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देश नही बिकने दूंगा साहब ने ताजमहल, लालकिले को 5 साल के लिए बेच दिया ।

Posted On: 29 Apr, 2018 Politics में

SYED ASIFIMAM KAKVIJust another weblog

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जिस लालकिले से चिलाये थे न कि देश नही बिकने दूंगा साहब ने उसी ताजमहल, लालकिले को 5 साल के लिए बेच दिया ।
विश्व के सात अजूबों में शामिल उत्तर प्रदेश के आगर का ताजमहल की देखभाल का जिम्मा आंध्रप्रदेश के जीएमआर ग्रुप और आईटीसी ग्रुप को सौंप दिया गया है. ये दोनों ही कंपनियां इन इमारतों का संरक्षण करेंगी. 5 साल के इस कांट्रेक्ट के दौरान इसकी सारी कमाई देखरेख कर रही कंपनी के हिस्से ही आएगी.दिल्ली के लाल किला को भी 5 सालों के लिए डालमिया समूह को सौंप दिया गया. ये कांट्रेक्ट 5 सालों के लिए है. इसमें भी देखरेख से लेकर हर जिम्मेदारी शामिल होगी. लाल किले पर खड़े हो जाना ही अपने आप में गर्व की बात है। जब एक बार भी इसे देखते हो तो मन मे खयाल आता है कि यह हमारे देश की गौरवगाथा को प्रचंड रूप से खड़े हो कर पूरी दुनिया को दिखा रहा है। लाल क़िले को गिरवी रखने से पहले इतना तो सोच लेते की हमें हमारी आज़ादी का गौरवशाली अहसास कराने वाला 🇮🇳 तिरंगा लाल क़िले की बुलंदी से ही लहराता है । मुगल काल के दिनों ने लालकिले को किला-ए-मुबारक कहा जाता था. लेकिन असल में लालकिला लाल पत्थरों से बना हुआ महल नहीं था. शाहजहां के दरबार में सबसे काबिल आर्किटेक्ट उस्ताद अहमद और उस्ताद हामिद ने इस किले को चूना पत्थर से बनवाया था. लेकिन चूना पत्थर के प्लास्टर की परतें उखड़ने के बाद ब्रिटिश शासन ने इसे लाल रंग में पुतवा दिया.कोहिनूर दुनिया का सबसे बड़ा हीरा. ये हीरा लालकिले के दीवान-ए-खास में शाहजहां के सिंहासन में जड़ा हुआ था.लालकिले का निर्माण शुरू होने के बाद इसे बनने में 10 साल लगे. गलियों, महल के खास हिस्सों को हीरे-जवाहरातों से सुशोभित किया गया. कहा जाता है कि एक गुंबद की छत पर तो हीरे को भी जड़ा गया था, जिससे किले की दीवारें चमका करती थीं.जिस मुगल साम्राज्‍य की नींव मुगल बादशाह बाबर ने 16वीं सदी में रखी थी, उसका अंत भी लालकिले के दीवान-ए-खास में ही हुआ. ब्रिटिश शासन ने अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर द्व‍ितीपर 1857 की क्रांति की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया और आरोप सिद्ध होने पर रंगून भेज दिया.ब्रिटिश शासन ने लालकिले की ज्यादातर कीमती चीजों को बाजार में बेच दिया. कुछ चीजों को ब्रिटिश म्यूजियम्स में बेचा गया, तो कुछ कीमती चीजों को ब्रिटिश लाइब्रेरी और अल्बर्ट म्यूजियम में रखा गया. इनमें बहादुरशाह जफर द्वितीय का ताज, कोहिनूर हीरा और शाहजहां का हरे रंग का शराब का कप भी शामिल है.
फिलहाल, लालकिला दिल्ली के एक फेमस टूरिस्ट स्पॉट में शामिल है. हर साल हजारों विदेशी टूरिस्ट्स मुगल काल की अमिट छाप देखने यहां आते हैं. 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री इसी किले की प्राचीर से देश के नाम संदेश देते हैं.यहां तक तो ठीक है और सच भी है कि लाल किला हो या ताज मुस्लिम मुग़ल बादशाहों ने बनवाया,बनवाया तो इस देश मे कई चीजें अंग्रेजों ने भी।लेकिन अब तो यह हमारा है हमारे देश मे है,हमारा धरोहर है।क्या किसी नफरत,साज़िश या सियासत के तहत हम इसे गिरवी रख देंगे।अपना देश इतना कमज़ोर तो नही के यहां की हकूमत इसकी देख भाल के लायक भी नही।जिस डिस देश से देश के लूटेरे हज़ारो करोड़ लेकर चम्पत हो जा रहें है वहीं केवल 25 करोड़ के हकूमत अपने धरोहर संभालने की ज़िम्मेदारी मुल्क के किसी पूंजी पति को थमा दे बात हज़्म नही होती।देश की आर्थिक स्तिथि खराब है तो इस का हल भी तो सरकार को ही करना है।क्या इसका हल यही है के रेल,तेल,बिजली,शिक्षा, धरोहर,मीडिया सब पूंजीपतियों के हवाले कर दिया जाए? देश को मां कहने वालों, सबसे महत्त्वपूर्ण धरोहर को गिरवी रखकर कल रात तुम्हें नींद कैसे आई ?

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