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उत्तर जो उतर गया

Posted On: 24 Oct, 2016 Others में

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sushma k.

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नमस्कार सभी को बहुत दिनों से ब्लॉग लिखने के लिए उत्साहित थी आज फिर से शुरु करने जा रही हूं
आप सभी का आभार जो आप मुझे पूरा पढ़ने के लिए तैयार है
कई पोस्ट facebook में देखती हू ,या फिर चर्चा में सुनती हूं की लड़कियों का पहनावा क्या होना चाहिए lजिससे उनके साथ कोई बुरा व्यवहार ना हो lया फिर बड़ा बलात्कार जैसा कार्य न हो ल
बड़ा यक्ष प्रश्न है ?यह इस कलयुग का की लड़कियों का पहनावा कैसा हो ,कि उनके साथ जो भी हो रहा है, वह रुक जाए ,क्या यह कहा जा सकता है
कि जहां पर पूरे कपड़े पहनती है ,लड़कियां साड़ी पहनती है, सलवार कमीज पहनती हैं ,या फिर पूरी ढकी रहती हैं ,वहां पर इन शोषण की ,इन बुरे कार्यों की ,इन बुरे बर्ताव की ,इन बुरे व्यवहारों की बिल्कुल भी गुंजाइश नहीं होती ,या अगर वहां होती है तो ,फिर क्यों होती है ,क्योंकि पहनावा ही जब हर शोषण का उत्तर है lतो इस पहनावे के कारण शोषण बंद हो जाना चाहिए l
लेकिन ऐसा होता नहीं है ,क्यों ?यह यक्ष प्रश्न हमें आज सभी से पूछना चाहते हो क्यों? क्यों ?क्यों ?अगर इसका उत्तर पहनावा है तो ,पहनावे से सभी कुछ सही हो जाना चाहिएl लेकिन ऐसा होता नहींl क्यों नहीं होता lबहुत सारे जहां मॉर्डनाइजेशन या फिर आति आधुनिकता का दर्शन होता है वहां पर सिविलाइजेशन चरम सीमा पर दिखाई देती है lछोटे कपड़े, उतारे कपड़े हो ,थोड़े से कपड़े हो ,कैसी भी नग्नता हो लोग बड़े सॉलिड सोबर एवं जगह स्थित व्यवहार के साथ पेश आते हैं तो ,क्या पहनावा ही इन सब चीजों का निचोड़ कहा जाएगाl अगर एक जगह शोषण हो रहा है और एक जगह शोषण नहीं हो रहा है lसबसे पहले हमें यह मानना चाहिए कि ,आखिर ऐसा क्यों हो रहा है हम पहरावे को दोष नहीं दे सकते ल
अगर एक जगह उस पहनावे के बावजूद भी शोषण हो रहा हो और दूसरी जगह अति आधुनिक पहनावे से भी शोषण ना हो रहा हो lतब कही ना कही बात ऐसी लगती है कि एक जेंडर को जबरदस्ती तंग करने वाली बात हैl टीस करने वाली बात है lचिढ़ाने वाली बात है lनहीं तो वह कहीं दूसरी जगह अच्छी क्यों हो जाएगी मेरा व्यक्तिगत मानना है की पहनावा वह दोष नहीं है ,जो की बुरे बर्ताव के लिए उत्तरदाई है lबल्कि नियत कुछ मान्यताएं कुछ अंधविश्वास इसकी जड़ में है lजो बेटियों को कन्याओं को इस शोषण के लिए तैयार भी करता है lऔर इस नियत से इस समाज में शोषण होने भी देता है lपहनावा कुछ समय तब तो आपके तर्क को विराम दे सकता है lलेकिन प्रत्येक परिस्थिति की व्याख्या नहीं कर सकता ,और जो उत्तर सार्वभौमिक ना हो lवह सही कैसे कहा जा सकता हैl हमारे समाज में जो लड़कों की मान्यताएं हैं ,जो उनकी स्वतंत्रता है, स्वच्छन्दता एवं जो उनकी नियत विकसित करने वाली शिक्षाएं हैं lयह बड़ी अजीब सी है ,क्या इस परिवर्तन नहीं होना चाहिए lआप बताइए कि एक अनपढ़ और एक पढ़े लिखे में क्या अंतर है ?अनपढ़ वह है जो l पढ़ा लिखा वह है जो पढ़ा हो lक्या सिर्फ इतना अंतर बताने से उत्तर पूरा हो जाता है lनहीं सिर्फ का उत्तर नहीं है lऔर यह अंतर भी पूरा नहीं है ,क्योंकि अगर सब कुछ पोथापथरी रखने के बाद भी खोपड़ी के मगज में कुछ नहीं घुसा lतो क्या पढ़ा लिखा, और अगर दुनियादारी सीख ली व्यवहारिक बन गए lऔर कागज में कलम चलाना नहीं सीखा तो ,अनपढ़ कैसे रहे फिर कैसे उत्तर पूरा हो गया lनियत का फर्क है lशोषण कमजोर के लिए होता है lआप भीड़ में बैठे हैं lआप घर में बैठे हैं lआप समूह में बैठे हैं ऐसे में आप किसी भी प्रकार का बुरा बर्ताव नहीं करते हैंl चाहे अगले वाला किसी भी पहनावे में हो आप घर के लोगों से बुरा बर्ताव नहीं करते हैं lचाहे वह किसी भी पहनावे में हो क्योंकि नियत साफ है पता है कि घर के लोग हैं वहां डर है संपत्ति से निकाल दिए जाओगे lघर से निकाल दिए जाओगेl बड़ी बदनामी होगी lलोग जानते हैं जूते पड़ेंगे चाहे आप ऐसी जगह पीकर भी पड़े हो तो भी शोषण बुरे बर्ताव बुरे व्यवहार की कोई बात नहीं आती लेकिन जरा सा अंधेरा क्या हुआ कोई अजनबी सी क्या मिल गई आपकी सारे चिंतन विचार नैतिकता हवा हो जाती है आप पोस्ट करने लगते हैं कि पहनावा ही बुरा है अपने आप को बचाने के लिए अपने आप को सही सिद्ध करने के लिए अपने लिए सही तर्क बनाने के लिए फिर यह उत्तर कहां हुआ यह उत्तर तो कहीं कहीं उतर गया पूरा नहीं पड़ा आप को सही साबित करने के लिए तो अपनी नियत बदलिए सोच बदलिए नैतिकता बदलिए और फिर देखिए किसी भी बेटी को सोचना नहीं पड़ेगा अपने उत्तर को ढूंढने के लिए

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