बनता ! और अगर आप इस बात को गलत कहते हैं तो फिर ये भी देखिये कि निज़ी चैनल दिन-रात हास्यास्पद गलतियाँ करते रहते हैं ! और नेता, मंत्री और  पुलिस अफसर तो दिन रात कुछ ना कुछ गलत बोलते रहते है और अगले दिन माफी भी मांग लेते है उदाहरण के तौर पर कहना चाहूंगी कि जिस देश में साधु यादव, लालू यादव, यादव सिंह, मुलायम सिंह, दिग्विजय सिंह, मायावती और अनगिनत मुन्ना भाई गलत ब्यान देकर बेशर्मों की तरह घूम रहे हों, वहां एक छोटी सी गलती के लिए किसी का मजाक उडाना और साथ ही उनके सारे “असाइनमेंट्स और प्रॉजेक्ट्स” छीन लेना क्या न्याय संगत है ! अगर एक बात न्यूज़ एँकर ने गलत बोल दी तो कौन सी बड़ी बात हो गई, ऐसे तो हमारे देश के कर्णधारो की जुबान फिसलने और जुबान पलटने के कई किस्से है, उनके बारे मे आपका क्या खयाल है ! और वैसे भी फिल्मी आयोजन केवल तफरीह के लिये होते रहते हैं और ऐसी जगह गंभीरता अपने-आप मे हास्यास्पद होती है ! मैने भी वीडियो देखा था मुझे वीडिओ देखकर साफ़ यही लग रहा था कि 80 प्रतिशत टेक्निकल समस्या थी जिसमे आयना पाहुजा का कोई दोष नही है !
अभी ज्यादा दिनों की बात नहीं है जौनपुर में एक समारोह की खबर देते हुये आकाशवाणी के उत्तर-प्रदेश के प्रादेशिक समाचार मे पूर्व राष्ट्रपति डा०एपीजे अब्दुल कलाम को अब्दुल कलाम “आजाद” बताया गया था किसी शख्श ने इस संबध में आकाशवाणी के फेसबुक पेज पर दूसरे दिन टिप्पड़ी भी की थी। लेकिन आज तक दर्शकों को ये नही पता चला कि सच क्या है और इस पर आकाशवाणी भी चुप है अगर इस सम्बन्ध को लेकर आकाशवाणी चुप हो सकती है तो आयना पाहूजा के मामले पर भी चुप्पी साधी जा सकती थी और अगर चुप्पी नहीं साध सकते थे तो टेक्नीकल फाल्ट को मानते हुए आयना पाहुजा को वार्निंग देकर छोड़ सकते थे पर ऐसा नहीं हुआ उलटे उसके सारे “असाइनमेंट्स और प्रॉजेक्ट्स” छीन लिए गये ! जबकि यहाँ पर दूरदर्शन को चाहिए था कि आयना पाहुजा के सारे प्रोजेक्ट छीनने के बजाय उसे अच्छा प्रशिक्षण देते !
लोग कुछ भी कहें लेकिन मेरा मानना है कि इस मामले में मीडिया समूह का बहुत ही निराशा जनक रोल रहा है, मैं ज्यादा तो नहीं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि अपने काम की तरफ वापसी करो और आत्महत्या के बारे मे कतई न सोचो, क्योंकि आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नही होता है समस्या का सामना करना ओर डॅट कर मुकाबला करना ही बहादुरी है, अपने मन से ऐसे ख्याल को निकल दो, ये सत्य है कि जीवन मे व्यक्ति को अनेको ऐसे इम्तहाँन देने पड़ते है और उसमें जो फेल होता है वही पास भी होता है इसलिये बहादुर बनो ! हम सबका आशीर्वाद है तुम्हारे साथ, घबराने की जरूरत नही ! ज़िन्दगी मे “अप्स अन्ड डाउन” आता ही रहता है  इससे निराश होने की जरुरत नहीं है! धीरज, लगन और सच्चाई के अपना काम करते रहिये !
मेरा “डीडी” से निवेदन है कि वो “आइना पाहुजा” को एक मौका अवश्य दें और उसका कैरियर तबाह होने से बचायें !
सुनीता दोहरे
प्रबंध सम्पादक
“इण्डियन हेल्पलाइ

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