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मोदी की सरकार केवल सपनों में बन सकती है

Posted On: 8 May, 2014 Others में

SYED ASIFIMAM KAKVIJust another weblog

syed Asifimam kakvi

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आज मुल्क की सोलहवीं लोकसभा इन्तिखाबात में इस मीडिया का कैसा इस्तेमाल किया जा रहा है इस से आप बखूबी वाकिफ है आज पूरा का पूरा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से ले कर प्रिंट मीडिया और साइबर मीडिया सिर्फ एक तबके के एक शख्स को ऐसी शक्ल में पेश कर रहा है ख्वाह वो कोई एक मासूम और बेगुनाह इन्सान हो हालाँकि कि हकीक़त क्या है आज कोई भी इस पर बोलने की हिम्मत गवारा नहीं कर रहा आज कोई भी ये बात कहने की हिम्मत नहीं कर रहा कि ये वह शख्स है जिसने इस मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब को अपने पैरो के तले रौंद कर एक ऐसी तहजीब की बुनियाद रखी एक ऐसी तहजीब को वजूद बख्शा जिसमे नफरत और इंतिकाम के सिवा कुछ न था और ये वो शख्स है जिसने हिन्दू मुस्लिम इत्तेहाद को तबाह-ओ-बर्बाद कर डाला यही वो मोदी है जिसने इस मुल्क के एक सूबे गुजरात की सरजमीं को कई हज़ार बेगुनाह मुसलमानों के खून से नहला दिया |कोई भी इशरत जहाँ फर्जी इनकाउंटर की बात नहीं करना चाहता कोई भी डी जे बंजारा के खत को अवाम के सामने पेश करके ये कहने कि हिम्मत नही रखता कि क्या अब आवाम कातिलों को भी इस मुल्क की कयादत सौंपेगी ?आज अच्छे सहाफियों की तादाद मुसलसल घट रही है आज सहाफी हकगोई इंसाफपसंदी और सच्चाई से महरूम होता जा रहा है आज अख़बारों का भी मकसद सिर्फ आवाम तक खबरें पहुचाना ही हो गया है हालाँकि माजी में अख़बारों का मकसद हाल के अख़बारों के मकसद से मुख्तलिफ था कल के जो मुंसिफ थे आज वह खुद इंसाफ के मुन्तजिर हैं अफ़सोस कहाँ आ गये हम चुनाव अपने आखरी मरहले को तय कर रहा है. भाजपा की हताशा बढ़ती जा रही है. अब मोदी और भाजपा मुद्दों की राजनीति छोड़कर व्यक्तिगत हमले करने में जुट गई है. हाल ही में भाजपा द्वारा मंज़रेआम पर रॉबट वाड्रा के खिलाफ लाया गया वीडियो इस बात की पुष्टि करता है कि भाजपा अब इस क़दर हताश हो गई है कि वह जीतने के लिए व्यक्तिगत गरिमा को भी लांघने से परहेज़ नहीं किया.नितिन गडकरी द्वारा दिगविजय सिंह की निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर आम कर देना इसी हताशा की प्रतीक हैं. अगर प्रियंका गांधी के शब्दों में कहा जाये तो भाजपा बौखलाए चूहों की हरकतें कर रही है. इसके अलावा भाजपा नेताओं के ज़हरीले बयान इसकी मज़ीद तस्दीक करतें हैं.भाजपा की कुल उम्मीदें बिहार और उत्तरप्रदेश पर टिकी हैं, क्योंकि सत्ता का रास्ता इन्हीं राज्यों से होकर जाता है. लेकिन इस वक्त भाजपा की हालत बिहार और उत्तरप्रदेश दोनों जगह खराब है. भाजपा को इस बार सबसे ज्यादा अपने नेताओं से डर है. रहा सवाल बिहार का तो बिहार में ना तो मोदी की लहर है और ना ही भाजपा की असर है, बल्कि लालू का कहर है. जो साम्प्रदायिक शक्तियों पर बिजली की तरह गिर रही है. राजद, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद लालू के साथ सूबे का सबसे बड़ा मतदाता वर्ग खड़ा है, जिससे पार पाना भाजपा के बस की बात नहीं है.बिहार में मुस्लिम मतदाता करीब 17 प्रतिशत हैं, जो इस वक्त लालू के साथ खड़ें हैं. पिछली बार आरजेडी का इत्तिहाद कांग्रेस के साथ ना होने की सूरत में मुस्लिम वोटों में बिखराव आया था. जिसका सीधा फायदा भाजपा और जदयू गठबंधन को मिला था. लेकिन इस बार सूरत बिल्कुल बदल चुकी है.इस बार राजद का गठबंधन कांग्रेस के साथ है और मुस्लिम वोटों का बिखराव नहीं हो रहा है. लेकिन इस बार समीकरण अलग हैं.
इसके अलावा यादव वोटर 12 प्रतिशत हैं, जो बिहार की सीटों पर प्रभावशाली हैं जो पूरी तरह से आरजेडी के साथ जा रहें है. आरजेडी और कांग्रेस को अन्य पिछड़े, दलित, और स्वर्ण वर्ग खासतौर से भूमिहार वोटरों का भी समर्थन हासिल है. भाजपा की सारी उम्मीदें मोदी की लहर पर है. जिसके बल पर वह अपनी नैया पार लगाना चाहती है, लेकिन मौजूदा समय ये लहर बिहार की धरती से नदारद है.भाजपा को अपने स्वर्ण वोटरों के अलावा पासवान के दलित वोटर और उपेंद्र कुशवाहा के पिछड़े वोटर के सहारे की भी उम्मीद है,
रहा सवाल झारखंड का तो यहां झामुमो और कांग्रेस गठबंधन आदिवासी, दलित और मुस्लिम मतदातओं को अपने पाले में करके सब पर भारी है. यहां पर भी भाजपा की हालत खस्ता है. रही सही कसर इनके पुराने सिपाहसालार बाबू लाल मरांडी पूरा कर देंगे जो भाजपा के ही कोर वोट बैंक में सेंधमारी करेंगे.फिलहाल कोडरमा और जमशेदपुर की सीटें जे.वी.एम के पास है. अतीत में ये कांग्रेस के साथ जा चुका है. यदि वह दो तीन सिट जीत जाता है तो वह सेक्युलर मोर्चे को ही सर्मथन देगा. यहां भी भाजपा के अरमानों को उनके ही सिपाहसालार पलीता लगा देंगे.कुल मिलाकर मंज़रनामा यही है कि मोदी की हवा हवाई है. देश के अधिकांश हिस्सों में तो भाजपा और मोदी नदारद हैं, अतः इस बार भाजपा या मोदी की सरकार केवल सपनों में बन सकती है जिसे वह हर रोज़ बना रहें है.

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